विशेषज्ञों ने कहा है कि आम तौर पर स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाने वाला नारियल तेल उतना ही अस्वास्थ्यकर है जितना कि मक्खन और पशु वसा. पशु वसा को आम तौर पर स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता, जबकि जैतून और सूरजमुखी जैसे वनस्पति तेल स्वास्थ्य के लिए अच्छे विकल्प माने जाते हैं.


कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि नारियल तेल अन्य संतृप्त वसा से बेहतर हो सकता है. हालांकि, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई विश्वसनीय अध्ययन नहीं है.
संतृप्त वसा की अधिकता वाला आहार खाने से रक्त में लो डेंसिटी लाइपोप्रोटीन (एलडीएल) या बुरे कॉलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है. इससे धमनियां अवरद्ध हो सकती हैं या हृदय संबंधी रोगों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है. एएचए के अनुसार नारियल तेल में वसा का 82 प्रतिशत हिस्सा संतृप्त होता है. यह मात्रा मक्खन (63 प्रतिशत), बीफ (50 प्रतिशत) और सूअर वसा (39 प्रतिशत) से अधिक है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक परामर्श में कहा है कि लोगों को संतृप्त वसा के सेवन की मात्रा सीमित करनी चाहिए और इसकी जगह जैतून तथा सूरजमुखी जैसे गैर संतृप्त तेल का सेवन करना चाहिए.


1. त्रिकूट -सोठ, पीपल और काली मिर्च के सम्भाग के मिश्रण को त्रिकूट कहते है।
2. त्रिफला - आँवला, हर्र और बहेड़ा के सम्भाग के मिश्रण को त्रिफला कहते है।
3. त्रिकंटक - कटेली,हमसा और गोखरू के सम्भाग को त्रिकंटक कहते है।
4. त्रिमद - वायविंडग,नागरमोथा और चित्रक के सम्भाग को त्रिमद कहते है।
5. त्रिजात - दालचीनी,तेजपत्रऔर इलायची को त्रिजात कहते है।
6. त्रिलवण - सेंधा नमक,काला नमक और विडनमक को त्रिलवण कहते है।
7. क्षारत्रय -यवक्षार,सज्जीखार और सुहाग को क्षारत्रय लहते है।
8 . मधुत्रय - न्यूनधिक मात्र में एकत्रर मिले हुए घृत,मधु तथा गुड़ को मधुत्रय कहते है।
9 . त्रिगन्ध - गन्धक, हरताल और मैनसिल को त्रिगन्ध कहते है।


अगर आंख फड़कने का मतलब आपको भी यही लगता है कि यह किसी शुभ या अशुभ बात की निशानी है ~ तो आप गलत हो सकते हैं !
जी हां ~ आंख फड़कने का कारण आपकी सेहत भी हो सकती है!
सेहत के यह कारण - जो आंख फड़कने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं !तो अब अगर आपकी आंख फड़क रही हो ~ तो इन कारणों पर भी एक बार जरूर विचार करें !
* आंखों की समस्या :-आंखों में मांस पेशियों से संबंधित समस्या होने पर भी आंख फड़क सकती है !अगर लंबे समय से आंख फड़क रही है - तो एक बार आंखों की जांच जरूर करवा लें !हो सकता है आपको चश्मा लगाने की जरूरत हो या आपके चश्मे का नंबर बदलने वाला हो !

* तनाव :-तनाव के कारण भी आपकी आंख फड़क सकती है !खास तौर से जब तनाव के कारण आप चैन से सो नहीं पाते और आपकी नींद पूरी नहीं होती - तब आंख फड़कने की समस्या हो सकती है !
* थकान :-अत्यधिक थकान होने पर आंखों में भी समस्याएं होती हैं !इसके अलावा आंखों में थकान या कम्यूटर - लैपटॉप पर ज्यादा देर काम करते रहने से भी यह समस्या हो सकती है - इसके लिए आंखों को आराम देना जरूरी है !
* पोषण :-शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने पर आंख फड़कने की समस्या पैदा सकती है !इसके अलवा अत्यधिक कैफीन का शराब का सेवन भी इस समस्या को जन्म देता है !
* सूखापन :-आंखों में सूखापन होने पर भी आंख फड़कने की समस्या होती है !आंखों में एलर्जी - पानी आना - खुजली आदि समस्या होने पर भी ऐसा हो सकता है !


वैसे तो पसीना निकलना आम बात व जरूरी है लेकिन हद से ज्यादा अगर पसीना निकलता है तो आपके लिये इसे काबू करना मुश्किल हो सकता है !कुछ आसान से घरेलू उपचार अपना - बहुत हद तक अंडरऑर्म के पसीने को कंट्रोल कर सकते हैं !उदाहरण के तौर पर अगर आप सेब का सिरका नियमित रूप से लगाने लगेगें तो बगल से कम पसीना निकलेगा - यह त्वचा के रोम छिद्र को बंद कर के बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है !
* सेब का सिरका :-नहाने से पहले सेब के सिरके को अपने बगल में 30 मिनट के लिये रोजाना लगाएं - फिर हल्के साबुन से धो लें !अच्छा रिजल्ट पाने के लिये इसे रात को सोने से पहले लगा लें !
* बेकिंग सोडा :-बेकिंग सोडा और पानी मिला पेस्ट बना बगल में लगा लें और 30 मिनट के बाद इसे ठंडे पानी से धो लें !कुछ दिनों तक लगाने से आपकी स्किन ड्रार्इ रहने लगेगी !
* कार्नस्टार्च :-आर्मपिट पर टैल्कम पाउडर की जगह पर कार्नस्टार्च लगाएं !यह बगल की नमी को सोख लेगा और पसीने की बदबू को दूर रखेगा !
* नींबू :-नींबू से आप कर्इ गुना बगल के पसीने को दूर रखने में कामियाब हो सकते हैं !इससे आप अपने काले पड़ चुके आर्मपिट का रंग भी निखार सकते हैं !
* हमेशा लाइट काॅटन पहने :-आप जो कपड़ा पहनते हैं - कभी कभी वह भी आपको पसीना दे सकता है !इसलिये हमेशा कोशिश करें कि लाइट फैबरिक जैसे काटन आदि ही पहने !यह नमी को तुरंत ही सोख लेता है !
* मसालेदार खाने से बचें :-अगर आपको ज्यादा पसीना आता है तो मसालेदार खाना ना खाएं !लाल मिर्च और शिमला मिर्च डाले खाने को ना खाएं !

यूं तो तांबे के बर्तन काफी शुभ माने जाते हैं और इसमें रखा पानी भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है!लेकिन तांबे के बर्तन में रखी कुछ चीजें जहर भी बन सकती हैं !
# यह चीजें ~ तांबे के बर्तन में रखने पर - हो सकती हैं बेहद खतरनाक !
* दही :-दही को तांबे के बर्तन में रखना और उसका सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है !इससे फूड पॉइजनिंग हो सकती है और कसैला स्वाद - घबराहट या जी मचलाने जैसी समस्याएं हो सकती है !
* नींबू :-नींबू का रस - नींबू पानी या फिर नींबू को किसी भी रूप में अगर तांबे के बर्तन में रखते हैं तो इसमें मौजूद एसिड तांबे के साथ क्रिया करता है - जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है !
* सिरका :-सिरका एक प्रकार का अम्लीय पदार्थ है - इसे तांबे के बर्तन में या उसके साथ रखते हैं तो उनके मेल से होने वाली रासायनिक क्रिया सेहत पर बेहद हानिकारक प्रभाव डाल सकता है !
* अचार :-अचार में भी सिरके का प्रयोग किया जाता है अत: इसका प्रयोग तांबे के बर्तन में कभी न करें ~ 
इसके अलावा भी अचार में मौजूद खटाई तांबे के साथ मिलकर सेहत के लिए जहर का काम करती है !
* छाछ :-छाछ का प्रयोग सेहत के लिए फायदेमंद है ~ लेकिन इसका प्रयोग कभी भी तांबे के बर्तन में न करें !

१) जो मनमाना खान पान करते हैं अपनी आयुष्य क्षीण करता है … और संयम से खान पान रखता है तो लंबी आयुष्य हो जाती है |
२) अति अभिमान
३) जो अति बोलना, चलते-चलते बोलना, व्यर्थ बोलता है उसकी बुद्धि और आयुष्य क्षीण हो जाते हैं।
४) जो क्रोधी है।
५) जो अति खाता है, रात को देरी से खाता है।
६) जो ह्रदय में किसी के लिए द्रोह ठान के रखता है, वैर ठान के रखता है वो भी अपनी आयुष्य क्षीण करता है।पर जो मौन रहता है, कम बोलता है , श्वासोश्वास में भगवान का नाम स्मरण करता है वो अपना मन पवित्र करता है, बुद्धि पवित्र करता है और आयुष्य लंबी करता है।

किसी का सरल स्वभाव उसकी कमजोरी नहीं होती है। संसार में पानी से सरल कुछ भी नहीं होता है किन्तु उसका तेज बड़ी से बड़ी चट्टान के टुकड़े-टुकड़े कर देता है।
【◆】भूल करना मनुष्य का स्वभाव है, लेकिन भूल को स्वीकार कर लेना और वैसी भूल फिर न करने काप्रयास करना वीर एवं साहसी होने का प्रतीक है।
【◆】एक बुज़ुर्ग इंसान से मुलाक़ात हुई तो, मैंने गुज़ारिश की कि, जिंदगी की कोई नसीहत दीजिये मुझे उन्होंने अज़ीब सवाल किया कि कभी बर्तन धोये हैं?मैं उनके सवाल पर हैरान हुआ और सर झुका कर कहा कि जी धोये हैं।पूछने लगे, क्या सीखा? मैंने कोई जवाब नही दिया,वो मुस्कुराये और कहने लगे, बर्तन को बाहर से कम और अंदर से ज्यादा धोना पड़ता है, बस यही जिंदगी है।

जनहित के लिऐ ये मेसेज सबको पढ़ाऐ, आपके प्रयास से किसीके लाल को जिंदगी मिल जाऐदोस्तो हम जब नशीली चीज को छुते है सेवन करते है तो हमे बडा आनंद आता है.शराब की लत होना.गुटखा -पान मसाला की लतबिडी - सिगारेट की लत होना.
☘ जो लोग नशा करते है वो लोग नशा करते वक्त तो उन्हे बडा ही आनंद आता है. नशे मे खो जाते है किंतु इसके परिणाम मिलने पर हाथ -पांव कांपने लगे ऐसा सीन होता है.
☘ तंबाकु-गुटखा पानमसाला की लत
☘दोस्तो जितना हो सके इतना जल्दी इस नशे को ही अलविदा करे. क्योकि नशा करते वक्त तो मजा आयेगा किंतुउसके परिणाम इतने कष्टदायी होते है मैने खुद अपनी आंखो से कई मरीजों को देखा है.
☘ पान -मसाला गुटखा का सेवन अगर आप कर रहे हो तो कभी भी केंसर होना संभव है. शुक्राणु की संख्या भी कम हो सकती है.
☘ बिडी- सिगरेट का व्यसन
☘दोस्तो बिडी सिगरेट पीने से पैसे तो बरबाद होते ही हैकिंतु साथ साथ सबसे ज्यादा नुकसान हमारे फैफडे, किडनी , लिवर को होता है. कोई भी चीज का केंसर , टीबी , वगैरा जैसे धातक रोग हो सकते है.
☘ दारु का व्यसन
☘दारु कै सैवन से हमारी किडनी , लिवर ,फेफडे कमजोर हो जातै है कई बार फैल भी हो सकते है जिनका इलाज शायद कभी संभव ही ना हो ऐसी नौबत आ जाती है.आईऐ सब मिलकर कसम खाऐ नशे को कहेंगे अलविदा☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘
नशा मुक्ति का ईलाज
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इलायची 20 GMsसौंठ 20 GMsअजवाईन 20 GMsपिपलि 10 GMsसौंफ 50 GMsनिंबु का रस 5. टिस्पुनसेंधा नमक. 10 GMsसभी चीजों को मिलाकर पिसकर मिक्स करले. आैर छोटी छोटी गोलिया थोडा पानी आैर बबुल का गोंद का पानी मिलाकर बना लिजीयै. आैर २-३ दिन तक धुप पर सुखाऐ.जब भी आपको नशा करनै का मन हो तब यै गोली मुंह मे रख दै. दिनमे 5-6 बार अगर आप इसको मुंह मे रखेंगे तो धीरे धीरे नशे की आदत कम होती जायेगी.


सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गर्म पानी पिये !!
2 से 3 गिलास जरूर पिये !पानी हमेशा बैठ कर पिये !पानी हमेशा घूट घूट करके पिये !!<
घूट घूट कर इसलिए पीना है ! ताकि सुबह की जो मुंह की लार है इसमे ओषधिए गुण बहुत है ! ये लार पेट मे जानीचाहिए ! वो तभी संभव है जब आप पानी बिलकुल घूट घूट कर मुंह मे घूमा कर पिएंगे !

इसके बाद दूसरा काम पेट साफ करने का है ! रोज पानी पीकर सुबह शोचालय जरूर जाये !पेट का सही ढंग से साफ न होना 108 बीमारियो की जड़ है !
खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है !हमेशा डेड घंटे बाद ही पानी पीएं !इसे भी पढ़ें – पानी से जुड़ी ये BAD HABITS उसे आपके लिए बना सकती हैं जहर |The Art of Drinking Water
खाना खाने के बाद अगर कुछ पी सकते हैं उसमे दो चीजे आती हैं !!1) जूस2) छाज (लस्सी)
सुबह खाने के बाद अगर कुछ पीना है तो हमेशा जूस पिये !दोपहर को दहीं खाये ! या छाज पिये !और दूध हमेशा रात को पिये वह भी भोजन के डेड घंटे बाद!!इन तीनों के क्रम को कभी उल्टा पुलटा न करे !!

इसके इलावा खाने के तेल मे भूल कर भी refine oil का प्रयोग मत करे !(वो चाहे किसी भी कंपनी का क्यू न हो कोभी हो सकता है !अभी के अभी घर से निकाल दें ! बहुत ही घातक है !सरसों के तेल का प्रयोग करे ! या देशी गाय के दूध का शुद्ध घी खाएं ! ! (शुद्ध सरसों के तेल की पहचान है मुंह पर लगाते ही एक दम जलेगा ! और खाना बनाते समय आंखो मे हल्की जलन होगी !
चीनी का प्रयोग तुरंत बंद कर दीजिये ! गुड खाना का प्रयोग करे ! या शक्कर खाये !! चीनी बहुत बीमारियो की जड़ ! slow poison है !इसे भी पढ़ें – भोजन के बाद छह खतरनाक आदतों से बचें
खाने बनाने मे हमेशा सेंधा नमक या काला नमक का ही प्रयोग करे !! आयोडिन युक्त नमक कभी न खाएं !!

सुबह नाश्ता न कर सीधा ९ से ११ बजे तक भोजन कर लीजिये ! इस दौरान जठर अग्नि सबसे तेज होती है ! सुबह का खाना हमेशा भर पेट खाएं ! सुबह के खाने मे पेट से ज्यादा मन संतुष्टि होना जरूरी है ! इसलिए अपनी मनपसंद वस्तु सुबह खाएं !!
खाना खाने के तुरंत बाद वज्रासन में १५ मिनट बैठे या १५ मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ ! लेकिन इससे ज्यादानहीं !

रात का खाना सोने से २-३ घण्टे पहले खा ले, रात को खाना खाने के तुरंत बाद नहीं सोना ! रात को खाना खाने के बाद बाहर सैर करने जाएँ ! कम से कम 500 कदम सैर करे!
ब्रह्मचारी है (विवाह के बंधन मे नहीं बंधे ) तो हमेशा सिर पूर्व दिशा की और करके सोएँ ! ब्रह्मचारी नहीं है तो हमेशा सिर दक्षिण की तरफ करके सोएँ ! उत्तरऔर पश्चिम की तरफ कभी सिर मत करके सोएँ !
मैदे से बनी चीजे पीज़ा ,बर्गर ,hotdog,पूलड़ोग, आदि न खाएं ! ये सब मैदे को सड़ा कर बनती है !! कब्ज का बहुत बड़ा कारण है !!

इन सब नियमो का अगर पूरी ईमानदारी से प्रयोग करेंगे ! 1 से 2 महीने मे ऐसा लगेगा पूरी जिंदगी बदल गई है ! मोटापा है तो कम हो जाएगा ! hihgh BP,cholesterol,triglycerides,सब level पर आना शुरू हो जाएगा ! HDL बढ्ने लगेगा ! LDL ,VL DL कम होने लगेगा !! और भी बहुत से बदलाव आप देखेंगे !!

रक्त दान के लाभ हैं रक्तदान से जुड़े तथ्य (Facts related to blood donation se rakt daan ke labh)
  • एक वयस्क पुरुष / स्त्री में 5-6 लीटर तक रक्त होता है।
  • कोई भी व्यक्ति हर तीन माह में रक्त दान कर सकता है।
  • रक्त में प्लाज्मा नामक प्रवाही होता है।
  • 450 मि.ली. रक्त से 3 लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।
  • रक्त दान के लाभ, हर 2 सेकंड में भारत में किसी न किसी व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता होती है।
  • भारत में रक्त दान योग्य व्यक्तियों में सिर्फ 4% ही रक्त दान करते हैं।
  • 75% व्यक्ति वर्ष में एक या दो बार रक्त दान करते हैं।
  • 3 में से 1 व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी रक्त की आवश्यकता पड़ती है।
  • रक्त कोशिकाओं के प्रकार:
  • श्वेत रक्त कोशिकाएं जो रोगों से रक्षा करती हैं।
  • प्लेटलेट्स जो रक्त के बहने पर रक्त का थक्का जमा देते हैं।
  • रक्त दान के लाभ, लाल रक्त कोशिकाएं जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर प्रत्येक कोशिका में पहुंचाती हैं और कार्बनडाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक लाती हैं।

रक्त दान के फायदे हैं शरीर का तेज़ी से दोबारा रक्त बनाना (Blood recovery process or khoon dene ke fayde)

  • 24-48 घंटे में पूर्ण मात्रा में प्लाज्मा।
  • लाल रक्त कोशिकाएं – 3 सप्ताह के अन्दर।
  • प्लेटलेट्स एवंहल्की रक्त कणिकाएं –मिनटों में।
  • रक्त दान के फायदे, रक्तदान पूर्णतः सुरक्षित होता है।
  • रक्त दान के गुण, रक्त दान एक बहुत ही सरल और पुण्य का काम है।
  • रक्त दान के गुण, रक्त दान में सिर्फ 15-20 मिनट लगते हैं।
  • रक्त दान के फायदे, आप किसी का जीवन बचा सकते हैं रक्त दान करके।

रक्त दान करने के लाभ (Benefits of blood donation)

  • रक्तदान से किसी का जीवन बचाया जा सकता है।
  • नियमित रक्तदान से कुछ बड़ी शारीरिक समस्याओं को कम किया जा सकता है जैसे कोरोनरी ह्रदय रोग,स्ट्रोक, कोलेस्ट्रोल इत्यादि।
  • रक्त दान करने के लाभ, नयी रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में वृद्धि।
  • हीमोक्रोमिटोसिस के साथ संपर्क सहज होता है, कैलोरी जलती हैं।
  • नियमित रक्त दान करने वाला व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर सहजता से रक्त पा सकता है।
  • रक्त की जांच की नियमित होते रहती है।
  • समाज के प्रति कर्त्तव्य का निर्वाह होता है।
  • रक्त दान करने के लाभ, किसी का जीवन बचने की आत्म संतोष की भावना उत्पन्न होती है।
  • रक्त दान करने के पश्चात अपने नित्य कर्म किये जा सकते हैं।

मधुमेह हमारे शरीर में दबे पांव आता है. ज्यादातर लोगों को सामान्य जांच के दौरान डायबिटीज  होने का पता चलता है तो उन्हें धक्का पहुंचता है. कुछ में यह रोग आंखों या गुर्दे की तकलीफ के रूप में सामने आता है. मधुमेह या डायबिटीज के मरीज को हृदय संबंधी रोग के साथ-साथ कम उम्र में स्ट्रोक का खतरा भी पैदा हो जाता है.

शरीर में इंसुलिन नाम के हॉर्मोन के कम बनने से डायबिटीज होती है. इसमें सबसे आम है टाइप-2 डायबिटीज. उसके बाद है जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज). महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज के टाइप-2 डायबिटीज में बदलने का अंदेशा रहता है.

टाइप-1 डायबिटीज उतनी आम नहीं है, लेकिन यह ज्यादातर कम उम्र के लोगों को होती है. इसके लक्षण दिखाई देते हैं और रोगियों को शुरू से इंसुलिन लेना पड़ता है. खून में शर्करा का स्तर बहुत ज्यादा बढऩे पर वजन घटना, बहुत अधिक प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.

देश की 10 फीसदी आबादी को टाइप-2 डायबिटीज है. इलाज न करने पर इसके कारण आंखों, गुर्दे और नसों पर असर पडऩे लगता है. धमनियां जल्दी बूढ़ी होने लगती हैं और ब्रेन स्ट्रोक के साथ दिल का दौरे की आशंका रहती है. पैरों की ओर रक्त का प्रवाह कम हो जाता है और पैर काटने तक की स्थिति भी आ जाती है. 

इसलिए चेतावनी के शुरुआती संकेतों को समझना जरूरी है. मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ लिपिड, मूत्र मं  शर्करा का असामान्य स्तर, हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास है या पॉलिसिस्टिक ओवरी रोग या गर्भावस्था की स्थिति है तो डायबिटीज की जांच जरूर करवानी चाहिए.

डायबिटीज के इलाज के लिए रहन-सहन में बदलाव, खानपान में संयम, कसरत के अलावा गोलियां/ इंजेक्शन या इंसुलिन लेना जरूरी है. डायबिटीज के रोगियों को अत्यधिक कैलोरी वाली या शर्करा बढ़ाने वाली चीजें जैसे मिठाई, सॉफ्ट ड्रिंक से परहेज करना चाहिए. खाने के तेल की मात्रा प्रति माह प्रति व्यक्ति 500 मिलीलीटर तक सीमित करनी चाहिए और दिन में चार या पांच बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कुछ न कुछ खाना चाहिए.

आम, केला, अंगूर और चीकू जैसे कुछ फलों को छोड़कर सभी फल खाए जा सकते हैं. रोजाना तीस मिनट तेज चाल से चलना सबसे अच्छी कसरत है. घुटने या कमर के दर्द से परेशान लोग साइकिल चला सकते हैं, तैराकी कर सकते हैं या आइसोमीट्रिक एक्सरसाइज कर सकते हैं.

मधुमेह के इलाज के लिए दवाओं के आठ समूह हैं-बाइग्यूनाइड्स, सल्फोनाइल्यूरियस, मैग्लिटिनाइड्स, अल्फाग्लूकोजिडेज इनहिबिटर्स, पीपीएआर ए ऐगोनिस्ट, इन्क्रिटिन आधारित चिकित्सा (ग्लिप्टिन्स, जीएलपी-1ए), एसजीएलटी-2 रिसेप्टर इनहिबिटर्स (जल्दी ही भारतीय बाजार में मिलने लगेंगे) और इंसुलिन. डायबिटीज के रोगी इंसुलिन के नाम से ही डरते हैं.

और उसकी वजह है इससे जुड़े तीन बड़े भ्रमः इंसुलिन लेना एक बार शुरू कर दिया तो वापस गोलियों पर नहीं लौट सकते, दूसरे इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने में दर्द होता है और तीसरे हाइपोग्लाइसीमिया यानी रक्त शर्करा में कमी आम है और इससे जान का खतरा हो सकता है. वास्तव में गोलियां फिर से शुरू की जा सकती हैं, अगर इंसुलिन की शुरुआत उनके बेअसर रहने से न की गई हो या रोग ऐसी अवस्था में हो, जिसमें गोलियां नहीं ली जा सकतीं.

क्या करें?
नियमित कसरत करें, खान-पान का ध्यान रखें और ध्यान लगाएं.
वजन संतुलित रखें. जरूरी पड़े तो वजन कम करने वाली दवा भी लें.
अगर कोई और दवा फायदा नहीं कर रही हो तो इंसुलिन लेना जरूरी होगा.
शर्करा के स्तर की नियमित जांच करें. शर्करा स्तर कम नहीं होना चाहिए.
रिफाइन्ड और दूसरे प्रोसेस्ड आहार की बजाए फाइबर से भरपूर आहार लें.
रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखें. धूम्रपान न करें.
आंखों और पैरों का खास ख्याल रखें.


यह तो सभी जानते हैं कि तनाव के कारण खून में हानिकारक हॉर्मोन एंडोरफिन का स्राव होने लगता है. इनकी वजह से रक्त धमनियां सिकुड़ जाती हैं और दिल की धड़कन तेज होने से रक्तचाप बढ़ जाता है. कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाने से धमनियों की भीतरी परत में बदलाव आ जाता है.

इससे रक्त गाढ़ा होने लगता है या जमने लगता है, इससे दिल का दौरा पड़ सकता है. बार-बार तनाव होने से शरीर लगातार कई दिन तक तनाव में बना रहता है. इससे बचने के लिए कुछ लोग शराब और सिगरेट का सहारा लेते हैं, जबकि इनका सेवन नुक्सान को और बढ़ाता है. इनसे रक्तचाप बढ़ता है और धमनियों की दीवार और कमजोर होती है.

जीवनशैली और माहौल में बदलाव, नौकरी में बदलाव, नियमित कसरत, योग, ध्यान, अपने शौक पूरे करने और नियमित रूप से अवकाश लेने से जीवन में संतुलन बना रहता है. इससे तनाव और दिल पर मंडराते खतरे भी दूर हो जाते हैं. 





गोरी निखरी त्वचा पाने के लिए महिलाएं हर जतन करने के लिए तैयार रहती हैं। इसके लिए वे अपना काफी समय ब्यूटी पार्लर में भी बिताती हैं लेकिन कुछ खास फायदा नजर नहीं आता है। खूबसूरत त्वचा पाना कोई एक दिन का काम नहीं है। इसके लिए आपको हर रोज अपने चेहरे का विशेष ध्यान रखना चाहिए। त्वचा को निखारने में जितनी भूमिका ब्यूटी प्रोड्क्टस की होती है उसे कहीं ज्यादा आपके द्वारा लिए जा रहे है आहार की होती है। जिस तरह शरीर को पोषण की जरूरत होती है उसी तरह हमारी त्वचा को भी इसकी जरूरत होती है। आपकी त्वचा को गोरा निखरा बनाने के लिए हम लेकर आए हैं कुछ आसान टिप्स:


जरूरी विटामिन

अक्सर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनके क्रीम और लोशन विटामिन सी या ई मौजूद है तो उन्हें आहार की जरूरत नहीं है। लेकिन यह धारणा गलत है अगर आप इन विटामिनों से भरपूर फल या सब्जियां खाएंगी तो यह आपकी त्वचा के लिए फायदेमंद होगा। इन विटामिनों के सेवन से आपके चेहरे पर सूरज की रोशनी से चेहरे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा इसके अलावा ऐसे आहार झुर्रियों से भी बचाते हैं।

चेहरे की सफाई

गर्मी के मौसम में चेहरे को कई बार ठंडे पानी से धो सकते हैं। यह आपके चेहरे से गंदगी और मृत त्वचा को बाहर निकालेगा। जब भी कहीं बाहर से आएं तो अपने चेहरे को क्लींजर से साफ करें। अगर चेहरे पर पिंपल हैं तो एंटीबैक्टीररियल क्लींजर का प्रयोग करें जिससे पोर्स खुल जाएं और गंदगी साफ हो जाए।

दूध और गाजर का रस

गाजर में बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो कि त्वचा में कसाव लाता है। इस पैक को बनाने के लिये, गाजर को कस लीजिये और उसमें दूध मिला लीजिये। इसे अपने चेहरे पर कुछ मिनट के लिये लगा कर मसाज करें और फिर उसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इसके साथ दही भी मिला कर मसाज कर सकती हैं। अगर यह पैक लगाने के बाद आपका चेहरा ऑयली हो जाए तो आप हल्का सा फेस वॉश लगा कर मुंह धो सकती हैं। इसे लगातार इस्तेमाल करने से त्वचा में निखार आएगा।

हल्दी निखारे रंग

त्वचा की रंगत को निखारने के लिए हल्दी का प्रयोग सबसे उत्तम तरीका है। पेस्ट बनाने के लिए हल्दी और बेसन या फिर आटे का प्रयोग करें। हमेशा ध्यान रखें कि आप खड़ी हल्दी का ही प्रयोग करें न कि बाजार में मिलने वाली पैकेट हल्दी। एक मिक्स‍र में खड़ी हल्दी और थोड़ी सी ताज़ी मलाई डाल कर ब्लेंड करें। जब पेस्ट तैयार हो जाए तब उसमें दूध और आटा मिलाएं और गाढ़ा पे बनाएं। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 10 मिनट लगाएं और ठंडे पानी से धो लें।

चंदन बनाएं खूबसूरत

रंग निखारने के लिए चंदन का प्रयोग करना अच्छा है। चंदन से चेहरे को किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। गोरी रंगत देने के अलावा यह एलर्जी और पिंपल को भी दूर करता है। पेस्ट बनाने के लिए चंदन पाउडर में 1 चम्मच नींबू और टमाटर का रस मिलाएं और पेस्टन को अपने चेहरे और गदर्न में अच्छी  तरह से लगा लें।

उबटन बनाए गोरा

आपने देखा होगा लड़कियों को शादी से 15 पहले उबटन लगाना शुरु कर दिया जाता जिससे उनका रंग निखर जाता है। उबटन रंग निखारने का सबसे अच्छा व आसान तरीका माना जाता है। उबटन बनाने के लिए आप काली सरसों को दूध में उबाल कर सुखा लें फिर उसे रोज थोड़ा-थोड़ा पीस कर हाथ-पैर व चेहरे पर लगाएं। फिर देखें कैसे आपकी त्वचा कुछ ही दिनों में निखर जाएगी।

सेक्स कब और कैसे करें, माहवारी में सेक्स करें कि नहीं करें, करें तो कब करें ताकि गर्भ न ठहरे। ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिसने अकसर काफी युवा परेशान रहते हैं। सेक्स (Sex) को लेकर सबसे ज्यादा जिज्ञासा माहवारी के समय होती है। एक आम धारणा है कि मासिक धर्म होने के 13 से 16 दिन के बीच अगर आप सेक्स करते हैं तो गर्भ ठहरने की ज्यादा संभावना रहती है। हालांकि इसकी कोई गारंटी नहीं हैं कि बाकी के दिनों में गर्भ नहीं ठहर सकता है। वैसे सभी औरतों का मासिक चक्र भी अलग-अलग होता है। ये भी जरूरी नहीं है कि आपका मासिक चक्र नहीं आया है तो आप प्रेग्नेंट हैं।

आप गर्भवती हैं कि नहीं यह शंका अब घर बैठे दूर की जा सकती है। किसी दवाई की दुकान से प्रेग्नेंसी चेक किट (Home Pregnancy Test Kit) ले आएं और 5 मिनट में पता कर लें कि आप गर्भवती हैं या नहीं। इसके लिए सुबह का पहला यूरिन किट में दिए गए कार्ड के उपर डाल दें। पांच मिनट के बाद रिजल्ट आ जाएगा। गर्भधारण से बचने के लिए कई विकल्प हैं। कॉपर टी इसमें सबसे कारगर उपाय है। यह 10 साल तक के लिए प्रभावी होता है। यह एक छोटे टी के आकार का प्लास्टिक होता है जिसे स्त्री के गर्भाशय में लगाया जाता है। सेक्स के दौरान कंडोम का प्रयोग करने से गर्भ नही ठहरता है। लेकिन कंडोम का प्रयोग करने से पहले उसके सही ढंग से प्रयोग के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है।

प्रेग्‍नेंसी को रोकने के लिए महिला- पुरुष दोनों नसबंदी भी करा सकते हैं। वैसे गर्भधारण से बचने के लिए बाजार में कई प्रकार की गर्भनिरोधक गोलियां भी मौजूद है। जिनका सेवन करने से गर्भ नही ठहरता है। असुरक्षित यौन संबंध बनाने के 72 घंटे के भीतर इन गोलियों (Emergency Contraception Pills) का सेवन करने से गर्भधारण की संभावना कम होती है। इस गोली को खाने के बाद सेक्स करना सही रहता है। हालांकि खाली पेट यह गोलियां खाने से उल्टी हो सकती है। अगर गोली खाने के तीन घंटों में ही आपको उल्टी आ जाती है, तो जल्द से जल्द दूसरी गोली ले लीजिए। सेक्स के बाद गर्भाधरण रोकने के कुछ अन्य उपाय (Sex Tips to Avoid Pregnancy) निम्न हैं।

गर्भाधरण से बचने के लिए सेक्स टिप्स
  • बिना कंडोम के सेक्स न करें। माहवारी के समय अगर सेक्स करते हैं तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें। यह न सिर्फ गर्भधारण से बचाएगा बल्कि सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STDs) से भी बचाएगा।
  • गर्भनिरोधक गोलियां निर्देश के अनुसार ही खाएं। इसमें अनियमितता बरतने से गोली का प्रभाव खत्म हो जाता है और गर्भ ठहरने की संभावना बढ़ जाएगी।
  • पीरियड के समय कभी भी असुरक्षित सेक्स (Sex During Periods) नहीं करें। कई लोग समझते हैं कि उनका गणित काफी मजबूत है और वो माहवारी के दौरान भी बिना कंडोम लगाए सेक्स कर लेते हैं। भूल कर भी ऐसा नहीं करें। असुरक्षित सेक्स हमेशा खतरनाक होता है।
  • आप इस ग़लतफ़हमी में नहीं रहे कि अगर आप सेक्स के दौरान विदड्रा तकनीक (Withdrawal Method) अपनाते हैं तो गर्भ नहीं ठहर सकता है। सेक्स करते समय अक्सर पुरुष चरम पर पहुँचते ही अपने गुप्त अंग को पार्टनर के गुप्त अंग से बाहर निकाल लेते हैं। यह गलत तरीका है, इसमें भी गर्भ ठहरने का खतरा रहता है।
  • कभी-कभी सेक्स के दौरान चरमसुख के लिए स्त्री और पुरुष दोनों आपस में हस्तमैथुन करने लगते हैं। स्त्री अगर पुरुष का हस्तमैथुन करती है तो संभव है कि उसके ऊंगलियों में वीर्य लग जाए और अगर वो दुबारा यह ऊंगली अपने गुप्त अंग में डालती है तो संभव है कि वीर्य उसमें चला जाए।

बवासीर एक बहुत ही दुखदायी और तकलीफ देने वाला रोग होता है जिसमें मरीज को कहीं पर भी बैठने में काफी परेशानी होती है।
इसमें मरीज के गुदा द्वार में मस्से हो जाते हैं जिनमे निरंतर खून बहने और अत्यधिक दर्द होने कारन मरीज काफी कमजोर और दुखी हो जाता है। बवासीर के 2 प्रकार होते हैं – पहला बाहर की बवासीर (external hemorrhoid) और अन्दर की बवासीर (internal hemorrhoid).
बाहर की बवासीर में patient के गुदा द्वार के आसपास मस्से होते हैं जिनमे दर्द तो नहीं होता लेकिन खुजली होती है। उन मस्सों को अधिक खुजलाने की वजह से उनमें से खून भी आने लगता है।
अन्दर की बवासीर में गुदा के अन्दर मस्से होते हैं और मल करते समय जोर लगाने पर रोगी को बेहद तेज दर्द होता है और खून भी बाहर आने लगता है।
बवासीर से बचने के लिए पहले इसके होने के कारणों को भी जानने की जरुरत है, आइये जानते हैं इसके कारन

बवासीर के कारण

  • बवासीर के कारन (Causes of Piles in Hindi)
  • मिर्च-मसाले वाले भोजन का अधिक सेवन करना।
  • एक ही जगह पर अधिक समय तक बैठे रहना।
  • कई घंटो तक कार या गाडी में बैठे रहना।
  • शराब का अधिक करना।
  • शरीर में मोटापा होने पर भी बवासीर होने की सम्भावना होती है।
  • गर्भावस्था के समय महिला को कब्ज होने कारन बवासीर की परेशानी हो सकती है।
  • मल करते समय अधिक प्रेशर लगाने से भी यह परेशानी हो सकती है।
  • रात को अधिक देर तक जागना।
  • पानी का सेवन कम करने से भी बवासीर होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • मानसिक रोग या डिप्रेशन के कारन भी यह रोग हो सकता है।

बवासीर के लक्षण (Symptoms of Piles in Hindi)

  • उठने, बैठने, चलने पर गुदा के स्थान में अत्यधिक दर्द होना।
  • गुदा में बार-बार खुजली होना।
  • रोगी को मल त्यागते समय गुदा वाली जगह पर काफी दर्द होता है और खून भी निकलता है। अधिक खून के बह जाने के कारन रोगी को खून की कमी (anemia) भी हो सकता है।
  • गुदा द्वार में सूजन आ जाती है। अन्दर की बवासीर में मस्से बाहर की तरफ लटकने लगते हैं और मल करने में परेशानी होती है। इस कारन रोगी जोर लगता है जिससे उन मस्सों में से खून की धार बहने लगती है।
यह बवासीर के सामान्य लक्षण हैं जो ज्यादातर मरीजों में देखे जाते हैं।

बवासीर का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार (Ayurvedic Home Treatment of Piles in Hindi)


  • 2 लीटर छाछ में थोड़ी सी अजवाइन और जीरा मिलकर पी जाएँ, इसके नियमित सेवन से बवासीर धीरे धीरे ख़त्म हो जाती है।
  • गुड को जिमीकंद के साथ मिलकर नियमित सेवन करें। इसके सेवन से भी बवासीर पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
  • मल, मूत्र और gas आने पर उसको ज्यादा समय तक पेट में रोककर न रखें। इससे भी बवासीर होता है।
  • आयुर्वेदिक के अनुसार तिल (sesame) के लड्डू को खाने से भी बवासीर ख़त्म होता है।
  • तरल खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करें जैसे सूप, नारियल पानी (coconut water), पानी, लस्सी, छाछ आदि। इनके अधिक सेवन से मल तरल हो जाता है और मल त्यागते समय तकलीफ नहीं होती।
  • दूध को उबालकर उसमे पके केले को मसलकर डाल दें और घोल तैयार कर लें। इसको दिन में 2 से 3 बार सेवन करें।
  • चुकंदर का रस (beetroot juice), पालक का रस (spinach juice) और गाजर का रस (carrot juice) को रोज पियें।
  • रोजाना बवासीर वाली जगह पर नीम का तेल लगायें, कभी फायदा होगा।
  • शलजम, मेथी, करेला, गाजर, प्याज और अदरक का नियमित सेवन करें।
  • लगातार 3 महीने तक रोज सुबह जामुन का सेवन करें, लाभ मिलेगा।
  • मूली के नियमित से भी बवासीर रोग ख़त्म होता है।
  • पुदीना, अदरक, निम्बू का रस और शहद को पानी में मिलकर रोज सेवन करें।

बवासीर से बचे रहने के उपाय (How to Get Away From Piles in Hindi)

  • आम, पपीता और अंगूर का नियमित सेवन करने से बवासीर नहीं होता।
  • तनाव (stress) से दूर रहें और हमेशा खुश रहें।
  • आलू और बैंगन का कम सेवन करें।
  • Burger, समोसा, pizza, चाट-पकौड़े आदि fast foods का सेवन न करें।
  • तले भुने मसालेदार खाद्य पदार्थों से भी दूर रहें।
  • धुम्रपान, शराब आदि नशीले पदार्थों से दूर रहें।
  • जो लोग अधिक समय तक लगातार एक ही जगह पर बैठे रहते हैं उनको बवासीर होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए बीच-बीच में टहलें और हल्का व्यायाम करें।
  • कब्ज (constipation) को पैदा करने वाले किसी भी खाद्य पदार्थ से दूर रहें।
  • Doctors के मुताबित अत्यधिक उपवास करने से भी बवासीर हो सकता है। उपवास के दौरान आलू की खिचड़ी का अधिक बवासीर का कारन बन सकता है। इसलिए उपवास कम करें और इसके दौरान बीच-बीच में juice, छाछ, सूप आदि का सेवन करते रहें।
  • रात को जल्दी सोयें और सुबह जल्दी उठें।

बवासीर का सबसे बड़ा कारन अनियमित खानपान और अनियंत्रित lifestyle होती है, इसलिए अपने जीवन को सुधारें और अनुशासित करें।
इसके आलावा बवासीर से बचे रहने के लिए उचित परहेज भी करना जरुरी होता है, इसलिए सादा भोजन का ही सेवन करें।





  • पाँच तुलसी अर्क मर्दाना ताक़त बढ़ाने में बहुत ही फयदेमंद है। तुलसी के पत्ते खाने से शीग्रपतन भी दूर होता है।
  • दालचीनी को पीस कर रोजाना 1/2 चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ लेने से वीर्य बढ़ता है और सेक्स पावर भी बढ़ती है। सेक्स पावर बढ़ाने के लिए यह बहुत ही लाभदायक घरेलू उपचार है।
  • रोजाना एक्सर्साइज़ करने से शारीरिक ताक़त बढ़ती है।
  • रोजाना सेक्स करने से इंटेरेस्ट धीरे धीरे ख़तम हो सकता है। एक या दो दिन का गैप इंटेरेस्ट बरकरार रखने में लाभदायक हो सकता है।
  • सुबह-शाम 1 ग्राम जायफल का चूर्ण पानी के साथ लेने से योन दुर्बलता दूर होती है। यह सेक्स पावर बढ़ाने का बहुत ही अछा घरेलू उपाय है।
  • उरद की दल का सेवन करने से भी योन दुर्बलता दूर होती हैं।

  • 10:59:00 PM
HIV एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में जितनी जल्दी पता चल जाए, उतना अच्छा है. एचआईवी एड्स एक यौन संचारित रोग है. शुरुआत में इस बीमारी का इलाज नहीं करने से यह एड्स का रूप ले लेती है. इस लेख में हम HIV के लक्षणों के बारे में जानेंगे.
  • एचआईवी HIV के शरुआती लक्षण:
  • हमेशा बिना किसी कारण के हमेशा थकान महसूस करना HIV का लक्षण हो सकता है.
    और अगर थकावट हद से ज्यादा हो, तो आपको इसे बिल्कुल गम्भीरता से लेने की जरूरत है.
  • अगर कम उम्र में हीं आपके जोड़ों में बहुत ज्यादा दर्द रहने लगे और सूजन होने लगे, तो यह भी
    HIV का एक लक्षण हो सकता है.
  • हर दो-तीन दिन में बुखार आ जाना और ऐसा बार-बार लगातार होना HIV का लक्षण हो सकता है.
  • बिना किसी ठोस कारण के मांसपेशियों में तनाव या अकड़न होना भी HIV का लक्षण हो सकता है.
  • अगर आपको अक्सर गला पकने की शिकायत हो, तो यह भी HIV का एक लक्षण हो सकता है.
    गले में अक्सर खरास रहना, इसका लक्षण है.
  • बिना किसी कारण, अगर आपके सर में अक्सर दर्द रहता है और दिन चढ़ने के साथ दर्द बढ़ता जाता है,
    तो यह भी HIV का एक लक्षण हो सकता है.
  • अगर धीरे-धीरे आपका वजन जरूरत से ज्यादा कम होता हीं जा रहा है, तो यह भी HIV का लक्षण हो सकता है.
  • अक्सर शरीर में लाल-लाल चकते हो जाना या रैसेज हो जाना भी HIV का एक लक्षण हो सकता है.
  • अगर आप बिना किसी कारण के अक्सर तनावग्रस्त हो जाते हैं, तो यह भी HIV का एक लक्षण हो सकता है.
  • खाना खाने के बाद अक्सर बिना किसी कारण के उल्टी आ जाना या जी मचलना भी HIV का एक लक्षण हो सकता है.
  • अगर मौसम सामान्य रहने के बावजूद आपको अक्सर जुकाम की समस्या रहती हो, नाक बहता रहे
    तो यह भी HIV का एक लक्षण हो सकता है.
  • HIV Aids से बचने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि आप सम्बन्ध बनाते समय हमेशा कॉन्डोम का उपयोग करें.
  • अगर आपको HIV की आशंका हो, तो तुरन्त डॉक्टर से जाँच करवाएँ.


आज हम 8 ऐसी बुरी आदतों के बारे में बात करेंगे, जिनमें से ज्यादातर बुरी आदतों को हम लगभग हर दिन दोहराते हैं. और ये आदतें हमें लगातार नुकसान पहुंचाती है. इन आदतों को सुधारकर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं.


  • समय बर्बाद करना – ज्यादातर लोग अपने समय को लेकर सतर्क नहीं रहते हैं और इस कारण वे हर दिन गैर जरूरी कामों में अपने कई घंटे बर्बाद कर देते हैं. और यह बुरी आदत ढेरों लोगों में पाई जाती है.
  • Health के लिए समय नहीं निकालना – हमलोग स्वस्थ्य तो रहना चाहते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए समय नहीं निकालते हैं. अगर आप स्वास्थ्य के लिए समय निकालेंगे, तो आने वाले समय में कई परेशानियों से बचेंगे.
  • Internet – इन्टरनेट हमारे जीवन को सरल बनाने के लिए है, लेकिन कुछ लोग इन्टरनेट का उपयोग
    अपना समय बर्बाद करने के लिए करते हैं. हमें इन्टरनेट का उपयोग जरुर करना चाहिए लेकिन यह भी
    ध्यान देना चाहिए कि इसका हमारे जीवन पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े.
  • दूसरों की जिंदगी में बेवजह दखल देना – बहुत सारे लोगों की बुरी आदत होती है कि वे Directly या
    Indirectly दूसरों की जिंदगी में दखल देते रहते हैं. यह आदत न तो आपके लिए अच्छी है और न
    सामने वाले व्यक्ति के लिए.
  • अपनी बुराइयाँ दूर न करना – ज्यादातर लोग अपनी बुराई देखने की कोशिश हीं नहीं करते हैं. और बहुत कम लोग अपनी बुराई दूर करने की कोशिश करते हैं. याद रखिए आप अपनी बुराइयों को दूर किए बिना अपनी जिंदगी को बेहतर नहीं बना सकते हैं.
  • खुद को बेहतर बनाने के लिए कोशिश न करना – हम में से ज्यादातर लोगों की समस्या यह है कि हम
    अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के ख्वाब तो देखते हैं लेकिन अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए
    कुछ नहीं करते हैं.
  • अपने से कमजोर पर ताकत दिखाना – लगभग हर इन्सान की यह कमजोरी होती है कि वह अपने
    मन की भड़ास अपने से कमजोर व्यक्ति पर निकलता है.
  • सोचना बहुत ज्यादा पर करना कुछ भी नहीं – बहुत सारे लोग बहुत सारी चीजें सोचते हैं लेकिन करते
    कुछ नहीं इसी कारण से वो अपने जीवन में कोई खास उपलब्धि न प्राप्त कर पाते हैं.

गर्मी में लाल-लाल तरबूज किसे आकर्षित नहीं करता है. यह न केवल देखने में आकर्षक होता है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. इस लेख में हम जानेंगे, तरबूज के फायदे और तरबूज से जुड़ी अन्य बातें.
  • तरबूज से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें :
  • तरबूज खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए. तरबूज खाने के लगभग आधा-एक घंटा बाद पानी पीना चाहिए.
  • तरबूज को हमेशा तुरंत काटकर खाना चाहिए, घंटो पहले कटा हुआ तरबूज नहीं खाना चाहिए.
  • तरबूज शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता है.
  • गर्मियों में तरबूज का नियमित सेवन वजन नियंत्रित करता है.
  • पानी और फाइबर से भरपूर होने के कारण तरबूज कब्ज नहीं होने देता है.
  • मुंहासे पर तरबूज को हल्का-हल्का लगा लें, फिर एक मिनट के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें…. इससे फायदा पहुंचेगा.
  • तरबूज कैंसर के नये कण बनने से रोकता है.
  • पानी की अधिकता होने के कारण तरबूज त्वचा को चमकदार बनाता है.
  • तरबूज के टुकड़े में काली मिर्च का पाउडर, सेंधा नमक या काला नमक मिलाकर खाने से खट्टा डकार बंद हो जाता है.
  • तरबूज का सेवन मांसपेशियों के दर्द को कम करने में भी मदद करता है.
  • तरबूज हमारे बालों के लिए भी फायदेमंद है.
  • गर्मियों में तरबूज का नियमित सेवन रतौंधी और मोतियाबिंद से बचाता है.
  • तरबूज का 92 % भाग पानी होता है.
  • बासी तरबूज भूलकर भी नहीं खाना चाहिए.
  • तरबूज हमारी उर्जा का स्तर बढ़ाता है.
  • तरबूज खाने और पचाने में आसान होता है.
  • पानी के अत्यधिक मात्रा होने के कारण इसका सेवन वजन कम करने में भी मदद करता है.
  • जो लोग सुबह-सुबह थकावट महसूस करते हैं, उन्हें इसका सेवन जरुर करना चाहिये.
  • तरबूज का सेवन गर्भवती महिला के लिए भी लाभदायक है.

  • 10:43:00 PM
ध्यान का अभ्यास मन मस्तिष्क को सुकून पहुंचाता है. शारीरिक स्वास्थ्य के लिए टानिक का कार्य करता है और हमें चिरायु बनाता है. यह सिद्धांत हमारे समाज और संस्कृति में सैकड़ों वर्षो से रचा बसा हुआ है.

 अब यह सत्य आधुनिक चिकित्सा ने भी स्वीकार कर लिया है. हाल के वर्षों में जब से होलिस्टिक मेडिसिन का सिद्धांत उभरा है, कि चिकित्सा का अर्थ सिर्फ लक्षण को दूर कर देना ही नहीं है, बल्कि पूरी तौर पर तन-मन के स्वास्थ्य की देखरेख करना है. तब से बहुत से चिकित्सक ध्यान को भी चिकित्सा का अंग मानने लगे हैं.

इसके द्वारा व्यक्ति अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है, और बहुत से रोगों को दूर रख सकता है. लंबे समय तक चलने वाली या ताउम्र लगी रहने वाली अधिकांश बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, दमा, पेट का अल्सर, प्रदर रोग और यहां तक कि कैंसर के उपजने में भी मन का हाथ होता है. यह तथ्य आज आधुनिक चिकित्सक भी स्वीकार करने लगे हैं.

लेकिन ध्यान लगाना, योग में लीन होना, रोगों में अपना प्रभाव कैसे दिखाता है यह आज भी शोध का विषय बना हुआ है. इस दिशा में एक अनूठा प्रयोग किया गया है. जसलोक हॉस्पिटल मुंबई के भारतीय न्यूक्लियर मेडिसिन के विशेषज्ञों के अनुसार रेडियो सक्रिय ट्रेसर तत्व और स्पेक्ट तकनीक के जरिए यह आसानी से जाना जा सकता है कि ध्यान का मन मस्तिष्क की मेटाबोलिज्म पर क्या प्रभाव पड़ता है. एक प्रयोग में उन्होंने 8 महिलाओं में ध्यान लगाने से पहले और ध्यान लगाने के बाद मस्तिष्क की मेटाबोलिज्म का मेजरमेंट किया, तो पाया कि ध्यान लगाने के बाद यह दर कम हो गई है. यानी मस्तिष्क की स्पंदन क्रिया पहले से शांत हो गई.

इस प्रकार स्पष्ट हो गया कि ध्यान कई तरह से स्वास्थ्यवर्धक है. हमारे शरीर में यह जादू सा असर करता है. आज के आपाधापी भरे जीवन में ध्यान लगाकर अपने जीवन को स्वस्थ बनाया जा सकता है.


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इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी https://desinushkhe.blogspot.in/ की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।
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