अजीर्ण
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* 7-8 मेथी के दाने और एक चम्मच राई पानी के साथ निगल जाएं तो खट्टी डकारें आना बन्द हो जाती है। यदि डकारें बंद न हों तो एक बार और ले लें।
* 5 ग्राम अजवायन का तेल, 50 ग्राम गरम जल में डालक र पी लें, तत्पश्चात् सो जायें। कुछ समय बाद जगने पर पुन: एक खुराक ले लें। यदि बदहजमी अधिक हो तो मुंह में अँगुली डालकर रोगी को वमन करायें और फिर उक्त औषध लें।

अनिद्रा (नींद न आना )
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* कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें गहरी नींद नहीं आती है जिसके कारण वे विशेष परेशान हैं, ऐसे में उन्हें क्षीर पाक बनाकर सेवन करना चाहिए। क्षीर पाक बनाने के लिए अश्वगंधा का बारीक चूर्ण 10 ग्राम, गाय या भैंस का दूध 250 मिलीलीटर, 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर किसी मिट्टी के पात्र में धीमी आंच पर उबालें, जब जल उड़ जाए तो छानकर इस दूध का सेवन करें।
* सोने से पहले शहद गर्म पानी में घोलकर या दूध में शहद घोलकर पीयेें, भरपूर नींद आयेगी।

नेत्र रोग
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* बरगद की कोपलें तोडऩे से जो दूध निकलता है, वह दूध एक-एक बूँद आँखों में डालें इससे जाला, धुंधलका, लाली, जलन आदि रोग दूर होते हैं। गर्मियों में यह दूध सूर्य के निकलने से पहले ही आंखों में डालें तो विशेष लाभ होगा।
* आंख आने पर सौ ग्राम गुलाबजल में ढाई ग्राम फिटकरी डालें। इस लोशन की दो-दो बूँदें सुबह-शाम आँख में डालें तो आँखों की लाली, दर्द, चुभन, रडक़, ठीक होकर आँखों में ठण्डक पड़ जाती है।


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