वजन कम करने के बारे में आप अपने बच्चों से बहुत कुछ सीख सकते हो। आप यह सोच रहे होंगे कि यह हम आपको क्या ज्ञान दे रहे है। लेकिन आपको बता दें यह बात बिल्कुल सही कि बच्चों का खाना खाने का तरीका आपमें हेल्दी फूड हैबिट्स विकसित कर सकता है। ध्यान दें, हम आपको बच्चों की तरह छोटे चम्मच या फिर छोटे जार में खाना खाने के लिए नहीं कह रहे हैं, बल्कि उनकी फूड हैबिट्स पर गौर करने के लिए कह रहे हैं, क्योंकि बच्चों की आदतें,जो आपको अजीब लगती हैं, असल में वो आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

बच्चों की तरह धीरे-धीरे और छोटे-छोटे बाइक खाएं
छोटे-छोटे बाइट खाना और उसे खूब देर तक चबाना सेहत के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। खाने को धीरे-धीरे खाना अधिक खाने से निजात दिलाता है। ईस्टर्न इलेनियस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया, जिसके तहत उन्होंने दो समूह बनाए। एक समूह को छिले हुए पिस्ता दिए और एक समूह को बिना छिले पिस्ता दिए। अध्ययन में सामने आया कि जिस समूह को छिले हुए पिस्ता दिए गए थे, उन्होंने औसतन 211 कैलोरी के पिस्ता खाए और जिस समूह को छिलके वाले पिस्ता दिए गए, उन्होंने 125 कैलोरी के पिस्ता खाए लेकिन दोनों ही समूहों में संतुष्टि स्तर एक समान सामने आया। ऐसे धीरे-धीरे खाने में कम कैलोरी गेन की।

बच्चों की तरह नई चीजें खानेमें खाएं
बच्चे नई-नई चीजें खाने की कोशिश करते हैं। एक्सपट्र्स मानते हैं कि नए-नए खाने से शरीर को सभी तरह के न्यूट्रिशंस, एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन मिल जाते हैं। खाने से बोरियत भी नहीं होती। एक शोध के अनुसार विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थ खाने से डायबिटीज का खतरा कम रहता है। ऐसे में बड़ों को भी बच्चों की तरह विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। विभिन्न तरह की रेसिपीस के साथ प्रयोग करने चाहिए।

बच्चों की तरह जिस खाने को न देखा है और न चखा है, उसे भी एंजॉय करना सीख सकते हैं
अक्सर हम नए खाने के लिए एक बार में तैयार नहीं होते लेकिन बच्चे नई चीज की ओर आकर्षित होते हैं, साथ ही उसके टेस्ट को एंजॉय भी करते हैं। खासकर ऑर्गेनिक फूड, जिसे आप भी पसंद कर सकते हैं। जिस तरह वे नट्स और फ्रूट्स खाते हैं, उसी तरह आप भी इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह भी आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होगा।

खाने को लेकर बहुत उत्साहित सीख सकते हैं
बच्चे खाने को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित होते हैं, वे मजे लेकर खाते हैं। खाने को ही नहीं, वे तो खाने से भरी टेबल देखकर ही आनन्दित हो जाते हैं लेकिन बड़ों के साथ ऐसा नहीं होता। वे खाने को लेकर बहुत कम उत्साहित होते हैं। वे खाने को दिनचर्या मानते हैं। बहुत कम लोग ही स्वाद का आनन्द लेते हैं। एक्सपट्र्स मानते हैं कि बिना मन से खाया गया खाना ज्यादा फायदा नहीं करता।

पेट भरने के बाद बिल्कुल भी नहीं खाना सीख सकते हैं
बच्चों की सबसे अच्छी आदत होती है, जब उनका पेट भर जाता है तो एक बाइट भी नहीं खा सकते। फिर भले ही आप कितनी कोशिश कर लें, बच्चा खाने को फेंक भी देता है। लेकिन बड़े पेट भरने के बाद मन नहीं भरा तो भी खाते रहते हैं। इस तरह की ओवर ईटिंग उन्हें भारी पड़ती है। ऐसे में जब भूख हो तो ही खाइए, बिना भूख के नहीं खाइए। बच्चों के खाने का समय तय होता है लेकिन आपके खाने का समय आगे-पीछे होता रहता है, यह भी सेहत के लिए सही नहीं है।

सिर दर्द एक ऐसी समस्या है जो किसी को भी कहीं भी हो सकती है। तनाव, मौसम में बदलाव, किसी बीमारी आदि के कारण सिर में दर्द होता है। ऐसे में लोग या तो इस पर ध्यान नहीं देते या बिना डॉक्टर की सलाह लिए दवाइयां लेते हैं जो कि उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं। अगर आपको भी सिर दर्द की शिकायत रहती है तो ये नुस्खे आपके लिए कारगर हो सकते हैं।
अदरक
जब जुकाम सिर में पहुंच जाता है तो सिर में दर्द होने लगता है। इसके लिए आप अदरक का इस्तेमाल कर सकते हैं। थोड़ा सा अदरक का रस और उतनी ही मात्रा में नींबू का रस मिलाएं। दिन में दो
बार इसका सेवन करने से फायदा मिलेगा। इसके अलावा आप सूखे अदरक के पेस्ट को दो चम्मच पानी में मिलाकर माथे पर लगाएं। इससे काफी आराम मिलता है।

पुदीने का तेल
पुदीने में मेंथॉल होता है जो सिर दर्द दूर करने में मदद करता है। इसके लिए पुदीने के तेल की तीन बूंदों को एक चम्मच बादाम का तेल, जैतून के तेल या पानी में मिलाएं। इस मिश्रण से माथे की मसाज करने से आराम मिलता है। आप चाहें तो गर्म पानी में इस तेल की कुछ बूंदे डालकर भाप भी ले सकते हैं।

तुलसी
अगर सिर में हल्का दर्द है तो तुलसी से फायदा मिलता है। पानी में तीन-चार तुलसी की पत्तियों को उबाल लें और उसमें शहद डालकर पिएं। इससे आराम मिलेगा। इसके अलावा तुलसी के तेल से आप माथे की मसाज भी कर सकते हैं।

लौंग
लौंग सिर दर्द से राहत दिलाती है। लौंग को अच्छे से पीस लें। अब इसे एक साफ रुमाल में डालें और बीच-बीच में सूंघते रहें। अगर दर्द ज्यादा है तो लौंग के तेल में दो चम्मच नारियल का तेल, एक चम्मच सेंधा नमक मिलाएं और इससे माथे की मसाज करें। इससे आपको सिर दर्द से निजात मिलेगी।

दालचीनी
दालचीनी को पीस लें और इसमें पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को माथे पर लगाएं। आधे घंटे बाद इसे धो लें, राहत मिलेगी।

काली मिर्च और पुदीने की चाय
सिर दर्द में कई लोग चाय पीना पसंद करते हैं। इसके लिए बेहतर होगा कि आप चाय में काली मिर्च और पुदीना डालकर पिएं।

- अगर आपको अक्सर ही सिर दर्द की शिकायत रहती है तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

ऊनी कपड़ों की सही तरीके से देखभाल न की जाए, तो एक-दो इस्तेमाल के बाद ही इनके आकार और रंग में अंतर साफ नजर आने लगता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके ऊनी कपड़े सालों-साल चलें, तो इनकी देखभाल भी इन तरीकों से करें।
ऊनी कपड़ों को धोने से पहले उसके लेबल पर लिखे निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। अगर ऊनी कपड़े पर लिखा है- `ड्राई क्लीन ओनली’ तो उसे कपड़े को घर पर कभी भी साफ न करें। ऊनी कपड़ों को धोने से पहले किसी मुलायम ब्रश से अच्छी तरह से साफ कर लें और धोते समय इसे उलटा कर लें।

सामान्य डिटर्जेंट की जगह ऊनी कपड़ों के लिए खास बने डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें, क्योंकि सामान्य डिटर्जेंट से ऊनी रेशे कठोर बन जाते हैं। बेबी शैंपू या सामान्य शैंपू भी ऊनी कपड़ों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
ऊनी कपड़ों हर दिन धोना भूल जाएं। ऊनी कपड़ों की लाइफ बढ़ाना चाहते हैं, तो उसे धोने की जरूरत हो, तभी धोएं। हर इस्तेमाल के बाद हवा में फैलाने भर से भी ऊनी कपड़े हाइजीन फ्री हो जाते हैं। इस्तेमाल के बाद ऊनी कपड़ों को मुलायम ब्रश से झाड़ना न भूलें। ऐसा करके आप वुलेन कपड़ों को कई बार पहन सकते हैं। 

ऊनी कपड़ों को डिटर्जेंट में धोने से पहले ठंडे पानी में 5-10 मिनट के लिए भिगोएं। इससे ऊनी कपड़ों के सिकुड़ने की संभावना कम हो जाती है। इसके बाद सही डिटर्जेंट में इन्हें धोएं। ऊनी कपड़ों को फिटकरी के पानी से धोने पर, वे न तो सिकुड़ेंगे, न ही रंग छूटेगा। सिकुड़ने से बचाने के लिए आप पानी में एक चम्मच ग्लिसरीन या सिरका भी मिला सकते हैं। 
ऊनी कपड़ों  को बहुत अधिक रगड़ने की कोशिश न करें और न ही ऊनी कपड़ों को कभी ड्रायर में सुखाएं।  इससे वे ढीले पड़ जाते हैं। सुखाने के लिए इन्हें तौलिये पर रख रोल स्टाइल में लपेटें। हल्के हाथों से निचोड़ें और फिर खुली हवा में समतल फर्श पर सूखने के लिए छोड़ दें।

ऊनी कपड़े को तेज धूप में सुखाने से भी बचें। इससे कपड़े का रंग बिगड़ जाता है। इन्‍हें उलटा करके सुखाएं। ऊनी कपड़े को हैंगर में लटकाकर रखने की जगह उसे मोड़कर रखें, नहीं तो कपड़े की फिटिंग बिगड़ सकती है। ब्लेजर, कोट या अन्य गर्म कपड़े पहनने के बाद टांगती हैं, तो इन्हें टांगने के लिए पैडेड हैंगर का इस्तेमाल करें। 


बहुत से लोग कान साफ करने के लिए इयर बड का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इयर बड के प्रयोग से सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है और कान में होने वाली समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए कानों की सफाई करने के लिए आप इन घरेलू चीजों का प्रयोग कर सकते हैं।

नमक का पानी
कान साफ करने के लिए नमक वाले पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए एक छोटा चम्मच नमक को आधे कप गुनगुने पानी में मिलाएं। अब घोल में रूई डुबोएं और कानों में इसकी कुछ
बूंदे डालें। इस बात का विशेष ध्यान दें कि पानी बाहर ना निकले।
ग्लिसरीन
ग्लिसरीन कानों की मैल को मुलायम बना देती है जिससे वह आसानी से बाहर निकल आती है। ड्रॉपर की सहायता से कानों में कुछ बूंदें ग्लिसरीन की डालें और कानों में साफ रुई लगा दें। थोड़ी देर बाद रुई निकाल दें और गर्दन को थोड़ा मोड़ें जिससे बचा हुआ पानी निकल जाए।

सिरका और रबिंग एल्कोहल
इसका प्रयोग करने के लिए सिरके और रबिंग एल्कोहल यानी आइसोप्रोपिल एल्कोहल को बराबर मात्रा में मिलाएं। अब रुई की सहायता से कान में इसकी कुछ बूंदें डालें। सिरके से कान की मैल साफ
होती है और अगर कान में पानी रह गया है तो रबिंग एल्कोहल उसे सोख लेता है।


गर्म पानी
आप सिर्फ गर्म पानी से भी कानों की सफाई कर सकते हैं। पानी को अच्छे से खौला लें और ठंडा होने के लिए रख दें। अब ड्रॉपर की सहायता से कान में पानी की कुछ बूंदें डालें। कान की बाहरी सफाई के लिए रुई का प्रयोग कर सकते हैं।

जैतून का तेल
जैतून का तेल भी ग्लिसरीन की तरह कानों को बिना नुकसान पहुंचाए मैल साफ करता है। जैतून के तेल को गुनगुना करें और इसकी कुछ बूंदें कान में डालें। अब रुई को दस मिनट के लिए कानों पर
लगा लें। जब रुई को हटाएं तो गर्दन को थोड़ा मोड़ लें जिससे अतिरिक्त तेल बाहर निकल जाए। इसकी जगह आप बादाम या नारियल का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

सर्दियां आते ही त्वचा फटने लगती है। इसमें सबसे ज्यादा समस्या रहती है फटी एड़ियों की। इसकी वजह से लड़कियां अपनी पसंद के सैंडल नहीं पहन पातीं। यहां तक की कभी-कभी ये समस्या इतना भयंकर रूप ले लेती है कि पैरों से खून तक आने लगता है। अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो ये नुस्खे आपके लिए कारगर हो सकते हैं।

नारियल का तेल

रात को सोने से पहले गुनगुने पानी से अच्छी तरह पैरों को धो लें। इसके बाद पैरों को पोंछकर उन पर नारियल तेल लगाएं और कॉटन के मोजे पहनकर सो जाएं। सुबह उठने के बाद मोजे उतारें और पैरों को धो लें। ऐसा रोज करें जब तक एड़ियां कोमल ना हो जाएं। नारियल के तेल की जगह जैतून का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं।


सेंधा नमक

पैरों की देखभाल करने का यह सबसे आसान तरीका है। इसके लिए गर्म पानी में सेंधा नमक मिलाएं और उसमें पैरों को डालें। दस मिनट बाद प्यूमिक स्टोन से स्क्रब करें और फिर से पानी में पैर डाल लें। थोड़ी देर बाद पैरों को बाहर निकालें और उन पर पेट्रोलियम जैली लगाएं। ऐसा करने से जल्द ही असर दिखाई देगा। 


शहद

शहद से पैर मॉश्चराइज होते हैं। इसे इस्तेमाल करने के लिए हल्के गर्म पानी में आधा कप शहद मिलाएं और उसमें पैरों को डुबोएं। बीस मिनट बाद पैरों को बाहर निकालें और तौलिए से पोछें।


गुलाब जल और ग्लिसरीन

यह एड़ियों को कोमल बनाने के लिए सबसे अच्छे उपाय में से एक माना जाता है। तीन चौथाई गुलाब जल में एक चौथाई ग्लिसरीन मिलाएं। अब इस मिश्रण को एड़ियों पर मलें और थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से इसे धो लें। कुछ दिनों तक ऐसा करने से फर्क पड़ेगा।


चावल का आटा

आप फटी एड़ियां ठीक करने के लिए चावल के आटे से बने स्क्रब का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए एक मुट्ठी चावल में सेब का सिरका और जैतून के तेल को मिलाकर पेस्ट बना लें। अब हल्के गर्म पानी में दस मिनट तक पैरों को डुबोएं और पोंछने के बाद इस पेस्ट को लगा लें।




चेहरे पर ज्यादा तिल होने की वजह से लोग काफी परेशान रहते हैं। इससे निजात पाने के लिए वह लेजर ट्रीटमेंट करवाते हैं जो काफी महंगा और समय लेने वाला होता है। कई लोग इसे छिपाने के लिए मंहगे कॉस्मेटिक का भी इस्तेमाल करते हैं। वे इस बात से अंजान होते हैं कि कुछ घरेलू नुस्खे भी तिल से छुटकारा दिलाने के लिए कारगर होते हैं। तो आइए जानते हैं कि घर पर कैसे आप आसानी से इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

लहसुन

रात को सोने से पहले तिल पर लहसुन का पेस्ट लगाएं और उसे बांध लें। सुबह उठने पर गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। इसे लगातार पांच दिन तक करने से तिल निकल जाता है। जब लहसुन साफ करें तो उसके आस-पास की त्वचा पर पेट्रोलियम जेली जरूर लगा लें।


सेब का सिरका

सेब के सिरके (एप्पल सिडर विनेगर) के प्रयोग से तिल आसानी से निकल जाता है। रोज सोने से पहले रुई की सहायता से प्रभावित हिस्सों पर इसे लगाएं और बैंडेज से ढक दें। दस दिन तक इस प्रक्रिया को करने से तिल से निजात पा सकते हैं।


अन्नास

अन्नास के रस को तिल पर लगाकर सो जाएं और सुबह उठकर हल्के गर्म पानी से साफ कर लें। आप इसे दिन में भी लगा सकते हैं और सूखने पर इसे धो लें।


प्याज का रस

प्याज के रस को तिल पर लगाएं और आधे घंटे बाद इसे धो लें। करीब तीन हफ्ते इसे लगाने से तिल निकल जाता है। इसके लिए दिन में दो से तीन बार प्याज के रस का इस्तेमाल करना चाहिए।


केले का छिलका

केले के छिलके को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और तिल पर बांध लें। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों में तिल सूख जाएगा और आसानी से निकल आएगा।


बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा तिल हटाने के आसान उपायों में से एक है। बेकिंग सोडा में कुछ बूंदें अरंडी के तेल की मिला लें और रात को सोने से पहले इस पेस्ट को तिल पर लगा ले। सुबह उठने पर इसे धो लें। हफ्ते भर में तिल खुद साफ हो जाएगा।


अदरक को सबसे अधिक स्वास्थ्यकर मसालों में से माना जाता है। इसमें पोषक तत्व और बायोएक्टिव यौगिक भरपुर मात्रा में पाया जाता है। यह हमारे शरीर और मस्तिष्क को बहुत लाभ पहुंचा है। वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार अदरक के 5 प्रमुख फायदे।
– अदरक में गिंजरोल पाया जाता है। इसमें पावरफुल मेडिशनल तत्व पाये जाते हैं। यह पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। लार और पित्त के उत्पादन को बढ़ाता है। गैस्ट्रिक के निदान में मदद करता है।
– अदरक जी मिचलाने को रोकने में असरदार साबित होता है। ऐसा माना जाता है कि यह गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद है यह मॉर्निंग सिकनेस को भी दूर करता है।
– सर्दी के मौसम में लोग अक्सर चाय से साथ इसका इस्तेमाल करते हैं। अदरक ठंड में शरीर को गर्म रखता है। अदरक पसीना लाने में मदद करता है। काम के दौरान शरीर को गर्म करता है।
– यह मसल्स पेन को 25% कम करता है। यह मासिक धर्म के समय हो रहे पेन को कम करने में मदद करता है।
– यह सूजन और सूजन की स्थिति के इलाज में लाभदायक है।

आपके चेहरे, त्वचा की तरह आपको होठों को भी सर्दियों के दौरान खास देखभाल की जरूरत होती है। फटे होठों पर पेट्रोलियम जेली, ग्लिसरीन और नारियल लगाएं जिससे आपके होंठ मुलायम, व चमकदार बने रहेंगे।
ओरिफ्लेम इंडिया की सौंदर्य व मेकअप विशेषज्ञ आकृति कोचर ने फटे होठों से छुटकारा पाने के ये सुझाव दिए हैं :
– आपकी त्वचा की तरह आपके होठों को भी नमी की जरूरत होती है, इसलिए पानी, फल और सब्जियों का खूब सेवन करें।
– अपने होठों को मुलायम और गुलाबी रखने के लिए नियमित रूप से पट्रोलियम जेली लगाएं।
– बाहर जाते समय एसपीएफ युक्त लिप ग्लॉस लगाएं क्योंकि आपकी त्वचा की तरह धूप आपके होठों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। होंठ काले पड़ सकते हैं।
– ज्यादा रूखी त्वचा और फटे होठों के लिए ग्लिसरीन भी घरेलू औषधि के रूप में उपयुक्त है। इसे होठों और आंखों के आसपास के हिस्सों पर लगाएं।
– अगर आपका होंठ रूखा है तो फिर मेट लिपस्टिक लगाने की बजाय क्रीम से भरपूर लिपस्टिक लगाएं।
– दिन में भी होठों पर शिया बटर लगाएं। यह एसपीएफ के गुणों से समृद्ध होता है और होठों को पोषण देता है।
– सर्दियों में होठों को रूखा होने और फटने से बचाने के लिए नियमित रूप से नारियल तेल लगाएं। होठों को अंदर से पोषण देने के लिए नाभि पर भी नारियल तेल लगाया जा सकता है।
– विटामिन ई युक्त लिप बाम एंटी-ऑक्सीडेंट के बढ़िया स्रोत होते हैं और होठों को मुलायम और गुलाबी बनाए रखते हैं।
– रूखे व फटे होठों पर शहद और चीनी से बना स्क्रब लगाएं। यह मिश्रण सौम्यता से रूखापन दूर कर देगा। शहद होठों की कोमलता बरकरार रखता है।

यदि आपको कंधे में दर्द की शिकायत है तो इसे रोजमर्रा की व्यस्तता के चलते होने वाली आम समस्या समझने की भूल न करें। एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि कंधे का दर्द दिल की बीमारी होने के खतरे का संकेत भी हो सकता है।
अमेरिका के यूटा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसीन के प्रोफेसर कुर्ट हेगमैनन के अनुसार, “यदि किसी को कंधे को घुमाने में समस्या है तो यह कुछ दूसरी ही दिक्कत का संकेत है। उन्हें दिल की बीमारी होने के जोखिम कारकों पर नजर रखने की जरूरत है।”
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 1,226 कुशल श्रमिकों के आंकड़ों का विश्लेषण किया।
इसमें प्रतिभागियों में ज्यादातर दिल के रोगों के जोखिम कारक देखे गए जिनमें उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह के लक्षणों वाले लोगों में कंधों से जुड़ी दिक्कतें पाई गईं।
ऐसे प्रतिभागी जिनमें दिल की बीमारी होने का संकेत देने वाले लक्षण नहीं पाए गए, उनकी तुलना में लक्षणों से युक्त प्रतिभागियों में कंधे का दर्द 4.6 गुना ज्यादा रहा।
हेगमैनन ने कहा, “दिल के रोगों से जुड़े कारक नौकरियों के कारण पैदा होने वाली इस तरह की समस्याओं से ज्यादा महत्वपूर्ण थे।”
हेगमैनन ने कहा कि यह संभव है कि रक्तचाप और दूसरे दिल के जोखिम कारकों को नियंत्रित कर कंधे की परेशानी को कम किया जा सकता है।



वो सभी महिलाएं जो प्रेग्नेंट हैं या वो महिलाएं जो जल्दी ही परिवार को बढ़ाने की सोच रही हैं उनके लिए ये काम की खबर है।अधिकतर मामलों में नार्मल डिलीवरी ही महिलाएं पसंद करती हैं लेकिन कई बार जटिलताओं के कारण सीजेरियन ऑपरेशन की सलाह डॉक्टर सलाह देते हैं।
एस स्वास्थ्य साइट के अनुसार कुछ ऐसे काम है जो आपको सीजेरियन ऑपरेशन के बाद करने से बचना चाहिए और कुछ ऐसे उपाय हैं जो आपको सीजेरियन ऑपरेशन के बाद रिकवरी करने में मददगार हो सकते हैं।
1.जैसे ही आपका कैथेटर हटाया जाता है तो आप धीरे धीरे थोड़ा वॉक कर सकते हैं हांलाकि आपको थकान लगेगी लेकिन बिस्तर पर लेटने के वजाय वॉक करना ज्यादा बेहतर है। हालांकि, इस बारे में आप अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार चलें।
2.आपको अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा और जब कभी आपको नेचर काल आती है तो उसे टालें नहीं और ना ही उसमें विलंब करें बल्कि जल्दी ही  टॉयलेट का प्रयोग करें।
3.चूंकि सीजेरियन ऑपरेशन के बाद आपके शरीर की आंतरिक हीलिंग होने में समय लगता है इसलिए भारी वजन उठाने से बचें क्योंकि टांको के ज़ख्म भरने में खासा समय लगता है।

4. आपको प्रसूति बेल्ट से बचना चाहिए बल्कि आपको पेट को डिलीवरी के बाद खुद ही रि-शेप में आने के लिए थोड़ा वक्त लगता है उसे लगने दें क्योंकि यदि आपने प्रसूति बेल्ट का उपयोग किया तो बाद में आपको जीवन में हर्निया होने की काफी संभावना है।
5. आपको ऐसी हालत में हॉट शॉवर लेने से बचना चाहिए जब तक कि आपके टांके पूरी तरह से भर नहीं जाते। आपको इस बारे में अपने डॉक्टर की सलाह को पूरी तरह से फॉलो करना चाहिए। अगर आपको कोई भी इमरजेंसी महसूस होती है तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।


चिकित्सक किफायती और नॉन इनवेसिव उपकरण की मदद से जल्द ही मरीजों में पारसंस और विभिन्न तरह के कैंसर समेत 17 भिन्न और असंबद्ध बीमारियों के खतरे का पता लगाने में सक्षम होंगे।
इजरायल के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा विकसित उपकरण की मदद से सांस के नमूनों से ही इन बीमरियों के खतरों का पता लगाया जा सकेगा।
सांस के नमूनों पर आधारित नैदानिक तकनीक का अतीत में कई बार प्रदर्शन किया जा चुका है लेकिन अब तक इस परिकल्पना से जुड़ा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिल सका था कि भिन्न और असंबद्ध बीमारियों का निर्धारण सांस के आधार पर हो सके। इस तरह के नैदानिक जांच के लिए अब तक विकसित की गयी तकनीक से बहुत कम छोटे स्तर पर ही ऐसा हो पा रहा था।
इस अध्ययन का प्रकाशन एसीएस नैनो ने किया है।


जाड़े के मौसम में जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है। यह समस्या उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं या फिर जिन्हें अर्थराइटिस की शिकायत होती है। जाड़े के मौसम में कुछ ऐहतियात बरतकर आप जोड़ों के दर्द को काबू में रख सकते हैं या मुक्ति पा सकते हैं। जाड़े में हड्डियों और जोड़ों की सेहत ज्यादा जरूरी होती है अन्यथा दर्द आपको परेशान कर सकता है।
जाड़े में जोड़ों की सेहत की खातिर आपको पानी खूब पानी चाहिए। पानी के सेवन से आपके शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और इससे आपके शरीर की हड्डियां और ज्वाइंट्स भी स्वस्थ रहते हैं।
जूते
आपको विंटर सीजन में सही जूते पहनने चाहिए जिससे आपका पैर ठंडी हवा के संपर्क में नहीं आए। इस मौसम में हाई हील्स काफी देर तक पहनने से बचना चाहिए। इससे आपकी एड़ियों और जोड़ों में दर्द हो सकता है।
संतुलित भोजन
इस मौसम में आपको खाने पर ध्यान देना चाहिए। खाने में आपको संतुलित भोजन की जरूरत होती है ताकि प्रोटीन और विटामिन की शरीर में कमी नहीं हो। विटामिन डी, सी और के की कमी आपके ज्वाइंट्स पेन को बढ़ा सकती है। संतरा, बंधगोभी, पालक और टमाटर का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।
खाने में कैल्शियम का ध्यान रखें
आपको अपने जोड़ों की खातिर यह भी ध्यान रखना होगा कि आपके शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं हो। कैल्शियम का शरीर में होना आपके हड्डियों और ज्वाइंट्स की सेहत के लिए जरुरी है। मख्खन, दूध, पालक और उन खाद्य पदार्थों को खाना चाहिए जिसमें विटामिन डी प्रचुर मात्रा में हो।

आम तौर पर सर्दी होने या शा‍रीरिक पीड़ा होने पर घरेलू इलाज के रूप में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, कि हल्दी वाले दूध के एक नहीं अनेक फायदे हैं? आयुर्वेद में हल्दी को सबसे बेहतरीन नेचुरल एंटीबायोटिक माना गया है। इसलिए यह स्किन, पेट और शरीर के कई रोगों में उपयोग की जाती है। हल्दी व दूध दोनों ही गुणकारी हैं, लेकिन अगर इन्हें एक साथ मिलाकर लिया जाए तो इनके फायदे दोगुना हो जाते हैं। इन्हें एक साथ पीने से यह कई स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं दूर होती हैं।
रोजाना हल्दी वाला दूध लेने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मिलता है। हड्डियां स्वस्थ और मजबूत होती है।
गठिया दूर करने में सहायक
हल्दी वाले दूध को गठिया के निदान और रियूमेटॉइड गठिया के कारण सूजन के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है। यह जोड़ो और पेशियों को लचीला बनाकर दर्द को कम करने में भी सहायक होता है।
वजन कम करने में सहायक
वजन कम करना हल्दी वाले दूध से पोषण के फैट्स को नष्ट करने में सहायता मिलती है। यह वजन को कंट्रोल करने में सहायक होता है।
सांस संबंधी बीमारियां
सांस संबंधी बीमारियां हल्दी वाला दूध प्रतिजैविक होने के कारण जीवाणु और विषाणु के संक्रमण पर हमला करता है। इससे सांस सम्बन्धी बीमारियों के उपचार में लाभ मिलता है। यह मसाला आपके शरीर में गरमाहट लाता है और फेफड़े व साइनस में जकड़न से तुरंत राहत मिलती है।
कैंसर
कैंसर जलन और सूजन कम करने वाले गुणों के कारण यह स्तन, त्वचा, फेफड़े, प्रॉस्ट्रेट और बड़ी आंत के कैन्सर को रोकता है। यह कैंसर कोशिकाओं से डीएनए को होने वाले नुकसान को रोकता है और कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करता है।
नींद न आना
हल्दी वाला गर्म दूध ट्रिप्टोफैन नामक अमीनोअम्ल बनाता है जो शान्तिपूर्वक और गहरी नींद में सहायक होता है।
सर्दी और खांसी
सर्दी और खांसी अपने प्रतिजीवाणु और प्रतिविषाणु गुणों के कारण हल्दी वाले दूध को सर्दी और खांसी का बेस्ट उपचार माना जाता है।


सुबह के वक्त की सैर सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है। लेकिन अगर सुबह की सैर आप हरियाली यानी हरी घासों पर करें और वह भी नंगे पांव तो उसके बड़े ही फायदे है।  नंगे पैर घास पर चलना आपके स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। आईए उन चंद फायदों के बारे में हम जानते है।
आप जितनी देर और जितना ज्यादा हरियाली के बीच रहेंगे, उतने ही स्वस्थ और तनाव रहित रहेंगे। घास पर नंगे पांव चलने से धीरे-धीरे मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है और तनाव रहित बनाता है। साथ ही ग्रीन थैरेपी से मस्तिष्क की शक्ति भी बढ़ती है।
मधुमेह में लाभ
मधुमेह रोगियों के लिए हरी घास पर चलना और बैठना बहुत अच्छा माना जाता है। मधुमेह रोगी यदि हरियाली के बीच रह कर नियमित गहरी सांस लेते हुए टहलें तो शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति होने से समस्या से मुक्ति पाई जा सकती है।
छींक, एलर्जी का इलाज

ग्रीन थैरेपी का मुख्य हिस्सा है -हरी-भरी घास पर नंगे पैर चलना या बैठना। सुबह-सुबह ओस में भीगी घास पर चलना बहुत बेहतर माना जाता है जो पांवों के नीचे की कोमल कोशिकाओं से जुड़ी तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक राहत पहुंचाता है। घास पर कुछ देर तक बैठने, चलने से एलर्जी और छींक से भी मुक्ति पाई जा सकती है।
आंखों की रोशनी
सुबह-सुबह ओस में भीगी घास पर चलने से आंखों की रोशनी भी तेज होती हैं। कुछ दिन नंगे पैर हरी घास पर चलने से आपका चश्मा उतर सकता है या फिर चश्मे का नंबर कम हो सकता है।


एक नए शोध के मुताबिक, एक आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया है कि विश्व की 76 प्रतिशत आबादी यानी करीब 5.5 अरब लोग मोटापे के शिकार हैं। शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि यह धीरे-धीरे विकराल रूप लेता जा रहा है। इसके साथ ही इससे जटिल व पाचन संबंधी गंभीर बीमारियों के खिलाफ वैश्विक स्वास्थ्य प्रयासों में अब बदलाव करने की अपील की है।

शोधकर्ताओं ने मोटापे के पीछे की एक विशिष्ट धारणा को रेखांकित किया है कि जरूरत से ज्यादा वसा होने से स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर पड़ता है। इस शोध में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता भी शामिल हैं। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार यह बात सामने आयी है कि अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या में हुई वृद्धि ने इसको मोटापे की उस श्रेणी में डाल दिया जिसमें सामान्य वजन के लोग भी शामिल हैं।



इसके मुख्य अध्ययनकर्ता और ऑस्ट्रेलिया के मैफ फिटनेस प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ फिलिप मैफेटोन ने कहा, ‘मोटापे के इस विकराल रूप ने उन लोगों को भी अपने आगोश में ले लिया है जो लोग व्यायाम करते हैं और यहां तक कि वे लोग भी जो खेलों में काफी अच्छे हैं।’ मैफेटोन ने बताया, ‘मोटापे की इस श्रेणी में सामान्य वजन के लोग भी शामिल हैं जिससे जटिल बीमारियों के लिए खतरा और बढ़ गया है। यह खतरा ज्यादा मोटे लोगों के साथ-साथ उनके लिए भी है जिनको सामान्य वजन का समझा जाता है।’ 
पिछले तीन से चार दशकों में मोटापे का यह भयावह चेहरा काफी हद तक बढ़ गया है जिससे ज्यादातर लोग अस्वस्थ होने की कगार पर हैं। मैफेटोन ने बताया कि हमलोग इन खतरनाक कारकों में हो रहे इजाफे को लेकर जागरूकता फैलाना चाहते हैं, जहां ‘ओवरफैट’ और ‘अंडरफैट’ शब्दावलियों को नये सिरे से व्याख्या की जाएगी। हम उम्मीद करते हैं कि यह शब्दावली आम प्रयोगों में शामिल होगी जिससे विश्व स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार करने में मदद मिलेगी।



वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर डिवाइस पर ज्यादा समय बिताने वाले बच्चों को ड्राइ आई यानी आंखों में सूखेपन की समस्या का जोखिम बहुत ज्यादा होता है।
दक्षिण कोरिया के चुंग आंग यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक वीडियो डिस्प्ले टर्मिनल (वीडीटी) मसलन स्मार्टफोन या कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल का संबंध बच्चों में ऑक्यूलर सरफेस सिम्पटम्स (नेत्र संबंधी लक्षणों या समस्या) की बारंबारता से पाया गया है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि हमने 916 बच्चों का नेत्र परीक्षण किया था। बच्चों और उनके परिवार को प्रश्नावली दी गई थी जिसमें वीडीटी के इस्तेमाल, खेलकूद की गतिविधि, सीखने और ऑक्यूलर सरफेस डिसीज इनडेक्स में बदलाव से संबंधित स्कोर शामिल था।
प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया था जिसमें 630 बच्चे शहरी इलाकों के और 286 ग्रामीण इलाकों से थे। शहरी समूह के कुल 8.3 फीसदी बच्चों में ड्राइ आई डिसीज (डीईडी) की समस्या मिली जबकि ग्रामीण समूह में ऐसे बच्चों का आंकड़ा 2.8 फीसदी था। शहरी समूह में स्मार्टफोन के इस्तेमाल की दर 61.3 फीसदी और ग्रामीण समूह में 51 फीसदी थी।
बच्चों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल का बाल्यावस्था डीईडी से है। यह शोध जर्नल बीएमसी ऑप्थेल्मोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

सर्दी के दिनों में लोगों को ज्यादा दिल का दौरा पड़ता है? असल में तापमान में गिरावट इसका मूल कारण है। सर्दियों के मौसम में शरीर के तापमान में गिरावट और विटामिन डी के स्तर में कमी और रक्त के गाढ़ेपन में वृद्धि हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा देती है। 
सर्दियों के दौरान तापमान में अचानक गिरावट के अलावा, तेज हवा और बारिश अक्सर शरीर के तापमान को कम कर देते हैं। इसके कारण रक्तचाप अचानक बढ़ जाता है जिससे दिल के दौरे का जोखिम उत्पन्न हो जाता है। असल में सर्दी के दिनों में दिल का ख्याल इस तरह से रखने पर हार्ट एटैक होने के खतरा कम रहता है।
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि 40 वर्ष की आयु से ऊपर के व्यक्तियों को दिल के दौरे का खतरा अधिक होता है। उच्च रक्तचाप से मोटापा, कोलेस्ट्रॉल के स्तर, मधुमेह या अत्यधिक धुम्रपान सर्दियों के दौरान दिल का दौरा पड़ने के मामलों को गति प्रदान करने वाले कारकों में शामिल हैं। इसलिए सर्दियों के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। रक्त में ग्लूकोज और कोलेस्ट्रॉल के स्तर का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अलावा शराब के अनियंत्रित सेवन और जंक फूड से बचना चाहिए।

आप जिम जाएं, पार्क जाएं और ऐसी कसरतों का चुनाव करें, जिन में आप के ज्यादा से ज्यादा बौडी पार्ट हिस्सा लें. इस बात को गांठ बांध लें कि स्पौट रिडक्शन जैसा कुछ नहीं होता. आप यह सोचें कि सिर्फ कमर कम हो जाए बाकी सब वैसा ही रहे तो यह सिर्फ प्रोफैशनल बौडी बिल्डरों के बस की बात है.
  • एक छोटा सा प्लास्टिक का डब्बा रख कर उस पर 1 घंटे तक वनटूवनटू करने से 10 गुना बेहतर है, जिम में मौजूद सारे वेट को एक से दूसरी जगह रखना. इस सच को स्वीकार करें कि वेट कम करने की कसरत स्टाइलिश नहीं होती. वह बुरी होती है, दम निकालने वाली होती है.
  • कमर की चरबी कम करने के लिए आप इन उपायों का प्रयोग कर सकते हो कमर की चरबी को कम करने का सबसे पहला नियम जो आयुर्वेद में है। वह है भूख से कम ही भोजन का सेवन करें। जितनी भूख है उससे कम ही खाना खायें। इससे पेट का आकार नहीं बढ़ता और पाचन भी ठीक रहता है। कम भोजन करने से पेट में गैस नहीं बनती है। कोशिश करें कि दिन में 2 बार शौच जाएं।
  • मोटापे से मुक्ति का एक और बड़ा सरल उपाय यह है कि भोजन के तुरंत बाद पानी का सेवन न करें। भोजन करने के लगभग 1 घंटे के बाद ही पानी पीयें। इससे कमर का मोटाप नहीं बढ़ता है। और यह तरीका पेट को कम करने में भी मददगार होता है।
  • भोजन में अधिक से अधिक जौ से बने आटे की रोटियों का इस्तेमाल करें। गेहूं के आटे की रोटी का सेवन बिलकुल कम कर दें। जौ शरीर में मौजूद अतरिक्त चरबी को कम कर देता है। जिससे कमर और पेट की चरबी कम हो जाती है।
  • वजन कम करने और अतरिक्त चरबी को कम करने के लिए आपको यह भी पता होना चाहिए कि भोजन में किन चीजों को इस्तेमाल करें और किन का नहीं। आपको चावल, आलू और चपाती का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए साथ ही खाने में कच्चा सलाद, सब्जी और मिक्स वेज का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए।
  • हमेशा खाना भूख लगने पर ही खाएं। खाना खाते वक्त यह बात जरूर ध्यान रखें कि खाने को मुंह में अच्छी तरह से बारीकी से चबाकर खाएं ताकि आसानी से भोजन गले से नीचे उतर सके।
  • सुबह के नाश्ते में आप चना, मूंग और सोयाबीन को अधिक से अधिक खाने में उपयोग करें। अंकुरित अनाज में आपको भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व आपको मिलेगें। जो मोटापा को बढ़ने नहीं देगें। दलिया को भी आप अपने नाश्ते में जरूर शामिल करें।
  • कमर की अधिक चरबी को कम करने के लिए आपको अपने खाने में हरी सब्जियों का अत्याधिक सेवन करना चाहिए। आप मेथी, पालक, चैलाई की सब्जी को अपने खाने में शमिल करें। हरी सब्जियों में मौजूद कैल्श्यिम और फाइबर आपके शरीर में पोषक तत्वों को पहुंचाते हैं। और इनसे आपका शरीर भी स्वस्थ रहेगा।
  • गर्मियों में दही या मट्ठा के सेवन करने से शरीर के चरबी घटती है। दिन में 2 से 3 बार मट्ठा का सेवन करें।
  • सुबह खाली पेट गरम पानी में 2 चम्मच शहद डालकर 2 महीने तक सेवन करने से कमर का मोटापा कम होता है। इसके अलावा तेल की मालिश करने से भी कमर की चरबी को कम किया जा सकता है।
  • आपको अपने जीवन शैली में एक छोटा सा परिवर्तन लाना जरूरी है। जैसे चढ़ने और उतरने के लिए सीढ़ी का इस्तेमाल करें। साईक्लिंग करना, जाॅगिंग, टहलना, और व्यायाम जरूर करें। एैसा करने से आपकी कमर की चरबी तो कम होगी ही साथ ही आपको मोटापे से मुक्ति मिल जाएगी।

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