त्वचा पर पेपीलोमा वायरस के कारण छोटे, खुरदुरे कठोर पिंड बन जाते हैं जिसे मस्सा कहते हैं। मस्से काले और भूरे रंग के होते हैं। मस्से 8 से 12 प्रकार के होते हैं। कई बार बढ़ती उम्र के साथ कई जगह शरीर पर कई तरह के मस्से निकल आते हैं। 
ये मस्से कई बार ऎसी जगह हो जाते हैं जिनसे परेशानिया आती है जैसे गले पर मस्से निकल आए तो कले में किसी भी तरह के नेकलेस या चेन पहननेसे ये मस्से उसमे उजझ जाते हैं और आपको दर्द होता है। इन अनचाहे मस्सो को आराम से हटाया जा सकता है। बस कुछ इस तरह से रोज किजीए और छू-मंतर हो जाएंगे ये मस्से। 
-मस्सा दूर करने के घरेलू नुस्खे। रूई में नींबू का रस निचोड़ें और इसे मस्से पर लगा दें। कुछ देर बाद इसे पानी से साफ करें। लगातार दो-तीन सप्ताह तक ऎसा करने पर आप महसूस करेंगे कि मस्सा गल चुका है।
-फ्लॉस या धागे से मस्से को बांध 2-3 हफ्ते तक छोड़ दें। मस्से में रक्त प्रवाह रूक जाएगा और वह खुद ही निकल जाएगा।
- खट्टे सेब लेकर उनका जूस निकाल लीजिए और उसको दिन में कम से कम तीन बार मस्से की जगह पर लगाइए। इस जूस को नियमित रूप से लगाने पर आप पाएंगे कि मस्से धीरे-धीरे झड़ रहे हैं और तीसरे सप्ताह तक लगभग समाप्‍त हो जाएंगे।
-मस्से को समाप्‍त करने के लिए एक अगरबत्ती जला लें और अगरबत्ती के जले हुए गुल को मस्से का स्पर्श कर तुरन्त हटा लें। ऎसा 8-10 बार करें, ऎसा करने से मस्सा सूखकर झड़ जाएगा। अगर ज्‍यादा मस्से हों तो बारी-बारी से सभी मस्सों को इसी तरीके से जलाकर झड़ा दें। ध्यान रहे, अगरबत्ती का स्पर्श सिर्फ मस्से पर ही होना चाहिए।
- आलू का प्रयोग करने से भी मस्‍से समाप्‍त होते हैं। आलू को छीलकर काट लीजिए, उसके कटे हुए हिस्‍से को मस्‍सों पर रगडिए, ऎसा करने से कुछ दिनों में मस्‍से समाप्‍त हो जाते हैं। 
- मस्‍से को समाप्‍त करने के लिए प्‍याज भी फायदेमंद है। एक प्याज को लेकर उसके रस को दिन में एक बार नियमित रूप से लगाने से मस्‍से समाप्‍त होते हैं।
-बेकिंग सोडा और अरंडी के तेल को रात में मस्सों लगाकर सो जाइए, ऎसा करने से मस्‍से धीरे-धीरे मस्‍से समाप्‍त हो जाते हैं। 
- रात को सोने से पहले और सुबह उठने के बाद मस्‍सों पर शहद लगाइए, इससे मस्‍से खत्‍म हो जाते हैं।
- मस्‍से वाले हिस्‍से को पाइनेपल के जूस में रखिए, इससे मस्‍से नष्‍ट करने वाले एंजाइम होते हैं। फूल गोभी का रस मिलाने से मस्‍से समाप्‍त हो जाते हैं।
- लहसुन की कली को छील लीजिए, उसके बाद उसे काटकर मस्‍सों पर र‍गडिए, कुछ दिन बाद मस्‍से सूखकर झड़ जाएंगे।

चावल के अलावा इसका पानी भी सेहत के लिए फायदेमंद है। चावल को पकाने में इस्तेमाल होने वाले पानी में कई गुण छिपे होते हैं। यह चेहरे व बालों को फायदा पहुंचाता है। इसमें कई पौष्टिक तत्त्व जैसे विटामिन, प्रोटीन व एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जिससे स्किन खिली-खिली रहती है। यह स्किन के सूखेपन व कील मुहांसों को भी दूर करता है व जल्द बुढ़ापा आने से भी रोकता है।
ये करें: चावल को पानी में पकाने के बाद ठंडा कर लें। छानकर पानी अलग करें और इससे चेहरे पर 15 मिनट तक मसाज करने के बाद साफ पानी से चेहरा धोलें। इसके अलावा इस पानी को पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है। पानी की दूर करने के लिए बीमार व छोटे बच्चों को चावल का पानी पिलाते हैं।
डिहाइड्रेशन की समस्या गर्मियों में अधि‍क होती है। चावल का पानी आपके शरीर में पानी की कमी होने से बचाता है। बुखार होने पर चावल का पानी पीएं। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। जरूरी पोषक तत्व भी मिल जाएंगे। इस पानी में भरपूर कार्बोहाइड्रेड्स और अमीनो एसिड्स होते हैं। ये जो बॉडी को एनर्जी देते हैं।

पिता बनने की इच्छा रखने वाले लोगों को जल्दी बिस्तर पर सोने जाने की आदत फायदेमंद होती है. शोधकर्ताओं ने पाया है कि आधी रात से पहले सोने वालों में शुक्राणु ज्यादा बेहतर व स्वस्थ रहते हैं. एक शोध में पता चला है कि ऐसे लोग, जिन्होंने रात 8 बजे से 10 बजे के बीच में सोए, उनमें शुक्राणुओं की गतिशीलता सबसे अच्छी रही. इसका मतलब है कि शुक्राणु अच्छे तैराक रहे और उनके अंडे के निषेचित करने की संभावना अच्छी रही. दूसरी तरफ ऐसे लोग जो आधीरात के बाद सोने गए, उनमें शुक्राणुओं की संख्या कम रही और उनके शुक्राणु जल्दी मर गए. छह घंटे या इससे कम की नींद इसे और बदतर बना देती है.
डेली मेल की शनिवार (13 मई) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के हारबिन मेडिकल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि देर से बिस्तर पर जाना नुकसानदेह है, क्योंकि यह शुक्राणु विरोधी एंटीबॉडी के स्तर को बढ़ा देते हैं. यह एक प्रकार का प्रोटीन है, जिसे इम्यून सिस्टम द्वारा उत्पन्न किया जाता है. यह स्वस्थ शुक्राणुओं को नष्ट कर देता है. पहले के शोध में पता चला था कि एक व्यक्ति जो आठ घंटे की नींद ले रहा है, उसकी तुलना में छह घंटे की नींद लेने वाले में शुक्राणुओं की संख्या 25 फीसदी कम होती है.

इस शोध का प्रकाशन पत्रिका 'मेडिकल साइंस मॉनिटर' में किया गया है. इसमें शोध दल ने 981 लोगों के नींद के तरीकों की निगरानी की. इसमें 981 स्वस्थ लोगों को एक निश्चित समय 8 बजे से 10 बजे, 10 बजे से मध्यरात्रि या इसके बाद बिस्तर पर जाने के लिए निर्देश दिया गया. वैज्ञानिकों ने उनके नियमित शुक्राणुओं के नमूने लेकर उनके शुक्राणुओं की संख्या, आकार और गतिशीलता की जांच की.

नियमित व्यायाम अस्थिमज्जा में जमा हो रहे वसा को घटाने में कारगर है और इससे हड्डी की गुणवत्ता हफ्तों में सुधारी जा सकती है. यह बात एक शोध में सामने आई है. शोधपत्र का प्रकाशन 'जर्नल ऑफ बोन एंड मिनरल रिसर्च' में किया गया है. इसमें कहा गया है कि मोटापे के शिकार व्यक्तियों में हड्डी की गुणवत्ता बेहद खराब होती है. वे अपने दुर्बल समकक्षों की तुलना में अपनी हड्डियों को व्यायाम से ज्यादा स्वस्थ रख सकते हैं.

अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर माया स्टेनर ने कहा, "इस शोध के प्रमुख निष्कर्षो में से एक यह है कि व्यायाम न केवल समूचे शरीर के लिए, बल्कि हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है." स्टेनर ने कहा, "बहुत ही थोड़े समय में हमने देखा कि दौड़ने वाले चूहों की हड्डियां बहुत ही स्वस्थ थीं."

 हालांकि, चूहों पर किया गया शोध सीधे तौर पर मानव स्थितियों पर लागू नहीं होता, लेकिन जो स्टेम कोशिकाएं चूहों में हड्डी बनाती हैं, वह ठीक मानव में हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं की तरह ही होती हैं. स्टेनर ने कहा, "व्यायाम से हड्डी ज्यादा सुगठित होती है. हमारा बोन बायोमेकेनिक्स का शोध बताता है कि हड्डी की गुणवत्ता और मजबूती व्यायाम के साथ बढ़ती है."

प्रतिदिन अपने आहार में फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ाने से पैरों में रक्त प्रवाह को प्रभावित करने वाली धमनियों के रोगों के विकास का खतरा कम हो सकता है. पेरीफरल आर्टरी डिसीस (पीएडी) पैरों की धमनियों को संकुचित करती है, मांसपेशियों में रक्त प्रवाह को सीमित कर देती है और इससे चलने या खड़े रहने के दौरान तेज दर्द होता है. निष्कर्षो से पता चला है कि जो लोग दिन में तीन या इससे अधिक बार फलों व सब्जियों का सेवन करते हैं, उन्हें फलों व सब्जियों का कम सेवन करने वाले लोगों की तुलना में 18 प्रतिशत कम पीएडी होने का खतरा होता है.

न्यूयॉर्क स्थित न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के सहायक प्राध्यापाक जेफरी बर्गर ने कहा, "हमारे अध्ययन से यह जानकारी मिली है कि आहार में अधिक फलों और सब्जियों को शामिल करने जैसे सरल तरीकों से पीएडी के प्रसार से बचने में बड़ी मदद मिल सकती है."
इस शोध के लिए औसतन 64 वर्ष आयु वर्ग के 37 लाख लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें से 6.3 प्रतिशत लोग पीएडी से पीड़ित थे. इन लोगों में 29.2 प्रतिशत लोग नियमित तौर पर तीन से अधिक बार फलों व सब्जियों का सेवन करते थे. यह शोध 'आर्टियोस्केलेरोसिस थ्रॉम्बोसिस एंड वस्कुलर बॉयोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित किया गया है.


लड़के अक्‍सर ज्‍यादा स्‍मार्ट बनने के चक्‍कर में अपनी पार्टनर से कुछ भी बोल देते हैं, अगर आपको अपने रिश्‍तों की तनिक भी परवाह है और रिश्‍तों को दूर तक ले जाना चाहते हैं तो कुछ बातों को बोलने से पहले एक बार जरूर सोच लेना चाहिए। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं जिन्‍हे अपनी गर्लफ्रेंड या वाइफ से नही करनी चा‍हिए। इससे आपके रिश्‍तों में दरार आ सकती है। तो इन शब्‍दों का प्रयोग कभी न करें।

"क्या तुम इतना सब खा लोगी?"
अक्सर पुरूष अपनी महिला साथी के साथ बाहर डिनर पर या फिर डेट पर जाते हैं तो गलती से उन्हें कह देते हैं कि तुम यह सब कुछ खा लेती हो। वह इस बात का उल्ट मतलब निकाल सकती है कि आप उसे मोटा कह रही हो।

"वाउ वो लड़की हॉट है"
हमेंशा अपनी पार्टनर के सामने उसी की तारीफ करना चाहिए। पार्टनर के सामने भूल से भी किसी दूसरी लड़की की तारीफ नही करनी चाहिए। या कभी भी किसी दूसरी महिला या लड़की को ये नही कहना चाहिए कि वाउ वो लड़की कितनी हॉट है।

"तुम अपनी मां की तरह बात कर रही हो"
तुम बिल्‍कुल अपनी मां की तरह बात कर रही हो जैसे वाक्‍स का प्रयोग न करें। पार्टनर की तुलना कभी भी उसकी मां, बहन या सहेली से न करें क्योंकि हर कोई अपनी अलग पहचान चाहता है।


आप सुबह पूजा करते हैं कि नहीं...?
आपका जवाब हां होगा।
 लेकिन केवल हाथ जोड़ते हैं कि, अगरबत्ती जलाते हैं या दीपक जलाते हैं...?
 इसका जवाब जो भी हो आपकी आदत है। लेकिन जब ये आदत आपको स्वस्थ रखने में मदद करे तो इसे करने से पीछे भी नहीं हटना चाहिए। आज हम बात करने वाले हैं दीपक जलाने के फायदों के बारे में। क्या आपको मालुम है कि घी का दीपक जलाने से केवल मंदिर की ही शोभा नहीं बढ़ती अपितु स्वास्थ्य भी निरोग रहता है। इसके बारे में विस्तार से इस लेख में पढ़ें।

हिंदु परंपरा में पूजा के दौरान दीपक जलाने की मान्यता है। दीपक वह पात्र है, जिसमें घी या तेल रख कर सूत में ज्योति प्रज्वलित की जाती है। पारंपरिक तौर पर केवल मिट्टी के दीये जलाये जाते हैं लेकिन अब लोग घर में धातु के दीये भी जलाने लगे हैं। दीपक जलाने के पीछे बुजुर्ग तर्क देते हैं कि इससे घर का अंधकार दूर होता है। लेकिन इनके फायदों के बारे में विज्ञान में भी पुष्टि की गई है।

करता है एयर प्यूरीफायर का काम
दीपक के ज्योत का धुंआ घर के लिए एयर प्यूरीफायर का काम करता है बशर्ते आपने दीपक घी या तेल(सरसों) का जलाया हो। घी और तेल की सुगंध घर की हवा में मौजूद हानिकारक कणों को बाहर निकालती है। साथ ही दीपक की तरंगे घर में मौजूद उदासीनता को दूर करने में मदद करती है। माना जाता है कि तेल के दीपक का असर दीपक के बुझने के आधे घंटे बाद तक वातावरण में रहता है। वहीं घी का दीपक, बुझने के बाद करीब चार घंटे तक आसपास के वातावरण को सात्विक बनाए रखता है। इससे अस्थमा के मरीजों को भी काफी फायदा पहुंचता है।

रोग दूर भगाए
दीपक घर से बीमारियों को भी दूर करने में मददगार होता है। खासकर जब आप दीपक के साथ जब एक लौंग जलाते हैं तो इसका दोगुना असर होता है। घी में चर्मरोग दूर करने के सारे गुण होता है। इस कारण माना जाता है कि घी का दीपक जलाने से घर के रोग दूर भागते हैं। इसके जरिये प्रदूषण दूर होता है। घी का दीपक जलाने से पूरे घर को फायदा होता है। चाहे उस घर का कोई व्यक्ति पूजा में शामिल हुआ हो या ना हुआ हो। दरअसल जब दीपक में उपस्थित घी अग्नि के संपर्क में आता है तो वातावरण को पवित्र बना देता है।


पुल्टिस लगाना या कहिए प्रलेप लगाना एक पुरानी और असरदार घरेलू चिकित्सा प्रणाली है। इसमें हर्ब और अन्य कई प्रकार के नुस्खों को पीस या लेप बनाकर त्वचा पर लगाया जाता है, जोकि भांति प्रकार की समस्याओं को संक्रमण आदि से निजात दिलाते हैं। पुल्टिस हर्ब के फायदे तो शरीर को पहुंचाता है लेकिन यह प्रकृतिक तेल या टिंचर आदि की तरह उतना अधिक सांद्र नहीं होता है। चलिए तो इस लेख के माध्यम से पुल्टीस क्या है, इसके फायदे और बनाने की विधि आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं।

हर्ब की पोटली (प्रलेप यानी पुल्टिस)
पुल्टिस को कई तरह से समढा और परिभाषित किया जा सकता है, जैसे पुल्टीस अर्थात - किसी गीली दवा को पीडित अंग पर चढ़ाने की क्रिया, अंग पर कोई गीली दवा छोपना या रखना, किसी अंग विशेषतः त्वचा पर किसी ओषधि का किया जानेवाला लेप या फिर किसी गाढ़ी चीज का किसी दूसरी चीज़ पर किया जानेवाला लेप। पुल्टिस को दरअसल हर्ब्स, चिकनी मिट्टी, चारकोल, लवण या अन्य लाभकारी पदार्थ आदि को पीस कर या फिर ऐसे ही कपड़े में रखकर बनाया जाता है और फिर त्वचा पर रखा जाता है। और फिर इसे की घंटों के लिए वहां पर रखा रहने दिया जाता है। नीचे कुछ प्रकार के पुल्टिस दिए गेए हैं, जिन्हें अलग अगल मर्ज के इलाज में उपयोग किया जता है।

विषाक्त बाहर करने व दर्द दूर करने के लिए पुल्टिस
इस पुस्टिस में जड़ी-बूटियों से तैयार पोटली द्वारा शरीर की मालिश की जाती है। दर्द निवारक होने के साथ इससे मांसपेशियों की अकड़न व ऐंठन, स्पॉन्डिलाइटिस, जोड़दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस और वात से जुड़े दर्द व समस्या आदि में आराम मिलता है। इस प्रक्रिया में जड़ी-बूटियों के चूर्म व रस को मरीज की प्रकृति के हिसाब से उचित मात्रा में लेकर एक लेनन के कपड़े से भर लें और एक पोटली का रूप दे। इसके बाद पोटली को औषधीय तेल में गर्म कर त्वचा पर रखें।

सूजन, दर्द और घाव के लिए पुल्टिस के प्रकार
राई की पुल्टिस बनाकर दर्द अथवा सूजन वाली जगह पर इसका सेंक करने से तत्काल राहत मिलती है। राई को पीसकर एरंड के पत्तों पर लेप करे और दर्द वाले अंगो पर लगायें। अलसी के तेल में नमक व हल्दी मिलाकर पुल्टिस बना लें और उससे चोट के कारण आई सूजन तथा दर्द वाले स्थान पर रखकर सेंकाईं करें। अजवायान को पीसकर उसका लेप सूजन वाले अंगों व घाव पर लगायें।

लहसुन पुल्टिस
लहसुन पीसकर पुल्टिस बांधने से दमा, गठिया, सायटिका तथा अनेक प्रकार के चर्मरोग दूर हो जाते हैं। इसकी पुल्टिस जहां चोट लगे या सूजे भाग की सृजन व दर्द भगाती है, वहीं उसमें कुष्ठ रोग तक को दूर कर देने की क्षमता होती है। किसी अन्य रेमेडी की ही तरह इस घरेलू चिकित्सा विकल्प को पक्के चिकित्सकीय विकल्प की तरह नहीं उपयोग करना चाहिए। यदि समस्या बड़ी हो या फिर लंबे समय तक ठीक न हो रही हो तो तत्काल प्रभाव से डॉक्टर से सलाह व इलाज करना चाहिए। हालांकि छोटी-मोटी समस्या के लिए आप बेहिचक इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।


सुंदर खूबसूरत और बेदाग़ चेहरा हर किसी की ख्वाहिश होती है, पर अगर चेहरे पर एक छोटा सा दाग-धब्बा भी दिखाई दिया तो वो खूबसूरती के साथ साथ आत्मविश्वास को कम कम कर सकता है। वैसे तो बाजार में ऐसे कई उत्पाद हैं जो चेहरे से काले धब्बे हटा सकते हैं लेकिन इन्हें लगाने के कुछ समय बाद ही इनका असर ख़त्म हो जाता है। इसलिए आपको ऐसे उपायों की जरुरत है जो लंबे समय तक फायदेमंद हो और जो दाग धब्बों को जड़ से मिटा दें। आइए जानें ऐसे ही कुछ घरेलू उपाय-

टमाटर (Tomatoes for blemish removal)
टमाटर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी त्वचा के दाग मिटाने में बहुत असरदार होते हैं। टमाटर को नियमित रूप से इस्तेमाल करने पर त्वचा में निखार आता है। इसमें लायकोपेन होता है जो धूप से काली पड़ी त्वचा का इलाज करता है। चेहरे पर टमाटर का रस लगाकर 15 से 20 मिनट तक छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो लें।

नींबू का रस (Lemon or potato Juice)
 नींबू या आलू का रस चने के आटे में मिलाकर पेस्ट बना लें। 15-20 मिनट के लिए चेहरे पर लगाकर फिर धोएं। इसके नियमित इस्तेमाल से दाग धब्बे दूर होते हैं।

बादाम और दूध (Reduce blemishes with almonds and milk)
बादाम में मौजूद विटामिन-ई जहाँ त्वचा की देखभाल करता है वहीँ दूध में लैक्टिक एसिड होता है जो त्वचा से रेशे हटाता है। अपने चेहरे और गर्दन पर बादाम का तेल लगाकर मालिश करें और 15 -20 मिनट बाद अतिरिक्त तेल को पोछ लें। ऐसा नियमित रूप से करने पर जल्द फायदा मिलेगा। अन्य तरीके में 7– 8 बादाम पानी में 12 घंटे या उससे ज्यादा समय के लिए भिगोयें और फिर छिलके निकालकर उन्हें पीसकर उसमे थोड़ा सा दूध मिलाएं। इस पेस्ट को दाग- धब्बों पर लगाएं और पूरी रात के लिए छोड़ दें। सुबह ठंडे पानी से धो डालें। 15 दिन में ही इसका असर दिखने लगेगा।

आलू (Home remedy with potato)
चेहरे से दाग धब्बे मिटाने के लिए सबसे सस्ता और अच्छा उपाय है आलू। अगर आपने आलू के स्लाइस बनायें हो तो चेहरे पर उन्हें 10 मिनट तक घिसें और यदि कसे हुए हों तो चेहरे पर लगाकर 10 मिनट के लिए छोड़ दें। दिन में 2-3 बार ऐसा करने से इसका असर जल्द दिखाई देगा।

पुदीना (Mint leaves to reduce scars)
पुदीना मुंहासों पर अच्छी तरह से काम करके उन्हें सुखाकर त्वचा के रंध्रों को साफ़ करता है। पुदीना के पत्तों में पानी मिलाकर उन्हें पीस लें। यह पेस्ट धब्बों पर लगाएं और 15- 20 मिनट के लिए छोड़ दें फिर ठंडे पानी से धो डालें। ऐसा हफ्ते में 1 बार जरूर करें।

अक्सर गोरेपन को खूबसूरती का पैमाना माना जाता है। इसी खूबसूरती को हासिल करने के लिए तरह-तरह के उपाय भी किए जाते हैं। महंगी से महंगी क्रीम, लोशन आदि सबका उपयोग किया जाता है। लेकिन जब आप घर बैठे गोरी त्वचा पा सकती हैं तो इतनी भागदौड़ भला क्यूं। इस लेख को पढ़ें और गोरी त्वचा पाने के घरेलू उपाय जानें।
  • एक बाल्टी गुनगुने पानी में कुछ ठण्डे या दो नींबू का रस मिलाकर गर्मियों में कुछ महीने तक नहाने से त्वचा का रंग निखरने लगता है।
  • आंवले का मुरब्बा रोज खाने से दो-तीन महीने में ही रंग निखरने लगता है।
  • गाजर का जूस आधा गिलास खाली पेट सुबह लेने से एक महीने में रंग निखरने लगता है।

  • पेट को हमेशा ठीक रखें, कब्ज न रहने दें।
  • अधिक से अधिक पानी पीएं।
  • चाय कॉफी का सेवन कम करें।
  • रोजाना सुबह शाम खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सोंफ खाने से खून साफ होने लगता है और त्वचा की रंगत बदलने लगती है।

गोरी त्वचा पाने के घरेलू उबटन

इन सब उपायों के अलावा आप विभिन्न प्रकार के घरेलू उबटन लगा कर भी अपनी त्वचा की रंगत निखारी जा सकती है।

हल्दी पैक 

त्वचा की रंगत को निखारने के लिए हल्दी एक अच्छा तरीका है। पेस्ट बनाने के लिए हल्दी और बेसन या फिर आटे का प्रयोग करें। हल्दी में ताजी मलाई, दूध और आटा मिला कर गाढा पेस्ट बनाएं, इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 10 मिनट लगाएं और ठंडे पानी से धो लें।

हनी आल्मड स्क्रब

बादाम भी रंगत निखारने का काम करता है। रात को 10 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उसे छील कर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में थोड़ा सा शहद मिलाएं और इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाकर स्क्रब करें।

चंदन

गोरी रंगत देने के अलावा यह एलर्जी और पिंपल को भी दूर करता है। पेस्ट बनाने के लिए चंदन पाउडर में 1 चम्मच नींबू और टमाटर का रस मिलाएं और पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन में अच्छी तरह से लगाकर थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से धो लें। 

केसर पैक


उबटन बनाने के लिए आपको दही और क्रीम में थोड़ा सा केसर मिला लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद इसे धो लें। केसर के इस उबटन से भी कुछ दिन में आपकी त्वचा गोरी होने लगेगी।

चिरौंजी का पैक

गोरी रंगत के लिए मजीठ, हल्दी, चिरौंजी का पाउडर लें इसमें थोड़ा सा शहद, नींबू और गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे, गरदन, बांहों पर लगाएं और एक घंटे के बाद चेहरा धो दें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से चेहरे का रंग निखर जाएगा।

मसूर दाल पैक

मसूर की दाल का पाउडर लें इसमें अंडे की जर्दी, नीबू का रस व कच्चा दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। रोज इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं, सूखने पर ठंडे पानी से धो लें। चेहरे का रंग निखर जाएगा।

बेसन का उबटन

बेसन 2 चम्मच, सरसों का तेल 1 चम्मच और थोड़ा सा दूध मिला कर पेस्ट बना लें। पूरे शरीर पर इस उबटन को लगा लें। कुछ देर बाद हाथ से रगड कर छुडाएं और स्नान करें। त्वचा गोरी व मुलायम हो जाएगी।
इन सब घरेलू उपायों को अपना कर आप कुछ ही दिनों में स्वस्थ, सुंदर, चमकदार और गोरी त्वचा पा सकती है। लेकिन कोई भी नुस्खा आजमाने से पहले अपनी त्वचा के प्रकार को जांच लें।

आंखें हमारे शरीर के सबसे जरुरी अंगो में से एक होती हैं। आंखों कि रोशनी में थोड़ी सी भी कमी आने पर हमें काफी समस्या का सामना करना पड़ता है।
Eyesight का कम होना myopia (दूर का धुंधला दिखना) और hyperopia (पास का धुंधला दिखना) से भी जुड़ा हुआ है। कुछ विशेष कारक जैसे genetics, nutrition की कमी, बढ़ती उम्र (aging) और आंखों पर अत्यधिक तनाव होने पर यह समस्या होती है।
आंखों की रोशनी कम होने के सबसे सामान्य लक्षण हैं – धुंधली दृष्टि (blurry vision), अक्सर सिरदर्द होना (frequent headache) और आंखों में पानी आना (watery eyes).
इसकी मुख्य वजह का सही पता लगाने के लिए सबसे पहले अपने doctor से जांच कराएं। कभी-कभी यह परेशानी कुछ serious issues के कारण भी हो सकती है जैसे मोतियाबिंद, आंखों की मांसपेशियों का कमजोर या damage होना या optic neuropathy से ग्रस्त होना आदि।
सामान्य तौर पर आंखों की कम रोशनी का इलाज डॉक्टर्स ही कर सकते हैं। लेकिन फिर भी आप कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर अपनी आंखों की को बढ़ा सकते हैं।
आंखों की रोशनी बढ़ाने के 10 सबसे कारगर घरेलू उपचार नीचे दिए जा रहें हैं –

1. आंखों के व्यायाम करें (Eye Exercise)

Eye exercise करने से आंखों की मांसपेशियां लचीली (flexible) होती हैं, उनमें खून का प्रभाह बढ़ता है और vision ठीक होता है। इसे regular करने से आंखों का तनाव भी कम होता है और concentration भी बढ़ता है।
Exercise – 1
  • एक पेंसिल को हाथ में vertically सीधा आंखों के सामने करें। पेंसिल बिलकुल नाम के सामने आंखों के बीच होना चाहिए। अपना ध्यान पेंसिल की नोंक पर बनायें रखें।
  • अब धीरे-धीरे इस पेंसिल को अपनी आंखों के पास लायें और फिर दूर ले जाएं।
  • इसे रोजाना 10 बार करें।
Exercise – 2
  • अपनी आंखों की पुतलियों को clockwise direction में घुमाएँ। ऐसे कुछ seconds के लिए करें।
  • अब इन्हें anti-clockwise direction में घुमाएँ।
  • इसे 4 से 5 बार repeat करें।
  • हर round के बीच में अपनी आंखों को झपकाएं।
Exercise – 3
  • अपनी आंखों की पलकों को लगातार बिना रुके 20 से 30 बार जल्दी-जल्दी झपकाएं।
  • अब अपनी आंखों को बंद करके उन्हें rest दें।
  • ऐसा दिन में 2 बार करें।
Exercise – 4
  • अपने से दो से तीन मीटर दूर रखी किसी वस्तु पर ध्यान लगायें। शुरुआत में ऐसा 5 मिनट के लिए करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाते जाएं।
  • ध्यान लगाने के दौरान अपनी आंखों को बिलकुल भी न झपकाएं।
  • इस exercise को रोजाना कुछ महीनों के लिए करें।

2. Sunning और Palming

Sunning और palming भी आंखों की रोशनी के लिए काफी फायदेमंद होते हैं क्योंकि यह आंखों के लेंस और ciliary muscles को flexible और मजबूत बनाते हैं।
सूर्य में natural healing power होती है जिसे हम sunning के जरिये ग्रहण कर सकते हैं। Palming हमारे शरीर में relaxation लाती है और हमारे senses को सक्रिय करती है।
  • Sunning – सुबह जब सूरज पूर्व दिशा में हो तब उसके ठीक सामने आंखें बंद करके बैठ जाएं। इस दौरान deep breathing करते रहें और अपना ध्यान पलकों को पार करके आ रही सूरज की रोशनी पर लगाये रखें। ऐसा रोज कुछ मिनट के लिए फिर palming करें।
  • Palming – अपनी दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़ें और फिर इन्हें अपनी दोनों बंद आंखों पर gently रख लें। हथिलियों को रगड़ने से पैसा हुई heat को अपनी आंखों में महसूस करें। इस दौरान यह ध्यान रखें कि आपकी आंखें आपकी हथेलियों से पूरी तरह से ढकी होना चाहिए और उनमें कोई रोशनी अन्दर नहीं जाना चाहिए। आप इसे रोज sunning के ठीक बाद करें। इसे आप दिन में कामकाज के दौरान बीच-बीच में भी कर सकते हैं।

3. Acupressure/Acupuncture

हमारी आंखें चारों तरफ से कुछ हड्डियों के combination से surrounded होती हैं जिन्हें acupressure/acupuncture points भी कहा जाता है।
  • चित्र में दर्शाए गए हर acupressure point की 10 मिनट के लिए हलके हाथों से मालिश करें। शुरुआत point #1 से करें और धीरे-धीरे गोल घूमते हुए point #7 तक आयें। दिन में इसे आप तीन-चार बार कर सकते हैं।
    Note – गर्भवती महिलाएं इसे करने से पहले किसी trained therapist से consult करें। यदि आंखों के चारों तरफ कोई scar, दाग, infection या जला हुआ भाग हो तो वहां मालिश न करें।
  • सुबह जल्दी उठकर ओश वाली घास में नंगे पैर 30 मिनट चलना भी acupuncture therapy का हिस्सा है। क्योंकि इससे पैरों के nerve fibers activate हो जाते हैं जो eyesight को improve करते हैं। पैरों की दूसरी और तीसरी उंगली में आंखों के लिए reflexology pressure points होते हैं जो activate होने पर आंखों की रोशनी बढ़ाते हैं। साथ ही सुबह-सुबह घास के हरे माहौल में घूमने से आंखों को सुख महसूस होता है।

4. Ginkgo Biloba Herb

Ginkgo Biloba एक पेड़ होता है जो चीन, जापान और इसके आसपास के इलाकों में पाया जाता है। प्राचीन समय से ही इसका भोजन और चिकित्सा में काफी इस्तेमाल होता आ रहा है। Ginkgo Biloba बाजार में capsule, powder और tea के रूप में आसानी से मिल जाता है।
आँखों के आसपास के खून के संचार को नियमित करता है। यह आंखों के vision को improve करने के साथ-साथ glaucoma और macular degeneration जैसी बिमारियों से भी बचाता है। हाल ही में हुई research से साबित हुआ है कि यह retinopathy के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है।
Ginkgo biloba को anxiety में relieve देने वाला और याददाश्त बढ़ाने वाला herb भी माना जाता है। पागलपन (dementia) और Alzheimer’s की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह काफी फायदेमंद है।
रोज 120-mg standardized ginkgo biloba capsules दो बार करें।
Note – इस herb को छोटे बच्चों को न दें और जो लोग मधुमेह (diabetes) से पीड़ित हैं वो इसे लेने से पहले अपने doctor से consult करें।

5. Bilberry

Bilberry भी आँखों के स्वास्थ्य और vision के लिए फायदेमंद herb है। यह रतौंधी के इलाज में भी उपयोगी साबित होती है क्योंकि यह retina के visual purple component के regeneration को stimulate करती है।
यह आंखों को macular degeneration, glaucoma और मोतियाबंद (cataract) जैसे गंभीर रोगों से भी बचाती है। इसमें powerful antioxidant, anti-inflammatory properties और anthocyanoside नामक chemical पाया जाता है जो diabetes और high blood pressure से related problems में फायदा होता है।
  • रोज ढेड़ कप पकी हुई bilberry खाएं।
  • आप doctor से consult करके bilberry के supplements भी ले सकते हैं।
Note – चूंकि यह अन्य herb और medicines के साथ भी interact कर सकता है इसलिए इसके dose लेने से पहले doctor से सलाह लें।

6. बादाम (Almond)

बादाम में omega-3 fatty acids, vitamin E और antioxidants पाए जाते हैं जो आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए उपयोगी हैं। यह याददाश्त और concentration को बढ़ाने में भी मदद करते हैं।
  • रात को 5 से 10 बादामों को पानी में डुबोकर रख दें।
  • सुबह इनके छिलकों को अलग करके पीस लें।
  • अब इसे दूध में घोलकर पी लें।
  • अपनी आंखों को स्वस्थ रखने के लिए इसका सेवन रोज करें।

7. सौंफ (Fennel)

सौंफ में ऐसे nutrients और antioxidants पाए जाते हैं जो cataracts के progression को slow करते हैं। Ancient Romans सौंफ को आंखों के लिए वरदान मानते थे।
  • सौंफ, बादाम और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें।
  • रोज रात को सोने से पहले इसकी एक चम्मच को गर्म दूध में डालकर पियें।
  • इसे लगातार 40 दिनों तक रोज करें।

अतिरिक्त ध्यान देने वाली बातें

  • अपने TV या computer की screen को ज्यादा पास से न देखें। साथ ही इनकी screen की brightness को कम ही रखें जिससे इसका ज्यादा बुरा असर आपकी आंखों पर न पड़े। आप इनमें anti-glare screen भी लगवा सकते हैं।
  • डिम या धीमी रोशनी में न पढ़ें क्योंकि इससे eye muscles में strain बढ़ता है।
  • काम के दौरान हर 20 मिनट के दौरान अपनी आंखों को थोड़ा rest दें।
  • धूप में निकलने के दौरान sunglasses का इस्तेमाल करें।
  • हमेशा अच्छी quality के eye cosmetics का ही इस्तेमाल करें।
  • अच्छी नींद लें क्योंकि नींद की कमी से आंखों पर strain बढ़ता है।
  • आंखों की रोशनी को बढ़ाने के कुछ और प्रचलित घरेलू नुस्खे
  • रोज पपीता का सेवन करने से आंखों की रोशनी तेज होती है।
  • सेव का मुरब्बा बनाकर सेवन करें और ऊपर से एक गिलास दूध पियें, ऐसा रोज करने से आपकी आंखें स्वस्थ रहेंगी।
  • नियमित रूप से फल और हरी सब्जियों का सेवन करें।
  • गाजर में अत्यधिक vitamin अ पाया जाता है। इसलिए इसका हलवा, सब्जी या सलाद बनाकर नियमित सेवन करें। आप इसे कच्चा भी खा सकते हैं।
  • काली मिर्च के पाउडर में पिसी मिश्री और घी मिलकर सेवन करने से भी आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • रोज नहाने से पहले अपने पैरों के तलवों में तेल की मालिश करें, इससे भी आंखों को काफी फायदा मिलता है।
  • सुबह-सुबह नंगे पैर ओस पड़ी घास में चलें। इससे आपकी कमजोर आंखें स्वस्थ हो जाएँगी।
  • सुबह उठकर आंखों पर ठन्डे पानी के छींटे मारें।
  • यदि आपकी आंखों में दर्द रहता है तो हरे धनिये का रस निकलकर छान लें और इसकी 2-2 बूंदें अपनी आंखों में डालें।
मोटापा, शरीर में अधिक चर्बी जमा हो जाने के कारण होता है। इसे शरीर के बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के द्वारा नापा जाता है। आम तौर पर 18.5 से 25 के बीच के BMI को सामान्य माना जाता है और यदि यह 30 से ऊपर हो जाये तो तो शरीर में मोटापे की समस्या हो जाती है।
BMI को नीचे दिए गए तरीके से नापा जाता है –
BMI = शरीर का वजन किलोग्राम में / (शरीर की लम्बाई मीटर में x शरीर की लम्बाई मीटर में)
मोटापे की समस्या ज्यादातर ख़राब जीवनशैली अपनाने की वजह से होती है, जैसे अधिक तले-भुने और वसा युक्त भोजन का सेवन करना, जरुरत से अधिक खाना, अत्यधिक शराब पीना, शारीरिक श्रम कम करना, नींद कम लेना और अन्य बुरी आदतेंजेनेटिक कारकों और हार्मोनल परेशानियों के कारण भी पेट की चर्बी बढ़ सकती है।
मोटापा की समस्या को जितना जल्दी हो सके उतने जल्दी कम करना चाहिए क्योंकि इससे शरीर का वजन तो बढ़ता ही है साथ ही इसके कारण अन्य बीमारियाँ जैसे टाइप-2 मधुमेह (type-2 diabetes), उच्च रक्तचाप, ह्रदय की बीमारियाँ आदि भी हो सकती हैं।
इस समस्या से लड़ने के लिए अपनी लाइफस्टाइल को हेल्थी बनाना बेहद जरुरी होता है। इसके साथ ही कुछ आसान घरेलू उपचारों के जरिये पेट की चर्बी और मोटापा कम करने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। इनमें से 10 सबसे कारगर घरेलू उपचार नीचे दिए जा रहे हैं –

1. निम्बू पानी (Lemon Juice)

निम्बू पानी को मोटापा कम करने में सबसे कारगर घरेलू नुस्खा माना जाता है। यह पाचन को को ठीक करता है और विषहरण की प्रक्रिया (detoxification) को बढ़ाता है। चर्बी कम करने के लिए पाचन क्रिया का ठीक होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है, क्योंकि यह शरीर को अतिरिक्त चर्बी को जलाने के लिए जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है। साथ ही यह मेटाबोलिज्म को कम करने वाले विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में भी मदद करता है।
  • तीन चम्मच निम्बू का रस, एक चम्मच शहद और आधा चम्मच काली मिर्च के पाउडर को एक गिलास पानी में डालकर घोल लें। (यदि काली मिर्च ज्यादा तीखी हो तो एक चौथाई चम्मच मिलाएं)
  • इसे रोज सुबह खाली पेट पियें।
  • इसे कम से कम तीन महीनों तक लगातार करें।
आप निम्बू के रस को सिर्फ पानी में मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं।

2. सेब का सिरका (एप्पल साइडर विनेगर)

कच्चा और बिना छना हुआ सेब का सिरका भी मोटापे को कम करने का काफी प्रचलित नुस्खा है। हालांकि वजन कम करने में यह किस तरह से मदद करता है इसका सही पता तो आज तक नहीं चल पाया लेकिन कुछ अनुसंधानों से यह जरूर साबित हुआ है कि शरीर में चर्बी को बढ़ने से रोकता है। यह वसा को तोड़ने की प्रक्रिया में मदद करके उसे शरीर में जमने से रोकता है।
  • एक चम्मच कच्चे और बिना छने हुए सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिलाएं। इसे रोज सुबह खाली पेट सेवन करें।
  • आप एक चम्मच सेब के सिरके को एक निम्बू के रस और एक गिलास पानी के साथ मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं।
नोट – सबा का सिरका (एप्पल साइडर विनेगर) को दिन में दो चम्मच से अधिक सेवन न करें। इससे ज्यादा सेवन करने पर आगे चलकर आपके शरीर में पोटैशियम का स्तर और हड्डियों में खनिज पदार्थों का घनत्व कम हो सकता है।

3. एलोवेरा (Aloe Vera)

एलोवेरा भी मोटापा कम करने में लाभकारी होता है क्योंकि यह मेटाबोलिज्म को उत्तेजित करता है, ऊर्जा की खपत (energy consumption) को बढ़ाता है और शरीर के अतिरिक्त वसा को जलाने में मदद करता है। इसमें नेचुरल कोलेजन प्रोटीन होते हैं जो शरीर को प्रोटीन सोखने के लिए ज्यादा मेहनत करवाते हैं। साथ ही, यह पाचन तंत्र और पेट से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलने में मदद करता है।
  • तो ताजा एलोवेरा की पत्तियों में से गूदा निकाल लें।
  • अब इसे एक कप पानी में डालकर मिलाएं। (यदि संभव हो तो पानी की जगह आप संतरे के जूस या अंगूर के जूस का इस्तेमाल भी कर सकते हैं)
  • तीन मिनट के लिए इसे अच्छी तरह से घोलने के बाद पी लें।
  • इसे कम से कम एक महीने के लिए रोज सेवन करें।

4. ग्रीन टी

ग्रीन टी भी वजन कम करने की प्रक्रिया में काफी लोकप्रिय उपचार है। अभी हाल ही में हुए एक शोध से यह पता चला है कि ग्रीन टी में epigallocatechin-3-gallate (EGCG) नामक यौगिक पाया जाता है जो शरीर में फैट के अवशोषण को कम करता है और अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद करता है।
इसके साथ-साथ ग्रीन में में अन्य पोषक तत्व जैसे विटामिन सी, carotenoids, जिंक, सेलेनियम, क्रोमियम और अन्य जरूरी खनिज पदार्थ भी पाए जाते हैं।
वजन कम करने के लिए रोज तीन कप ग्रीन टी का सेवन करें। आप इसे अदरक की चाय या लाल मिर्च की चाय के साथ मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं।

5. लाल मिर्च (Cayenne Pepper)

लाल मिर्च भी मोटापा और वजन कम करने में मदद करती है। इसमें capsaicin नामक घटक पाया जाता है जो शरीर को फैट जलाने और ऊर्जा खपत बढ़ाने के लिए उत्तेजित करता है। साथ ही यह पाचन को भी ठीक करता है और शरीर में पोषक पदार्थों के कम अवशोषण के कारण शरीर में पैदा हुई अतिरिक्त भूख को रोकता है।
  • रोज लाल मिर्च की चाय का सेवन करें। शुरुआत में एक गिलास पानी में एक-दहाई चम्मच लाल मिर्च को डालकर चाय बनायें और धीरे-धीरे इसकी मात्रा को एक चम्मच लाल मिर्च तक लायें। अधिक फायदा लेने के लिए इसमें आधे निम्बू को निचोड़कर डालें। इस चाय को रोजाना कम से कम एक महीने तक सेवन करें।
  • अपने भोजन में भी लाल मिर्च और अन्य मसालों जैसे अदरक, काली मिर्च, सरसों के बीज आदि को शामिल करें।

6. करी के पत्ते (Curry Leaves)

रोज सुबह 10 ताजा करी के पत्तों का सेवन करना मोटापा और इसके कारण हुए मधुमेह में काफी कारगर आयुर्वेदिक उपचार है। इस उपचार को रोज लगातार तीन-चार महीनों के लिए करें।
करी के पत्तों में mahanimbine नामक alkaloid पाया जाता है जिसके शरीर पर anti-obesity और lipid-lowering effects होते हैं। इसलिए यह शरीर के वजन को कम में मदद करते हैं और साथ ही टोटल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को भी कम करते हैं।

7. टमाटर (Tomato)

टमाटर शरीर के हॉर्मोन के स्तर को ठीक करता है और अतिरिक्त भूख को कम करता है। रोज सुबह खाली पेट दो टमाटरों का सेवन करें। ध्यान रखें टमाटर को इसके छिलके और बीजों के साथ सेवन करें क्योंकि इन्ही में जरूरी फाइबर होता है।
साथ ही टमाटर में विटामिन ए, सी और के, और मैग्नीशियम, मैंगनीज, कोलीन (choline), फोलेट और अन्य पोषक तत्व होते हैं जो शरीर के स्वास्थ्य के लाभकारी हैं। इसके आलावा टमाटर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को कैंसर से बचाते हैं।

8. पत्तागोभी (Cabbage)


पत्तागोभी को भी अपनी मोटापा कम करने वाली डाइट में शामिल करें। इसमें टारटरिक एसिड पाई जाती है जो शुगर और अन्य कार्बोहाइड्रेट्स को फैट में बदलने से रोकती है। साथ ही इसमें विटामिन सी और फाइबर अधिक होता है और कैलोरीज कम होती हैं।
Cruciferous vegetable होने के कारण इसमें फाइटोकेमिकल्स (phytochemicals) होते हैं जो एस्ट्रोजन मेटाबोलिज्म के संतुलन को ठीक करते हैं। एस्ट्रोजन मेटाबोलिज्म के असंतुलित होने पर ब्रैस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर आदि की सम्भावना बढ़ जाती है। इसमें अन्य cruciferous vegetables जैसे फूलगोभी, ब्रोकोली, ब्रसल स्प्राउट और Swiss chard का सेवन भी लाभकारी होता है।

9. सौंफ (Fennel)

सौंफ के बीजों में मूत्रवर्धक गुण (diuretic properties) होने के कारण इसे भी मोटापा कम करने में लाभकारी माना जाता है।
  • सौंफ के बीजों को पहले सुखाकर भून लें और फिर पीसकर पाउडर बना लें। अब इस पाउडर को छलनी से छान लें। इस पाउडर को रोज दिन में दो बार डेढ़-डेढ़ चम्मच लेकर गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे पेट की गैस, अपच और कब्ज की समस्या भी दूर होगी।
  • आप खाने के 15 मिनट पहले सौंफ की चाय का सेवन भी कर सकते हैं।

10. शहद और दालचीनी

शहद और दालचीनी के चाय का सेवन करने से मेटाबोलिज्म तेज होता है, ऊर्जा बढ़ती है और शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। शहद फैट के मेटाबोलिज्म को बढ़ाकर मोटापा से लड़ता है। दालचीनी इंसुलिन रेसिस्टेंस से लड़कर भूख को कम करती है।
  • एक कप गर्म पानी में डेढ़ चम्मच दालचीनी मिलाएं।
  • अब इसमें एक चम्मच आर्गेनिक शहद मिलाएं।
  • इसकी आधी मात्रा को सुबह खाली पेट सेवन करें और आधी मात्रा को रात को सोने से पहले सेवन करें।
बवासीर एक बहुत ही दुखदायी और तकलीफ देने वाला रोग होता है जिसमें मरीज को कहीं पर भी बैठने में काफी परेशानी होती है।
इसमें मरीज के गुदा द्वार में मस्से हो जाते हैं जिनमे निरंतर खून बहने और अत्यधिक दर्द होने कारन मरीज काफी कमजोर और दुखी हो जाता है। बवासीर के 2 प्रकार होते हैं – पहला बाहर की बवासीर (external hemorrhoid) और अन्दर की बवासीर (internal hemorrhoid).
बाहर की बवासीर में patient के गुदा द्वार के आसपास मस्से होते हैं जिनमे दर्द तो नहीं होता लेकिन खुजली होती है। उन मस्सों को अधिक खुजलाने की वजह से उनमें से खून भी आने लगता है।
अन्दर की बवासीर में गुदा के अन्दर मस्से होते हैं और मल करते समय जोर लगाने पर रोगी को बेहद तेज दर्द होता है और खून भी बाहर आने लगता है।
बवासीर से बचने के लिए पहले इसके होने के कारणों को भी जानने की जरुरत है, आइये जानते हैं इसके कारन

बवासीर के कारण

  • बवासीर के कारन (Causes of Piles in Hindi)
  • मिर्च-मसाले वाले भोजन का अधिक सेवन करना।
  • एक ही जगह पर अधिक समय तक बैठे रहना।
  • कई घंटो तक कार या गाडी में बैठे रहना।
  • शराब का अधिक करना।
  • शरीर में मोटापा होने पर भी बवासीर होने की सम्भावना होती है।
  • गर्भावस्था के समय महिला को कब्ज होने कारन बवासीर की परेशानी हो सकती है।
  • मल करते समय अधिक प्रेशर लगाने से भी यह परेशानी हो सकती है।
  • रात को अधिक देर तक जागना।
  • पानी का सेवन कम करने से भी बवासीर होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • मानसिक रोग या डिप्रेशन के कारन भी यह रोग हो सकता है।
नोट – ऊपर दिए गए कारण सामान्य हैं जो आमतौर पर बवासीर के मरीजों में देखे जाते हैं। आपको बवासीर होने का सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से उचित जाँच कराएँ।

बवासीर के लक्षण

  • उठने, बैठने, चलने पर गुदा के स्थान में अत्यधिक दर्द होना।
  • गुदा में बार-बार खुजली होना।
  • रोगी को मल त्यागते समय गुदा वाली जगह पर काफी दर्द होता है और खून भी निकलता है। अधिक खून के बह जाने के कारन रोगी को खून की कमी (anemia) भी हो सकता है।
  • गुदा द्वार में सूजन आ जाती है। अन्दर की बवासीर में मस्से बाहर की तरफ लटकने लगते हैं और मल करने में परेशानी होती है। इस कारन रोगी जोर लगता है जिससे उन मस्सों में से खून की धार बहने लगती है।
यह बवासीर के सामान्य लक्षण हैं जो ज्यादातर मरीजों में देखे जाते हैं।

बवासीर का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार

  • 2 लीटर छाछ में थोड़ी सी अजवाइन और जीरा मिलकर पी जाएँ, इसके नियमित सेवन से बवासीर धीरे धीरे ख़त्म हो जाती है।
  • गुड को जिमीकंद के साथ मिलकर नियमित सेवन करें। इसके सेवन से भी बवासीर पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
  • मल, मूत्र और gas आने पर उसको ज्यादा समय तक पेट में रोककर न रखें। इससे भी बवासीर होता है।
  • आयुर्वेदिक के अनुसार तिल (sesame) के लड्डू को खाने से भी बवासीर ख़त्म होता है।
  • तरल खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करें जैसे सूप, नारियल पानी (coconut water), पानी, लस्सी, छाछ आदि। इनके अधिक सेवन से मल तरल हो जाता है और मल त्यागते समय तकलीफ नहीं होती।
  • दूध को उबालकर उसमे पके केले को मसलकर डाल दें और घोल तैयार कर लें। इसको दिन में 2 से 3 बार सेवन करें।
  • चुकंदर का रस (beetroot juice), पालक का रस (spinach juice) और गाजर का रस (carrot juice) को रोज पियें।
  • रोजाना बवासीर वाली जगह पर नीम का तेल लगायें, कभी फायदा होगा।
  • शलजम, मेथी, करेला, गाजर, प्याज और अदरक का नियमित सेवन करें।
  • लगातार 3 महीने तक रोज सुबह जामुन का सेवन करें, लाभ मिलेगा।
  • मूली के नियमित से भी बवासीर रोग ख़त्म होता है।
  • पुदीना, अदरक, निम्बू का रस और शहद को पानी में मिलकर रोज सेवन करें।

बवासीर से बचे रहने के उपाय 

  • आम, पपीता और अंगूर का नियमित सेवन करने से बवासीर नहीं होता।
  • तनाव (stress) से दूर रहें और हमेशा खुश रहें।
  • आलू और बैंगन का कम सेवन करें।
  • Burger, समोसा, pizza, चाट-पकौड़े आदि fast foods का सेवन न करें।
  • तले भुने मसालेदार खाद्य पदार्थों से भी दूर रहें।
  • धुम्रपान, शराब आदि नशीले पदार्थों से दूर रहें।
  • जो लोग अधिक समय तक लगातार एक ही जगह पर बैठे रहते हैं उनको बवासीर होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए बीच-बीच में टहलें और हल्का व्यायाम करें।
  • कब्ज (constipation) को पैदा करने वाले किसी भी खाद्य पदार्थ से दूर रहें।
  • Doctors के मुताबित अत्यधिक उपवास करने से भी बवासीर हो सकता है। उपवास के दौरान आलू की खिचड़ी का अधिक बवासीर का कारन बन सकता है। इसलिए उपवास कम करें और इसके दौरान बीच-बीच में juice, छाछ, सूप आदि का सेवन करते रहें।
  • रात को जल्दी सोयें और सुबह जल्दी उठें।
बवासीर का सबसे बड़ा कारन अनियमित खानपान और अनियंत्रित lifestyle होती है, इसलिए अपने जीवन को सुधारें और अनुशासित करें।
इसके आलावा बवासीर से बचे रहने के लिए उचित परहेज भी करना जरुरी होता है, इसलिए सादा भोजन का ही सेवन करें।
गर्भावस्था नारी जीवन की एक ऐसी अवस्था है, जिसमे उसे विशेष परिस्थितियों और असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
इस अवस्था में स्वास्थ्य के साथ-साथ सौंदर्य पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है लेकिन प्रत्येक स्त्री पर समान रूप से नहीं। कुछ महिलायें जहां इस दौरान थकी-थकी व मुरझाई सी लगती हैं, चेहरे पर झाइयां उभर आती हैं, शारीरिक गठन असंतुलित हो जाता है, बाल झड़ने लगते हैं, आंखो के निचे काले घेरे पड़ जाते हैं और त्वचा तेजहीन हो जाती है, वहां कुछ स्त्रियों के सौंदर्य में मानो निखार आ जाता है और वे पहले से अधिक आकर्षक दिखने लगती हैं। यह सब एक ओर जहां शारीरिक प्रकृति और मनोवैज्ञानिक स्थितियों पर निर्भर करता है, वहीं रहन-सहन, खान-पान व अन्य आदतों का भी सीधा प्रभाव पड़ता है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में सामान्यतः कैल्शियम, लोहे व विटामिनों की कमी हो जाती है। इनकी कमी को दूर करने के लिए संतुलित खुराक और यदि आवश्यक हो तो दवा आदि का सेवन करना चाहिए। इस दौरान नियमित दिनचर्या, व्यायाम, शारीरिक मालिश व पर्याप्त विश्राम का विशेष महत्व है। सौंदर्य पुष्प मुरझाने न पाए इसके लिए भी कुछ सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं।
इस अवधि में महिलाओं को मानसिक रूप से प्रसन्न रहना चाहिए। आशा और संतोष के सहारे नौ मास एक नन्हे मेहमान की प्रतीक्षा में पलक झपकते बीतते प्रतीत होते हैं।
सौंदर्य को बनाए रखने के लिए गर्भवती महिला का स्वस्थ रहना आवश्यक है। इसके लिए नियमित डाक्टरी जांच और डॉक्टर के निर्देशों का सख्ती से पालन करने में जरा सी भी लापरवाही बरतना ठीक नहीं है।
प्राचीन मान्यताओं का पालन करते हुए महिलाएं इस अवस्था में अधिक भोजन करने का प्रयास करती हैं। यह धारणा निश्चित रूप से गलत है। डॉक्टरी सलाह से या सामान्य रूप से संतुलित भोजन, जिसमें दूध, दही, हरी सब्जियां, फल आदि हों, करें और मिर्च मसाले, चाय-कॉफी, चिकनाई तथा मादक पदार्थों का परहेज रखें। फलों का रस लाभकारी रहता है। पानी भी खूब पीना चाहिए। रक्तचाप बढ़ने पर नमक का सेवन कम कर दें | अच्छा रहे यदि खान-पान की तालिका बना लें और उस पर सख्ती से अमल करें। डॉक्टर यदि लोहे, कैल्शियम आदि की कमी बतायें.तो उनकी पूर्ति हेतु चिकित्सकीय निर्देशों का पालन करें। इस प्रकार आपका सौंदर्य दमकता रहेगा और स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा।
कोई हल्का व्यायाम नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह पर ही करें। प्रात:कालीन भ्रमण पर जाएं। इससे रक्त संचार ठीक रहेगा व त्वचा निखरेगी। गर्भावस्था के अंतिम दिनों में हल्के व्यायाम भी अत्यंत सावधानी पूर्वक करें। वैसे भी व्यायाम आदि भली प्रकार सीखकर ही करने चाहिए।
ग्रीष्म ऋतु में एक बार और यदि संभव हो तो दो बार स्नान अवश्य करें। स्नान से पूर्व धीरे-धीरे मालिश करवाएं और एक घंटा रुककर स्नान करें। स्नान के लिए किसी अच्छे एन्टीसेप्टिक साबुन का प्रयोग करें। बालों को रीठा, , शिकाकाई के घरेलू शैपू से सप्ताह में दो बार साफ़ करें। गर्भावस्था में हार्मोन्स अधिक सक्रिय हो जाते हैं जो स्वास्थ्य व सौंदर्य को प्रभावित करते हैं। त्वचा को घरेलू उबटनों से साफ करना उचित रहता है। आवश्यकता हो तो नाइट क्रीम व स्किन फूड क्रीम का प्रयोग करें।
इस अवस्था में बाल या तो शुष्क हो जाते हैं या तैलीय। बाल खुश्क हों तो गुनगुने जैतून के तेल की मालिश करें व भाप लगाएं। दो मुंहे बालों को सिरों पर से छांटती रहें। तैलीय बालों के उपचार हेतु विशेष शैपू का प्रयोग करें। कुछ महिलाओं के चेहरे पर झाइयां या चकते उभर आते हैं, जो प्रसवोपरांत स्वयं ही मिट जाते हैं। फिर भी समस्या गंभीर लगे तो डाक्टरी परामर्श ले लें। ये निशान मेकअप से सरलता से छुप जाते हैं।
विटामिन की कमी के कारण आंखों की स्वाभाविक चमक कम हो जाती है। अतः सावधानी बरतें। संतुलित भोजन का सेवन व विटामिन लेने से समस्या पास नहीं आती। भौंहों के बाल झड़ते हों तो जैतून के तेल की धीरे-धीरे मालिश करें। सोने से पूर्व आंखों में गुलाब जल डालें।
कभी-कभी नाखून टूटने की शिकायत भी सामने आती है। कैल्शियम की कमी से यह समस्या जन्म लेती है। एक चम्मच जिलेटिन गर्म पानी में घोलकर प्रतिदिन पीयें। कुछ ही दिनों में नाखून चमकदार व मज़बूत हो जायेंगे।
कैल्शियम की कमी से ही दांतों की समस्याएं जन्म लेती हैं। वे चमक खोने लगते हैं। अत: कैल्शियम का सेवन इस दृष्टि से भी जरूरी है। मसूढ़ों की तकलीफ़ों में विटामिन सी का सेवन करना होगा।
पैरों में सूजन आने पर उनको ऊंचे करके लेटें। अधिक देर खड़े होकर काम न करें।
विश्राम लेटे रहें। पेट, कूल्हों और स्तनों पर स्ट्रैच मार्क न पड़ें, इसके लिए वहां नियमित रूप से लेकिन धीरे-धीरे बेबी ऑयल से मालिश करवाएं। इस अवस्था में सीधे चलें। झुककर नहीं। लेटने-बैठने में भी झुकाव न डालें।
वस्त्र ढीले-ढीले पहने तो सुविधा रहेगी। साड़ी हल्की पहनें। घर पर रहकर गाउन पहनना सुविधाजनक रहता है। वस्त्रों के रंग चटकीले न होकर हल्के होने चाहिए।
गर्भावस्था में स्तनों का आकार बढ़ता जाता है। अतः समय-समय पर ब्रा का साइज बदल डालें। ध्यान रहे कि वक्ष पर अधिक कसाव न पड़े। पैरों में साधारण चप्पल पहनें। ऊंची एड़ी वाले सैंडिल पहनने से गिरने का भय रहता है। मेकअप हल्का व स्वाभाविक ही करें। भारी मेकअप से परहेज रखें।

प्रसव पूर्व व बाद की सौंदर्य समस्याएं- होमियोपैथी सुलझाए

कई ऐसी सौंदर्य समस्यायें होती हैं जिनकी वजह से युवा स्त्रियों की स्वाभाविक सौंदर्यता जाती रहती है जैसा कि कम उम्र में या अत्यधिक कमजोर स्त्रियों के प्रसव पश्चात उनका स्वास्थ्य गिर जाता है या फिर साधारण तन्दुरूस्ती भी नहीं रह पाती। इसी प्रकार कई स्त्रियों का प्रसव पश्चात पेट बढ़ जाता है, या बेढंगा मोटापन, चेहरे की स्निग्धता खत्म हो जाती है, कम उम्र में ही बुढ़ापा सा आ जाता है। कभी-कभी मोटापे की वजह से ऊपर से नीचे तक एकसार शरीर जिसे प्रायः आम भाषा में आलू की तरह शरीर कहा जाता है। इस मोटापे की वजह से फिगर तो खराब हो ही जाता है साथ ही कम उम्र में ही स्त्रियाँ अधेड़ावस्था की लगने लगती हैं। इसी प्रकार की एक आम समस्या इन स्त्रियों के साथ गर्भाणी रेखाओं का पेट में व शरीर के अन्य अंगों पर बनना है। इससे शरीर नुचा-नुचा या जख्मी की तरह लगने लगता है। होमियोपैथिक में ऐसी सौंदर्य समस्याओं का सुलभ व सफल उपचार है जिसे एक दक्ष चिकित्सक बखूबी ठीक कर सकता है।
  1. प्रसव पश्चात पेट का लटक जाना
     
    : प्रसव पश्चात अधिकांश स्त्रियों का पेट लटक जाता है। अत: इस प्रकार के पेट लटकने पर क्रोकस 30 में देना चाहिये। लक्षणानुसार कैल्केरिया कार्ब या सिकेलकार का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  2. स्त्रियों का पेट बढ़ने पर : 
    बिना किसी कारण के यदि स्त्रियों का पेट बढ़ रहा हो तो उन्हें सीपिया 200 की एक मात्रा चिकित्सक की सलाह से हर सप्ताह लेना चाहिए। इससे शरीर के अनुपात में पेट हो जाता है व अपनी स्वाभाविक स्थिति में आ जाता है।
  3. पेट पर झुर्रियां और दाग पड़ना :
    यदि पेट पर झुर्रिया पड़ रही हों तो साइलेशिया व हीपर सल्फ का प्रयोग निम्न शक्ति में कुछ दिनों तक आवश्यकता के अनुसार करना चाहिये।
  4. प्रसव पश्चात गर्भाणी रेखाओं का बनना : प्रसव पश्चात अक्सर कई स्त्रियों के पेट पर सफेद रेखायें जो पहले गर्भावस्था में लाल होती हैं जिन्हें गर्भाणी रेखायें कहते हैं आ जाया करती हैं। इससे शरीर की ऊपरी त्वचा जख्मों की तरह लगने लगती है एवं स्वाभाविक सौंदर्य नष्ट हो जाता है ऐसे निशानों से बचने के लिये स्पांजिया 30 या 200 का प्रयोग करना चाहिये साथ ही बरबॅरिस एक्वा + कैलेन्डूला + जिंक आक्सी इन तीनों दवाओं को मूल अर्क में लेकर लगाना चाहिये।
  5. मोटापे की वजह से पेट बढ़ने पर : यदि मोटापे की वजह से पेट बढ़ रहा हो तो सर्वप्रथम होमियोपैथिक की मोटापा कम करने की दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिये जैसे फाइटोलक्का बेरी 6x तथा नेट्रम सेल्फ 12x ये दिन में तीन बार लेते रहे एवं पेट कम करने के लिए पोडोफाइलम 30 का प्रयोग करें। कभी-कभी पीडोफाइलम की वजह से दस्त लग सकते हैं, परन्तु यह पीडोफाइलम की प्राथमिक क्रिया की वजह से होता है ऐसे में एक दो दिन दवा बन्द कर फिर चालू कर देना चाहिये। मोटापा कम करने के लिये फ्यूकस वेसीक्यूकर मूल अर्क में दस-दस बूंद पानी में दिन में तीन बार लम्बे समय तक लेने से मोटापा एवं पेट शरीर के अनुपात में व स्वाभाविक स्थिति में आ जाता है। जिन लोगों की शारीरिक रचना कैल्केरिया कार्ब की हो, उन्हें मोटापा घटाने के लिये कैल्केरिया कार्ब देने से आशातीत लाभ होता है। अगर केल्केरिया शरीर की माता को गर्भावस्था में यह दवा दे दी जाये तो आने वाली सन्तान मोटापे से बच जायेगी तथा सुघड़ व स्वस्थ पैदा होगी।

बेढंगा मोटापन

कुछ लोगों को बेढंगा मोटापन हो जाता है। याने सारे शरीर का मोटापा शरीर के एक स्थान पर सिमट जाता है जैसे-पेट पर, जांघों या कूल्हे आदि पर यदि ऐसे बेढंगे मोटापन में व्यक्ति शीत प्रधान हो तो उसे ग्रेफाइटिस देना चाहिये यदि व्यक्ति उष्ण प्रधान है तो उसे पल्सेटिला दें।

युवा स्त्रियों के मोटापन में

युवा स्त्रियों के मोटेपन में कैल्केरिया कार्ब के बाद ग्रेफाइटिस देना चाहिये।

मोटापा कम करने के लिये

मोटापा कम करने के लिये कैलोट्रोपिस जाइ Q की पाँच-छः बूंद आधे कप पानी में दिन में तीन बार लेने से निश्चित ही मोटापा कम होने लगता है। एसकुलेन्टाइन दवा से निरापद रूप से शरीर की चर्बी घटने लगती है व शरीर सुडौल हो जाता है। यदि त्वचा पर वृद्ध व्यक्ति की तरह सलवटें पड़ रही हों तो सारसापेरिला दवा मूल अर्क में 10-15 बूंद दिन में तीन बार पीएं।

कैल्केरिया कार्ब महिला

सुंदर नैन-नक्श की, गोरी चमड़ी वाली, मोटी, थुलथुल महिला जिसका पेट बढ़कर तश्तरी आकार का हो जाता है। ऐसी महिला को मासिक स्राव अधिक मात्रा में होता है और समय से पहले होता है। ऐसी महिला को मासिक से पूर्व सिरदर्द व श्वेत प्रदर हो सकता है तथा मासिक के दौरानं स्तनों में दर्द भी हो सकता है। ऐसी महिला को उक्त औषधि 200 शक्ति में, सप्ताह में एक बार लेनी चाहिये। पल्सेटिला महिला : अधिक शर्मीली महिला जो बात-बात में रो जाए और मासिक स्राव कम हो या न हो तो उक्त औषधि 30 शक्ति में 10-15 दिन खाएं ।

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