केले के बारे में दुनिया जानती है, किसी शहर या कस्बे का कोई भी बाजार ऐसा नहीं जहाँ केला बिकते हुए देखने ना मिले। घर घर में पसंद किये जाने वाला केला १० हजार सालों से हमारे जीवन का हिस्सा है और आने वाले सैकडों हजारों सालों तक इस फल को हम सराहते रहेंगे। महज एक फल के तौर पर जाने वाले केले के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं कि केले के फल के अलावा केले के संपूर्ण पौधे में औषधीय गुणों का खजाना है। चलिए आज जानते हैं आधुनिक औषधि विज्ञान जगत ने केले के किन किन गुणों को क्लिनिकल तौर पर प्रमाणित किया है। क्या सिर्फ स्टार्च से भरपूर होने के अलावा केले में और भी कुछ है जो आम तौर पर ज्यादा लोगों को नहीं पता? देखिए ये स्लाईड्स..

केले के संदर्भ में रोचक जानकारियों और आधुनिक औषधि विज्ञान की शोध का जिक्र कर रहें हैं डॉ दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डाँग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहें हैं।

ताजा हरा केला दस्तरोधी होता है। केला पकने से पहले जब हरा होता है इसमें ऐसे स्टार्च पाए जाते है दस्त रोकने में मदद करते हैं। बंग्लादेश के देहाती इलाकों में आज भी नवजात शिशुओं को दस्त होने पर कच्चे केले को कुचलकर चटाते हैं।

कई रासायनिक और कृत्रिम दवाओं जैसे एस्परिन, इण्डोमेथासिन, सिस्टियामाइन, हिस्टामाइन आदि के सेवन के बाद कई लोगों को मुंह में छाले आ जाते है। आधुनिक शोधों से जानकारी मिलती है कि कच्चे केले को सुखाकर चूर्ण बना लिया जाए और इस चूर्ण को चाटा जाए तो मुंह के छालों को ठीक कर देता है। शोधों से यह भी जानकारी मिलती है कि केला का चूर्ण ना सिर्फ छालों की जगहों पर नयी कोशिकाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करता है अपितु केले में पाया जाने वाला फ़्लेवेनोयड ल्युकोसायनायडिन अल्सर (छाले) बनाने के वाले अल्सरोजेन को रोकता है।

केले का छिलका प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि को रोकता है। टेस्टोस्टेरोन की वजह से अक्सर प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ जाता है और अनेक शोध बताती हैं कि केले का छिलका टेस्टोस्टेरोन को सक्रिय नहीं होने देता।

केले के तने का रस पथरी में बेहद कारगर है। एक शोध के अनुसार केले के तने का रस किडनी में होने वाली पथरी, खास तौर से ओक्सालेट की बनी पथरी को तोडकर पेशाब मार्ग से बाहर निकाल देता है।

केले के फूल टाईप १ डायबिटीस के रोगियों के लिए कारगर उपाय है। अनेक शोधों के जरिये यह निष्कर्ष निकाला गया है कि फूल का रस तैयार करके टाईप १ डायबिटीज रोगियों को दिया जाए तो यह रक्त में शर्करा की मात्रा कम करने में मदद करता है।

केले की जडों और कच्चे केले में भी डायबिटीस नियंत्रण के लिए जबरदस्त गुण होते हैं। अनेक वैज्ञानिकों ने केले के पौधे के इन हिस्सों को डायबिटीस नियंत्रण के लिए उपयोग में लायी जाने वाली औषधि ग्लिबेनक्लेमाईड के समरूप पाया है।

अनेक शोधों के परिणामों पर नजर डाली जाए तो जानकारी मिलती है कि केले में वायरस नियंत्रण के जबरदस्त गुण होते है। कुछ शोध तो इसे MRSA और HIV के नियंत्रण तक के लिए उपयोगी मानते है

कई क्लिनिकल स्टडीस से यह भी ज्ञात हुआ है कि केले की पत्तियां त्वचा पर होने वाले अनेक सूक्ष्मजीवी खतरनाक संक्रमण को रोकने के लिए कारगर साबित हुयी हैं। पत्तियों का रस अनेक तरह के त्वचा विकारों को दूर करने में सक्षम है।  


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