'विटामिन डी' के प्राकृतिक स्त्रोतों में से एक मशरूम शरीर के लिए बेहद लाभदायक होता है. हालांकि बहुत से लोग इसे सब्जियों के रूप में इस्तेमाल करते हैं लेकिन यह सब्जियों की श्रेणी में नहीं आता है. यह फंगी ‘कवक’ की श्रेणी में आता है. इसमें इतने पोषक तत्व होते हैं कि इसे सुपरफूड फंगी कहा जाने लगा है. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. कैंसर रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद रहता है. 

अब एक ताजा रिसर्च ने इसके अन्य लाभों से पर्दा उठाया है. शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि मशरूम खाने से डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी उम्र संबंधी न्यूरोडिजिनेरेटिव बीमारियों से बचा या उनको कुछ समय के लिए टाला जा सकता है. न्यूरोडिजिनेरेटिव शब्द का इस्तेमाल तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने की प्रक्रिया के लिए किया जाता है. शोधकर्ताओं में भारतीय मूल का एक शोधकर्ता भी शामिल है.


शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ खाद्य और औषधीय मशरूमों में ऐसे बायोएक्टिव यौगिक होते हैं जो मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं की वृद्धि बढ़ा सकते हैं और सूजन जैसी न्यूरोटोक्सिस उत्तेजनाओं से रक्षा करते हैं जो न्यूरोडिजिनेरेटिव बीमारियों का कारण बनती है.

मशरूम के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले फायदों का किया गया विश्लेषण
मलेशिया में मलाया विश्वविद्यालय से विकिनेश्वर्य सबारत्नम समेत शोधकर्ताओं ने खाने योग्य मशरूम के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले फायदों का विश्लेषण किया. उन्होंने बताया कि शोध के नतीजों से पता चला कि मशरूम उम्र संबंधी न्यूरोडिजिनेरेटिव बीमारियों से बचने या उन्हें कुछ समय के लिए टालने में अहम भूमिका निभाते हैं.

शोधकर्ताओं ने मशरूमों के बायोएक्टिव यौगिकों की गतिविधि पर ध्यान केन्द्रित किया जिससे तंत्रिका कोशिकाओं की रक्षा हो सकती है.


अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सेन्ट्रल फ्लोरिडा के संपत पार्थसारथी ने कहा,‘‘कार्डियोमेटाबोलिक बीमारियों और कैंसर में फायदेमंद साबित होने वाले खाद्य पदार्थों के उलट न्यूरोडिजिनेरेटिव बीमारियों के लिए फायदेमंद खाद्य पदार्थों पर केन्द्रित बहुत कम अध्ययन हुये हैं. इस हालिया अध्ययन से तंत्रिका कोशिकाओं की रक्षा करने वाले और खाद्य सामग्री की पहचान करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है.’’

आप इन दिनों जमकर एक्‍सरसाइज कर रहे हैं. रोज वॉक पर भी जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आपके वेट लॉस नहीं हो रहा है. इसका कारण है आपकी डाइट. दरअसल अकसर लोग अपना वजन कम करने के लिए ढेरों प्रयास करते हैं लेकिन अपनी डाइट पर कंट्रोल नहीं कर पाते. फास्‍ट फूड, तला भूना खाना कम ने करने के कारण आपका वजन उम्‍मीद के मुताबिक कम नहीं हो पाता. अगर आप भी इन दिनों खुद को शेप में लाने की जमकर कोशिशें कर रहे हैं तो यहां पेश हैं कुछ ऐसी रेसिपी, जो आपके काम जरूर आएंगी-

बीन्स और तिल की सलाद: बीन्स को तिरछा 2 बराबर भागों में काट लें. अब इनमें नमक और लाल मिर्च डालकर भाप में पकाएं. अब तेल में तिल डालकर भूनें. इसके बाद इसमें स्टीम्ड बीन्स भी डालकर भून लें. बीन्स और तिल की सलाद तैयार है.

ढोकला: बेसन, नींबू का रस, चीनी और हल्दी का मिश्रण तैयार करें. अब काला नमक, बेकिंग पाउडर पानी में मिलाकर इसमें डाल दें. इस मिश्रण को 15-20 मिनट तक भांप में पका लें. अब सरसों, कड़ी पत्ता और मिर्च का तड़का पके ढोकले पर छिड़क दें और परोसें.


पौष्टिक रोटी: गेंहू के आटे और बेसन को छान लें. उबले आलू को मैश कर लें. अब इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, पालक, गाजर, दही और नमक मिलकार रोटी में भरकर सेक लें. गर्मागर्म रोटी दही या चटनी के साथ सर्व करें.

कुकीज: चीनी, मक्खन, दूध मिलाकर 10 मिनट तक पका लें. अब अलग से जई के आटे में नारियल, मूंगफली, मक्‍खन और वेनिला एसेन्स मिलाएं. दोनों मिश्रण आपस में मिला लें. मिश्रण के गोल हिस्से बनाकर ठंडा होने पर परोसें.

चना चाट: एक बड़े बाउल में चने, टमाटर, प्याज, उबले हुए आलू, हरी मिर्च और उबली हुई मटर मिला लें. अब इसमें नमक, लाल मिर्च और चाट मसाला भी डाल दें. इसमें अनार के दाने, नींबू का रस, पुदीने की चटनी और इमली की चटनी डालकर धनिये से सजाकर सर्व करें.

अंकुरित चाट: आधा कप कटे हुए प्याज, एक कप कटे टमाटर, एक कटी हुई हरी मिर्च, 1 कप अंकुरित दाल को आपस में मिला लें. अब इसमें नमक और नींबू का रस मिलाकर परोसे और मजा लें हेल्‍दी डाइट का.


ब्रेड उपमा: एक पेन में तेल गर्म करें. अब इसमें जीरा, 2 कटी हुई हरी मिर्च, 1 कटा हुआ प्याज, 1 कटा हुआ टमाटर, नमक, 2 कप ब्रेड के टुकड़े डालकर 2 मिनट तक पकाएं. अब हरा धनिया और हरी मिर्च के साथ गार्निश कर परोसें.  

दूध वड़ा: दूध में चावल का आटा इस तरह मिलाएं कि उसमें गांठ ना आए. अब पेन में इसे घीमी आग पर पकाएं. जब यह मिश्रण गाढ़ा हो जाए तो आग से उतारकर ठंडा करें. अब हाथ पर थोड़ा-सा तेल लगाकर मिश्रण के छोटे-छोटे पेड़े बनाएं. घी गर्म कर इन पेडों को गुलाबी तल लें. ऊपर से पिसी चीनी डाल कर परोसें.  

ब्रोकली पराठा: हल्दी पावडर, गर्म मसाला और हरी मिर्च को मिलाकर पेस्‍ट बना लें. अब एक कटोरी में आटा, कटे प्याज, कटी ब्रोकली, लहसुन और नमक मिला लें. अब इसमें हल्‍दी, गर्म मासाला और हरी मिर्च मिलाकर पानी की मदद से आटे की तरह गूंथ लें. अब इसे चपाती की तरह बेलें और पराठे की तरह पका लें.

शिमला मिर्च,मशरूम फ्राई: बारीक कटे प्‍याज, अदरक और हरी मिर्च को तेल में भून लें. अब इसमें लंबी कटी शिमला मिर्च और मशरूम डालकर पकाएं. अब इसमें लाल मिर्च डालकर 2 मिनट तक पकाएं. इसमें टमाटर की सॉस डालकर 2 मिनट और पकाने के बाद गर्मागर्म परोसें.


मन उदास होने के कई कारण हो सकते हैं, ब्रेकअप होना, बॉस से डांट पड़ना, दोस्‍तों से लड़ाई हो जाना या फिर पार्टनर से मतभेद होना. हर व्‍यक्ति पर इस उदासी के अलग- अलग इफेक्‍ट आते हैं कुछ लोग इस दौरान चुप रहना पसंद करते हैं तो कुछ लोग खाना ज्‍यादा खाने लग जाते हैं. पर जनाब चुप रहने तक तो ठीक है लेकिन गुस्‍से में ज्‍यादा खाने से आपको कई तरह के नुकसान हो सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कि उदासी के दौरान कौन-सी चीजें खाने से आपकी हेल्‍थ पर हो सकता है बुरा इफेक्‍ट.

आलू के चिप्स: एक हार्वर्ड अध्ययन के मुताबिक एक बार में 15 चिप्स खाने से आपका वजन धीरे-धीरे बढ़ सकता है. हो सकता है कि ये चिप्‍स आपको अपनी ओर आकर्षित करें लेकिन इनकी दीर्घकालिक खामियों से सावधान रहें.


कुकीज़: आपको अपने आसपास कई ऐसी दुकानें मिल जाएंगी जहां हजारों की मात्रा में कुकीज़ रखी होती हैं. पर क्‍या आप जानते हैं कि ज्‍यादातर कुकीज़ में ट्रांसफैट का इस्‍तेमाल किया जाता है. जिसे अधिक मात्रा में लेने से आपके अंदर अग्रेशन बढ़ सकता है.

कैंडी: शुगर की चाह एक लत की तरह होती है. कैंडी भी उसी तरह असर करती हैं, जिस तरह एक शराब करती है. ये आपके अपना आदि बना लेती हैं. आप इसे खाते जाते हैं और यह समझ नहीं पाते कि कब रूकना है. जिसका सीधा असर आपकी हेल्‍थ पर पड़ता है.

पिज़्ज़ा: हालांकि ये हर किसी का पसंदीदा फूड है, लेकिन ये उन फूडस में से एक है जो आपको अपना आदि बना लेता है. वसा से भरपूर होने के नाते आप इसे खुद को खाने से नहीं रोक पाते. पर ध्‍यान रखें कि इसमें बहुत मात्रा में कैलोरी और कोलेस्ट्रॉल होता है.

ब्रेड: उदासी में अधिक ब्रेड खाने से आपकी हेल्‍थ पर सीधा असर पड़ता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट ज्‍यादा होता है. इसमें बॉडी में शुगर लेवल बढ़ता है और डायबिटीज की प्रॉब्‍लम हो सकती है.

आपको याद होगा बचपन में जब कभी आपको चोट लगती थी तो आपकी दादी या नानी ने अपने हजारों साल पुराने नुस्‍खों से आपकी चोट को ठीक करने का प्रयास जरूर करती थीं. चेहरे पर कोई दाग हो या पिंपल आपकी दादी और नानी के पास हर चीज का इलाज था. और ऐसा नहीं है कि ये इलाज कारगर नहीं थे, बल्कि इनका इफेक्‍ट गजब होता है. ऐसे ही घरेलू नुस्खों में से कुछ बेहद खास टिप्‍स थे, आइए आपको इनके बारे में बताते हैं.

1.कटे-फटे पैरों से छुटकारा: सफेद चीनी + ब्राउन शुगर + बेबी ऑयल + वनीला एक्सट्रैक्ट


यह नेचुरल रेमेडी आपके पैरों को खूबसूरत दिखाने के लिए काफी अहम है. आपके पास टाइम नहीं है तो इस रेमेडी को ट्राई करें. सफेद चीनी, ब्राउन शुगर, बेबी ऑयल और वनीला एक्सट्रैक्ट को आपस में मिला लें. अब इसे अपनी एड़ियों पर हल्‍के हाथों से मलें और कमाल देखें.


2. चेहरे पर गजब का निखार: बेसन + दही + हल्दी + रोज़ वॉटर

दिनभर की भागदौड़ और थकान का सीधा असर अगर कहीं दिखता है तो वो है आपका चेहरा. अब खूबसूरत दिखना है तो थोड़ी मेहनत तो करनी ही होगी. इसके लिए इस बेसन मास्‍क को ट्राई करें. यह डेड स्किन और पिंपल्‍स को खत्‍म करने में कारगर होता है. इसका आपकी स्किन पर कोई साइडइफेक्‍ट भी नहीं होगा.


3. ऑयल फ्री हेयर: केला दही शहद

कई बार बालों को 2-3 दिन तक न धोने पर इनमें ऑयल अपने आप आ जाता है. ऐसे में सुबह-सुबह इन्‍हें धोना आफत से कम नहीं होता. ऐसे में ये पैक आपके काम आ सकता है, क्‍योंकि इसमें इस्‍तेमाल होने वाला सभी सामान आसानी से आपके घर में उपलब्‍ध हो जाएगा. एक पका हुआ केला लें. अब इसमें दही और शहद अच्‍छी तरह मिला लें. इस मिक्‍चरसे बालों की नमी हटाकर इन्‍हें चमकदार बना देगा. इस पैक को अपने पूरे बालों पर लगाकर अपने बालों को शॉवर कैप या टॉवल से कम से कम 30 मिनट के लिए कवर कर दें. बाद में बाल साफ पानी से धो लें.


4. गर्व करने वाले कोहनी और घुटने: बेकिंग सोडा + दलिया

सच बताइए क्‍या आपने अपने घुटनों और कोहनी को उसी तरह साफ करने की कोशिश कभी की है जिस तरह अपने फेस को साफ करती हैं. यकीनन नहीं. इन्‍हें साफ करने के लिए बेकिंग सोडा काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. दरअसल ये मैल निकालने में काफी मदद करता है. अगर आप इसको दलिए के साथ मिलाकर अपनी कोहनी और घुटने पर इस्‍तेमाल करेंगे, तो इनपर जमा मैल असानी से निकल जाएगा.



यह तो सभी जानते हैं कि सब्जियां खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन गुरुवार को सिडनी यूनिवर्सिटी की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, इससे मानसिक तनाव भी दूर होता है.
अध्ययन के लिए कराए गए सर्वेक्षण में 45 साल की उम्र के या इससे ज्यादा उम्र के 60,000 आस्ट्रेलियाई लोगों को शामिल किया गया, उनके ऊपर फलों और सब्जियों के सेवन के प्रभाव को जांचने के लिए 2006-2008 और 2010 दो अलग-अलग सालों में उनके जीवन शैली और मानसिक तनाव को जांचा गया.
सामान्य चिंता और अवसाद को मापने वाले 10 अंक के पैमाने पर केसलर स्केल के उपयोग से शोधकर्ताओं ने लोगों द्वारा ग्रहण किए गए सब्जियों और फलों के परिणाम की तुलना की.
शोधकर्ता डॉ. मेलोडी डिंग ने बताया, “लगभग 50 प्रतिशत वयस्कों ने फल खाने के दिशानिर्देश को अपनाया, जबकि सिर्फ सात प्रतिशत ने सब्जियों में रुचि दिखाई.”
अध्ययन के निषकर्ष के मुताबिक, “जो महिलाएं रोजाना 5-7 फलों और सब्जियों का सेवन करती हैं, उनमें तनाव होने की संभावना 23 प्रतिशत कम होती है.”
यहां तक कि सामान्य मात्रा में सबजियों का सेवन करने वाले लोगों के भी तनावग्रस्त होने की संभावना कम होती है. जिन लोगों ने रोजाना 3-4 सब्जियों का सेवन किया, उनमें रोजाना 0-1 सब्जी का सेवन करने वालों के मुकाबले तनाव होने की संभावना 12 प्रतिशत कम होती है.
प्रचलित धारणा के विपरीत, सिर्फ फल तनाव कम करने में महत्वपूर्ण रूप से प्रभावी नहीं है.
सब्जियां तनाव कम करने में क्यों कारगर हैं, इसका कारण अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है.
डिंग ने कहा, “दुर्भाग्य से हमें यह नहीं पता है. हमारे निष्कर्ष जनसंख्या के बड़े आंकड़ों पर आधारित है, हमें इस प्रक्रिया को समझने के लिए अन्य विषयों पर भी काम करना होगा.”

आमतौर पर लोगों को केला खाना बहुत पसंद हैं. आप ये तो जानते ही होंगे केला खाने के बहुत से हेल्थ बेनिफिट्स हैं. इतना ही नहीं, ये खाने में स्वादिष्ट भी होता है और इसमें कई तरह के पौष्टिक तत्व जैसे विटामिन और मिनरल्स मिले होते हैं जो कि आपको सेहतमंद बनाते हैं. लेकिन बहुत से लोग इस बात से अनभिज्ञ होंगे कि केले का फूल खाने से भी बहुत फायदा होता है. आज हम आपको केले के फूल खाने के कुछ फायदों के बारे में बताएंगे.
एनीमिया का हो सकता है इलाज- केले का फूल आयरन से भरपूर होता है. बल्‍ड सेल्स को हेल्दी रखने में आयरन बहुत मदद करता है. केले का फूल खाने से ना सिर्फ एनीमिया से बच सकते हैं बल्कि इसका आसानी से इलाज भी किया जा सकता है.
अनियमित माहवारी- बॉडी में हार्मोंस के बदलाव के कारण अनियमित माहवारी हो जाती है जिसे केले का फूल खाकर ठीक किया जा सकता है. केले का फूल खाने से ना सिर्फ माहवारी को नियमित किया जा सकता है बल्कि बहुत अधिक होने वाले रक्त के बहाव को भी रोका जा सकता है. साथ ही पेल्विक पेन को भी रोक सकते हैं.
मांओं के लिए फायदेमंद- केले के फूल में कुछ ऐसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो नई मांओं के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. साथ ही ब्रेस्ट से  मिल्क भी सही से आता है.
डायबिटीज का इलाज- कई रिसर्च ये साबित कर चुकी हैं कि केले के फूल का सेवन करने से ब्लड शुगर का लेवल कम रहता है और डायबिटीज को होने से बचाया जा सकता है.
यूरिन हेल्‍थ में मददगार- केले का फूल आयरन, कैल्शियम और कॉपर युक्‍त होता है जो कि यूट्रेस इंफेक्शन को दूर करता है. यहां तक की यूरिन इंफेक्शन से भी बचाता है. साथ ही पेल्विक एरिया को मजबूत करता है और फर्टिलिटी बढ़ाता है.
कब्ज से राहत- फाइबर युक्त केले के फूल का सेवन करने से कब्ज की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है.
सूजन और जलन का इलाज- एंटीबैक्टिीरियल केले के फूल में शरीर में आई सूजन को दूर करने की क्षमता होती है.

पपीता खाना यूं तो हर किसी के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन इसके कुछ खास फायदे भी हैं जानिए, पपीता और उसकी पत्तियों को खाने से आप किन बीमारियों से बच सकते हैं.
  1. जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हो अगर वे रोजाना एक कटोरी पपीता खाएंगे तो उनका हाजमा ठीक रहेगा.
  2. कच्चा पपीता खाने के भी कई फायदे हैं. ये प्रोटीन डायजेशन माना जाता है यानी जिन लोगों को चना, राजमा या दालें हजम नहीं होती उन्हें थोड़ा सा कच्चा पपीता सलाद के तौर पर खाना चा‍हिए. इससे उनमें प्रोटीन की कमी नहीं होगी.कच्चा पपीता छोटे बच्चों को नहीं देना चाहिए क्योंकि बच्चों का पाचन तंत्र कच्चे पपीते को डायजेस्ट नहीं कर पाएगा.
  3. पपीते में पाए जाने वाला बीटा कैरोटिन विटामिन ए में तब्दील होता है जो कि स्वस्थ आंखों के लिए बहुत फायदेमंद हैं.
  4. यदि किसी ने फ्राइड या हैवी खा लिया है तो उसे पपीता खाना चाहिए. पपीते को खाना खाने के बाद भी खाया जा सकता है.
  5. गर्भवती महिलाओं को बहुत ज्यादा पपीता नहीं खाना चाहिए.
  6. इम्यूनिटी बढ़ाना चाहते हैं तो भी पपीता खा सकते हैं. ऐसे लोग यदि रोजाना पपीता खाएंगे उनको कफ, कोल्ड और बुखार जल्दी-जल्दी होना कम हो जाता है.
  7. डायबिटीज मरीज भी पपीता खा सकते हैं.

अब गर्मियों का मौसम आ ही गया है तो इस मौसम में सबसे ज्‍यादा जो दिक्कत होती है वो है घमौरियों की यानि प्रीकली हीट की. कैसे बचें गर्मियों में घमौरियों से.
  1. सबसे ज्यादा घमौरियां बच्चों को होती है क्योंकि उनके स्वेट ग्लैंड्स पूरी तरह से फंक्शनल नहीं होते. ऐसे में बच्चों को नहाने के बाद पाउडर लगाना बहुत जरूरी है. साथ ही बच्चों को ढीले कपड़े ही पहनाने चाहिए.
  2. व्यस्क लोग भी गर्मियों के मौसम में टाइट कपड़े ना पहनें. गर्मियों में नायलॉन और रेयॉन के कपड़ों को पहनने से बचना चाहिए. कूल कपड़े, कॉटन या लेनिन के कपड़े ही खासतौर पर पहनें.
  3. अगर आपको हर बार गर्मियों में घमौरियां हो जाती हैं तो चंदन का पैक बनाएं. रात में सोने से पहले इसे बॉडी पर लगाएं इससे घमौरियां काफी हद तक कंट्रोल रहेंगी. चंदन शरीर को ठंडा रखता है.
  4. इसी तरह से एलोवेरा और लेमन जूस मिलाकर पीएं. सुबह उठकर खाली पेट 2 चम्‍मच ऐलोवेरा जूस में 8 से 10 बूंद नींबू मिलाकर एक गिलास ठंडे पानी में घोलकर पीएं. इससे बाहर जाने पर भी आपको घमौरियां नहीं निकलेंगी.
  5. गुलकंद का सेवन करने से भी आप घमौरियों से बच सकते हैं. ये शरीर का ठंडा रखता है. गुलकंद के साथ गुलाबजल मिलाकर शरीर पर स्प्रे करेंगे तो भी घमौरियां नहीं होंगी.
  6. गर्मियों में नियमित रूप से प्याज खाने से भी घमौरियों को कंट्रोल किया जा सकता है.
  7. शतावरी हर्ब को दो मिलीग्राम आप ठंडे पानी के साथ लीजिए. ये आपके शरीर को ठंडा रखेगा.
  8. इसी जरह से वैसलिन या हैवी क्रीम को गर्मियों में शरीर पर एप्लाई ना करें. इससे घमौरियां बढ़ती हैं.
  9. आप घमौरियों को कम करने के लिए कैल्माइन लोशन लगा सकते हैं. इससे घमौरियों के खुजली कम होगी.


अधिकत्तर युवा ठीक से नींद पूरी नहीं कर पाते. कई लोग ऑफिस के टाइमिंग की वजह से नींद पूरी नहीं कर पाते. 6 से 8 घंटे की नींद नहीं लेने के कारण लोगों को कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे इम्यून सिस्टम कमजोर होना, डायजेशन प्रॉब्लम, हार्ट डिजीज रिस्क, डिप्रेशन, वजन बढ़ना और दिखाई देने में समस्या जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप अपनी नींद को बेहतर कर सकते हैं.
रोजाना एक्सरसाइज- कई रिसर्च ये बात साबित कर चुकी हैं कि जो लोग रोजाना एक्सरसाइज करते हैं वे ना सिर्फ बेहतर नींद ले पाते हैं बल्कि उनके सोने का एक पैटर्न भी बंध जाता है.
ओड ऑवर्स में ना सोएं- हो सकता है कि दिनभर की मेहनत के बाद आप शाम के समय पॉवर नैप लेते हो. लेकिन ऐसा करने से आपकी नींद डिस्टर्ब हो सकती है.
दोपहर में लें पॉवर नैप- दोपहर के समय 10-15 मिनट सोना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. इससे आप अधिक एनर्जेटि‍क महसूस करेंगे.
डिनर हैवी ना करें- अगर आप जल्दी‍ और कम खाएंगे तो आपके लिए बेहतर है. अच्छी नींद के लिए जरूरी है कि आप रात को देर से ना खाएं और रात के समय बहुत हैवी ना खाएं. रात में हैवी खाते हैं तो एसिडिटी, ब्लोटिंग और बाकी समस्याएं हो सकती हैं जो कि आपकी नींद डिस्टर्ब कर सकता है.

मैग्नीशियम युक्त फूड खाएं- अच्छी नींद और दिमाग को सही से काम करने के लिए मैग्नीशियम की जरूरत होती है. आप हरी सब्जियां, केला, पम्किन सीड्स, फ्लैससीड्स, बादाम और सनफ्लोवर सीड्स जैसी चीजों को अपनी डायट में शामिल करें.
गैजेट्स से दूर रहें- एक स्टडी के मुताबिक, गैजेट्स से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन नामक हार्मोन रिलीज करती है जो कि नींद को बहुत डिस्टर्ब करता है. सोने से कम से कम 1 घंटा पहले गैजेट्स को बंद कर देना चाहिए.
अन्य टिप्स –
सोने से कम से कम दो घंटे पहले से ही चाय-कॉफी का सेवन ना करें. इससे नींद डिस्ट्र्ब होती है.
सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी में नहाएं. बुक पढ़ें. हल्का म्यूजिक सुनें और सोने का टाइम फिक्स करें. इससे बेहतर नींद आएगी.
नींद के लिए कमरे में पूरा अंधेरा करें. कमरे में कहीं से भी रोशनी ना आने दें. इससे भी नींद पूरी होगी.



मां-बाप के लिए विशेष ध्यान देने वाली बात है कि हैंड सेनिटाइजर (हाथ कीटाणुरहित करने वाला रासायनिक घोल) आपके बच्चों के लिए अच्छे से अधिक नुकसानदायक साबित हो सकता है। 
एक नये अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि अल्कोहल आधारित इस सुगंधित उत्पाद को बच्चे निगल सकते हैं, जिससे उनको पेट में दर्द, मितली की शिकायत हो सकती है और यहां तक कि वे कोमा में भी जा सकते हैं। 
यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) एंड प्रिवेंशन के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि सेनिटाइजर के संपर्क में आने से बच्चों के स्वास्थ्य पर पेट दर्द, मतली, उल्टी होने जैसे नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

क्या आपको पता है कि रोजाना ब्लूबेरी का 30 एमएल जूस पीने से के दिमागी ताकत में इजाफा हो सकता है. खास तौर से बड़ी उम्र के लोगों के लिए यह लाभकारी है. एक हालिया रिसर्च में ये बात सामने आई है कि रोजाना ब्लूबेरी का जूस पीने वाले 65 से 77 साल उम्र के बीच के स्वस्थ लोगों में संज्ञानात्मक कार्य, दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन और दिमागी सक्रियता में सुधार नजर आया। यह जानकारी संज्ञानात्मक परीक्षण यानि Cognitive test के दौरान सामने आयी। 
ब्रिटेन में एक्सीटर विश्वविद्यालय के जोआना बोट्टेल के मुताबिक, ‘‘जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है हमारी संज्ञानात्मक क्रिया में गिरावट आती है, लेकिन पूर्ववर्ती शोधों से पता चला है कि पेड़-पौधों से जुड़े खाद्य पदाथरें के सेवन से बुजुर्गों की संज्ञानात्मक क्रिया बेहतर होती है.’’ बोट्टेल ने बताया, ‘‘इस अध्ययन में हमने पाया कि 12 सप्ताह तक हर दिन 30 मिलीमीटर ब्लूबेरी का जूस पीने पर इस उम्र समूह के स्वस्थ बुजुर्गों के मस्तिष्क में खून का प्रवाह, दिमाग की सक्रियता और कामकाजी स्मृति में बढ़ोतरी होती है.’’
अध्ययन में 26 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया जिसमें से 12 को ब्लूबेरी का जूस दिया गया जबकि 14 को प्रायोगिक औषधि दी गयी. शोधकर्ताओं ने बताया कि इससे कामकाजी याद्दाश्त में भी सुधार के प्रमाण मिले हैं. ब्लूबेरी में फ्लेवोनोइड पाया जाता है जो एंटी ऑक्सीडेंट होता है और जलन तथा सूजन को कम करने वाले गुणों से भरपूर रहता है.

वायु प्रदूषण से जीवाणुओं की क्षमता में वृद्धि होने जाने से सांस संबंधी संक्रमण के इलाज में दी जाने वाली एंटीबॉयोटिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं। यह बात एक शोध में सामने आई। 
ब्रिटेन में लीसेस्टर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर जूली मोरीसे ने कहा, शोध से हमें यह समझने में मदद मिली है कि किस तरह वायु प्रदूषण मानव जीवन को प्रभावित करता है। मोरीसे ने कहा, इससे पता चलता है कि संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं पर वायु प्रदूषण का काफी प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण से संक्रमण का प्रभाव बढ़ जाता है। 
इस शोध का प्रकाशन पत्रिका 'एन्वायरमेंटल माइक्रोबायोलॉजी' में हुआ है। इसमें बताया गया है कि वायु प्रदूषण कैसे हमारे शरीर के श्वसन तंत्र (नाक, गले और फेफड़े) को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण का प्रमुख घटक कार्बन है। यह डीजल, जैव ईंधन व बायोमास के जलने से पैदा होता है। शोध से पता चलता है कि यह प्रदूषक जीवाणु के उत्पन्न होने और उसके समूह बनाने की प्रक्रिया को बदल देता है। इससे उनके श्वसन मार्ग में वृद्धि व छिपने और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली से लड़ने में सक्षम हो जाता है।
यह शोध दो मानव रोगाणुओं स्टेफाइलोकोकस अयूरियस और स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया पर किया गया। यह दोनों प्रमुख श्वसन संबंधी रोगकारक हैं जो एंटीबॉयोटिक के प्रति उच्च स्तर का प्रतिरोध दिखाते हैं। शोध दल ने पाया कि कार्बन स्टेफाइलोकोकस अयूरियस के एंटीबॉयोटिक बर्दाश्त करने की क्षमता को बदल देता है। यह स्टेफालोकोकस निमोनिया के समुदाय की पेनिसिलीन के प्रति प्रतिरोधकता को भी बढ़ा देता है। इसके अलावा पाया गया कि कार्बन स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया को नाक से निचले श्वसन तंत्र में फैलाता है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।


बालों को रंगने वाले पदार्थ या हॉर्मोनल गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है।
हेलसिंकी विश्वविद्यालय और फिनिश कैंसर रजिस्ट्री की अन्ना हिकनेन ने स्तन कैंसर पैदा करने वाले कारकों में हॉर्मोनल गर्भनिरोधकों और बाल रंगने वाले रसायनों की भूमिका का अध्ययन किया। 


सर्वेक्षण के अध्ययन के मुताबिक हॉर्मोनल गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा 52 फीसदी तक बढ़ जाता है।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि बाल रंगने के कारण स्तन कैंसर का खतरा 23 प्रतिशत तक बढ़ गया।

मां बनने जा रही महिलाओं के लिए जरूरी खबर! एक स्टडी में यह दावा किया गया है कि गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में मुलेठी खाने से बच्चे के दिमाग का विकास प्रभावित हो सकता है.

अध्ययन में कुछ वयस्क लोगों को शामिल किया गया जिनको जिनकी मां ने गर्भवती रहने के दौरान मुलेठी का खूब सेवन किया था. इसके बाद मुलेठी का सेवन करने वाली महिलाओं के बच्चों और अन्य लोगों के एक दिमागी प्रतियोगिता कराई गई. इसमें यह देखा गया कि मुलेठी का सेवन करने वालों का प्रदर्शन अन्य के मुकाबले कम रहा.


इनका सेवन करने वालों के बच्चों पर भी इसका असर देखा गया. ऐसे लोगों की लड़कियों में यौवन अवस्था समय से थोड़ा पहले शुरू हो गई.

378 युवाओं की आपस में तुलना की गई
फिनलैंड में हेल्सिंकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने करीब 13 सालों तक 378 युवाओं की आपस में तुलना की. इनमें दो तरह के युवा शामिल थे. एक ऐसे जिनकी मां ने गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में मुलेठी का सेवन किया था तथा दूसरे ऐसे लोग थे जिनकी मां ने मुलेठी का सेवन थोड़ा या फिर बिल्कुल नहीं किया था.

अध्ययन में पाया गया कि गर्भवस्था के दौरान मुलेठी का अधिक मात्रा में इस्तेमाल करने वाली महिलाओं के बच्चों के दिमाग पर बुरा असर होता है और इस बारे में महिलाओं को सूचित किया जाना चाहिए.


एग्जाम के समय में हर स्टूडेंट्स का टेंशन लेना आम बात है, क्यों इसका सीधा इफेक्ट करियर को लेकर होता है. भले ही एग्जाम बच्चों का होता है, लेकिन इस समय बच्चों से ज्यादा टेंशन उनके पैरेंट्स को होती है. अगर आपके बच्चे का भी आने वाले समय में एग्जाम है और आप चाहते है कि उनके अच्छे नंबर आएं तो उनके रोज के खाने में थोड़ा बदलाव करें और उन्हें हेल्दी चीजे खिलाएं. आज हम आपको कुछ ऐसी ही चीजे बता रहें हैं जो आपके बच्चों को एग्जाम की तैयारी में मदद करेंगें.

हैवी और हेल्दी खाने से करें शुरुआत: बच्चों के डिनर और ब्रेकफास्ट में लगभग 10 घंटे का गैप होता है, इसलिए उन्हें नाश्ते में कुछ हैवी खाने को दें. जैंसे- ओट्स, मूसली, उपमा, इडली अच्छे विकल्प हो सकते हैं. क्योंकि इनमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जिससे लगातार ग्लूकोज की सप्लाई होती रहती है.

थोड़ी-थोड़ी देर में हल्का-हल्का खिलाते रहें: सुबह हैवी खाना देने का मतलब यह नहीं कि आप पूरे दिन उन्हें हैवी चीजे खिलाएं. सुबह के नाश्ते के बाद थोड़ी-थोड़ी देर में हल्की और पोष्टिक चीजें खिलाते रहें. इससे उन्हें नियमित अंतराल पर जरूरी पोषण मिलता रहेगा और वे एक्टिव रहेंगे व पढ़ाई में उनका मन लगेगा. ताजा फल, फ्रूट स्मूथी, ड्राइ फ्रूट, शहद लगे नट्स, सूप, सलाद अच्छे विकल्प हैं.


याददाश्त बढ़ाने वाला खाना दें: एग्जाम के समय में बच्चों को भूलने की सबसे बड़ी समस्या होती है इसलिए उन्हें ऐसा खाना दें जो उनकी याददाश्त बढ़ाए. मछली, अलसी, कद्दू के बीज, तिल, सोयाबीन का तेल अच्छे विकल्प हैं. मछली में पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड दिमाग के लिए अच्छा है और इससे याददाश्त बढ़ती है.


बच्‍चों को बीमार होने से बचाएं: सर्दी के मौसम और एग्जाम की टेंशन में बच्चे अक्सर बीमार हो जाते है, इस कारण उनकी पढ़ाई पर इसका असर पड़ता है. इस समय उनको कुछ ऐसा खाना दें जिसे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और परीक्षा के दौरान बच्चे बीमार पड़ें. विटामिन ए, सी और ई जैसे एंटी-ओक्सीडेंट्स फ्री-रेडिकल्स से लड़कर तनाव के कारण मस्तिष्क की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम करते हैं. अंडे, मछली, गाजर, कद्दू, हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल आदि से इनकी पूर्ति हो सकती है.


बच्चों को हायड्रेटेड रखें: सर्दी के मौसम में प्यास कम लगती है, जिससे बच्चे कम पानी पीते है. इससे उनमें डीहायड्रेशन की समस्या होती है और उनका मन बेचैन सा होने लगता है. इस कारण वे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. यदि वे ज्यादा पानी पीना पसंद नहीं करते हैं तो उन्हें ताजे फलों का जूस, नींबू पानी, छाछ या ग्रीन टी दें. हां, लेकिन इस बात का ख्याल रखें के एग्जाम के दौरान उनको चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक और कोल्ड ड्रिंक से दूर रखें, क्योंकि इससे सिरासिडीन रिदम बिगड़ जाता है और वे ढंग से नहीं सो पाते हैं.


लड़कियों के खाने-पीने की बुरी आदतों को लेकर एक खतरे की घंटी है. जो लड़कियां सॉफ्ट ड्रिंक, प्रोसेस्ड मीट ज्यादा खाती हैं और सब्जियां कम खाती है उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा ज्यादा हो सकता है.
एक नये शोध में इसे लेकर चेताया गया है. शोधकर्ताओं ने करीब 45,204 महिलाओं से आंकड़ें एकत्रित किये, जिन्होंने हाई स्कूल में अपने खाने-पीने के बारे में भोजन से जुड़ी आदतों को लेकर एक प्रश्नावली पूरी की थी. उनकी उम्र 33 से 52 वर्ष के बीच है .
अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस में प्रोफेसर कैरीन बी मिशेल्स ने कहा, ‘‘ब्रेस्ट कैंसर होने में कई साल लगते हैं इसलिए हम यह जानने के लिए उत्साहित थे कि क्या एक महिला के जीवन के शुरआती वषरें के दौरान इस तरह का खान-पान ब्रेस्ट कैंसर के लिए खतरे बढ़ा सकता है.’’ वर्ष 1991 में खान-पान की आदतों की प्रश्नावली का इस्तेमाल करते हुये किशोरियों के भोजन का मूल्यांकन किया गया. उस समय इनकी की आयु 27 से 44 वर्ष की थीं और फिर हर चार साल बाद ऐसा किया गया.
बाइस साल तक ऐसा करने के बाद यह पाया गया कि जिन 870 महिलाओं ने इन प्रश्नावलियों को भरा था उनमें माहवारी बंद होने से पहले ब्रेस्ट कैंसर हो गया और 490 महिलाओं में माहवारी बंद होने के बाद ब्रेस्ट कैंसर हुआ.
मिशेल्स के अनुसार कम मात्रा में सब्जियां खाने और डाइट सॉफ्ट ड्रिंक पीने, रिफाइंड शर्करा और काबरेहाइड्रेट, प्रसंस्कृत मांस खाने का संबंध सूजन से है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे नतीजों से पता चला कि किशोरावस्था के दौरान इस तरह के खान-पान से लंबे समय तक ब्रेस्ट की त्वचा में सूजन हो सकती है जिससे माहवारी बंद होने से पहले महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है.’’ यह शोध कैंसर एपिडेमायोलॉजी, बायोमार्कर्स एंड प्रीवेंशन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.
अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस में प्रोफेसर कैरीन बी मिशेल्स ने कहा, ‘‘ब्रेस्ट कैंसर होने में कई साल लगते हैं इसलिए हम यह जानने के लिए उत्साहित थे कि क्या एक महिला के जीवन के शुरआती वषरें के दौरान इस तरह का खान-पान ब्रेस्ट कैंसर के लिए खतरे बढ़ा सकता है.’’ वर्ष 1991 में खान-पान की आदतों की प्रश्नावली का इस्तेमाल करते हुये किशोरियों के भोजन का मूल्यांकन किया गया. उस समय इनकी की आयु 27 से 44 वर्ष की थीं और फिर हर चार साल बाद ऐसा किया गया.
बाइस साल तक ऐसा करने के बाद यह पाया गया कि जिन 870 महिलाओं ने इन प्रश्नावलियों को भरा था उनमें माहवारी बंद होने से पहले ब्रेस्ट कैंसर हो गया और 490 महिलाओं में माहवारी बंद होने के बाद ब्रेस्ट कैंसर हुआ.
मिशेल्स के अनुसार कम मात्रा में सब्जियां खाने और डाइट सॉफ्ट ड्रिंक पीने, रिफाइंड शर्करा और काबरेहाइड्रेट, प्रसंस्कृत मांस खाने का संबंध सूजन से है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे नतीजों से पता चला कि किशोरावस्था के दौरान इस तरह के खान-पान से लंबे समय तक ब्रेस्ट की त्वचा में सूजन हो सकती है जिससे माहवारी बंद होने से पहले महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है.’’ यह शोध कैंसर एपिडेमायोलॉजी, बायोमार्कर्स एंड प्रीवेंशन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

अक्सर लोगों को ये समझ नहीं आता कि उन्हें किस पर विश्वास करना चाहिए और किस पर नहीं. लेकिन एक रिसर्च के दौरान ऐसा हार्मोन सामने आया है जो आपको ये बताएगा कि आप किस पर विश्वास करें.
नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि कडल कैमिकल से लिंक्ड ये हार्मोन ऑक्सीटोसिन आपको बताएगा कि आप सामने वाले व्यक्ति पर भरोसा कर सकते हैं या नहीं.
रिसर्च के मुताबिक, जब आप किसी से आई कॉन्टेक्ट करेंगे तो ऑक्सीटोसिन हार्मोन का इफेक्ट आपको सामने वाले पर विश्वास करने और ना करने की फीलिंग्स को बिल्ड करता है.
जब हम कम्यू‍निकेट करते हैं तो हमारी आंखें इमोशंस कन्वे करती हैं. यहां तक की इंटीमेसी और सोशल कंट्रोल भी कन्वे करती है. जब हम आई कॉन्टेक्ट करते हैं तो ऑक्सीटोसिन रिलीज होता है और हमारे प्यूपिल्स टेंड पार्टनर को कॉपी करते हैं. ये ट्रस्ट लेवल पर इफैक्ट करते हैं. जब प्यूपिल्स डिलेट होते हैं तो दूसरे व्यक्ति पर ट्रस्ट ज्यादा बढ़ जाता है. लेकिन जब आंखें सिंक्रोनाइज होती हैं तब ये ट्रस्ट और ज्यादा बढ़ जाता है.


अभी सर्दियां ठीक से गई भी नहीं हैं लेकिन गर्मियों ने दस्तक दे दी है. फरवरी माह में ही लोगों को गर्मी का अहसास हो गया है.
अभी तो गर्मियों की सिर्फ शुरूआत है लेकिन मौसम विभाग ने दी है एक बुरी खबर. मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल गर्मी का मौसम कुछ अधिक गर्म रहने वाला है. मौसम के जानकारों ने आने वाले दिनों में पूरे देश में तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान लगाया है और हालत यह है कि जनवरी का महीना पिछले 116 सालों में सबसे अधिक गर्म रहा.
भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने सीजन ‘मार्च से मई’ के लिए जारी अपने ग्रीष्मानुमान में कहा है कि कई राज्यों में गर्मी की शिद्दत बहुत ज्यादा रहने वाली है.
विभाग ने कहा कि देश का पश्चिमोत्तर हिस्सा सबसे अधिक प्रभावित रहेगा जहां तापमान सामान्य से एक डिग्री से भी ज्यादा रहेगा. देश के बाकी हिस्से में तापमान सामान्य से उपर रहेगा.
आईएडी ने कहा कि सामान्य तापमान से एक डिग्री ज्यादा तक तापमान देश के सभी मौसम संबंधी उपसंभागों में बने रहने की संभावना है. पश्चिमोत्तर भारत अपवाद है जहां तापमान सामान्य से एक डिग्री से भी ज्यादा रह सकता है. गर्मी के प्रकोप वाले वाले मुख्य क्षेत्रों में सामान्य से अधिक प्रतिकूल स्थितियां रहने की संभावना है.

सामान्य से अधिक तामपान वाले क्षेत्र में पंजाब, हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना शामिल हैं.
लू वाले मूल क्षेत्र में मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र, महराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र और आंध्रप्रदेश आते हैं.
वर्ष 2016 सन् 1901 के बाद सबसे गर्म साल रिकार्ड किया गया. पिछले साल राजस्थान के फालौदी में पारा 51 डिग्री तक चला गया था जो देश में अबतक का सबसे अधिक तापमान है.
पिछले साल प्रतिकूल मौसम के चलते 1600 से अधिक लोगों की जान गयी. इनमें 700 लोगों ने लू के चलते अपनी जान गंवायी.



क्या आप भी कमर दर्द से परेशान है? तो सावधान! जी हां, दुनियाभर में 700 मिलियन से ज्यादा लोग बैक पेन से परेशान है. शोधकर्ताओं ने चेताया है कि बैक पेन की वजह से 13% लोगों को जल्द मरने का खतरा रहता है.
क्या कहती है रिसर्च-
हालिया रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग स्पाइनल पेन (कमर और गर्दन) से गुजर रहे हैं उनमें 13 पर्सेंट अधिक जल्दी मरने के चांसेस रहते हैं.
ऑस्ट्रेलिया, सिडनी यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता मैथ्यू फर्नाडिज का कहना है कि बेक पेन ऐसी समस्या है जो अधिक लोगों को लंबे समय पर परेशान करती है और उनकी लाइफ को भी इफेक्ट करती है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
सिडनी यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर पाओलो फेरेरिया का कहना है कि बहुत से लोग मानते हैं कि बैक पेन से जान को कोई खतरा नहीं है. तकरीबन 84 पर्सेंट लोगों को बैक पेन लाइफ टाइम परेशान करता है और ओल्डर ऐज में तो बहुत ही ज्यादा.


कमर दर्द और मृत्यु‍-दर के बीच लिंक-
तेजी से बढ़ती हुई एजिंग पॉपुलेशन में आज स्पाइनल प्रॉब्लम एक बड़ी समस्या बन रही है. हालांकि शोधकर्ता अभी तक इस बात को नहीं जान पाए हैं कि आखिर कमर दर्द और मृत्यु़-दर के बीच क्या लिंक है. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि स्पाइनल प्रॉब्लम खराब हेल्थ का नतीजा है जिससे बॉडी के फंक्शंस भी ठीक से काम नहीं कर पाते. इसलिए ओल्डर पॉपुलेशन में मृत्यु दर समय से पहले बढ़ रही है.
यूरोपियन जर्नल ऑफ पेन में पब्लिश इस रिसर्च में 70 साल तक के 4,390 लोगों को शामिल किया गया.
कमर दर्द का इलाज-
रिसर्च में पाया गया कि कमर दर्द के लिए पैरासिटामॉल और एंटी इंफ्लेमेट्री ड्रग्स से लेकर सर्जरी तक कोई भी ट्रीटमेंट पूरी तरह से सक्सेसफुल नहीं है लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स बहुत हैं. बैक पेन का सबसे बेस्ट ट्रीटमेंट हेल्दी लाइफस्टाइल है. यहां तक कि फीजिकल एक्टिविटी को दिनचर्या में शामिल करना भी एक इलाज है.



स्‍वीडन के बारे में हमेशा यह कहा जाता है कि यहां नौकरीपेशा लोगों के लिए कई तरह के प्रयोग किए जाते हैं, जिससे वे अनुकूल माहौल और सहूलियत में काम करें. इसी वजह से कुछ समय पहले काम के 6 घंटे फिक्‍स किए गए थे, जिससे लोग दिल लगाकर काम करें और ऑफिस से गायब ना रहें. अब एक नए नियम को लाने पर विचार चल रहा है.

दरअसल यहां के ओवरटर्नेओ शहर के काउंसलर पेर-एरिक ने एक नया प्रस्‍ताव पेश किया है. जिसके तहत प्रेमी और विवाहित जोड़ों को 'सेक्‍स' के लिए समय दिए जाने का प्रस्‍ताव है. मजेदार बात ये है कि ब्रेक काम के बीच में मिलेगा. यानी काम के दौरान बीच में एक घंटे की छुट्टी, पार्टनर के साथ क्‍वालिटी टाइम बिताने के लिए दी जाएगी. इसके लिए उनकी सैलरी से पैसे भी नहीं कटेंगे.


इस प्रस्‍ताव को पेश करते ही ये सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. पेर-एरिक ने विदेशी मीडिया से बातचीत में कहा है कि उन्‍हें यह लगता है कि बिजी शिड्यूल की वजह से प्रेमी और विवाहित जोड़े ज्यादा समय एक साथ नहीं बिता पाते. इसलिए इस तरह के प्रस्‍ताव से लोगों के रिश्‍ते बेहतर होंगे.

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