● किडनी रक्त से विषैले पदार्थों को अलग करती है।किडनी समस्‍या होने पर चेहरे एवं पैरों में सूजन आना। समस्‍या से बचने के लिए ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रण में रखें। दर्द निवारक दवाओं का अधिक प्रयोग करने से बचें।
वैसे तो मानव शरीर का हर अंग बेहद जरूरी है, लेकिन किडनी की अपनी ही विशेषता है। यह रक्त में मौजूद पानी और विषैले पदार्थों को अलग करने का काम करती है। इसके अलावा किडनी हमारे शरीर में रक्तचाप नियंत्रण, सोडियम व पोटेशियम की मात्रा में नियंत्रण एवं रक्त की अम्लीयता में नियंत्रण का महत्वपूर्ण कार्य करती है। मानव शरीर की अंदरूनी गतिविधियां दिल के बाद सबसे ज्‍यादा किडनी पर ही निर्भर करती है।
किडनी एरिथ्रोपोइटिन नामक पदार्थ का उत्पादन में सहायता करती है। यह पदार्थ लाल रक्त कणों के निर्माण और हीमोग्लोबिन बनाने में सहायता करता है। इसके अलावा विटामिन डी को सक्रिय कर के अस्थि निर्माण करने में सहायता करती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटिज, परिवार में किसी के होने पर, अत्यधिक चर्बी, दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन, धूम्रपान, 50 साल से अधिक उम्र होना आदि। शरीर में किडनी संबंधी रोग होने की वजह है। अपनी दिनचर्या में बदलाव करके और अपने खान-पान की आदतों में सुधार करके आप किडनी को स्‍वस्‍थ रख सकते हैं। आइए ऐसे ही ककिडनी के स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ें कुछ पहलुओं को अपनाये।
》 किडनी की समस्‍या के लक्षण
चेहरे एवं पैरों में सूजन आनाभूख कम लगनाउल्टी होनाकमजोरी लगनाजल्दी थकानशरीर में रक्त की कमीउच्च रक्तचाप
》स्‍वस्‍थ किडनी के लिए उपाय
1) नमक की कम मात्रा
किडनी की समस्‍या से ग्रस्‍त लोगों को अपने आहार में नमक व प्रोटीन की मात्रा कम रखनी चाहिए जिससे किडनी पर कम दबाव पड़ता है।
2) नियमित एक्‍सरसाइज करें
प्रतिदिन नियमित रूप से एक्‍सरसाइज और शारीरिक गतिविधियां को करने से रक्तचाप व रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखा जा सकता हैं, जिससे डायबिटीज और उससे होने वाली क्रोनिक किडनी की बीमारी के खतरे को कम ‍किया जा सकता है।
3) मैग्नीशियम का सेवन
मैग्नीशियम की कमी से उच्‍च रक्तचाप और विषाक्त पदार्थों के बढ़ जाने से किडनी का काम प्रभावित होने लगता है। इसलिए पर्याप्‍त मात्रा में मैग्‍नीशियम को अपने आहार में शामिल करें। इसके लिए अपने आहार में हरी सब्जियां, बीज, नट और साबुत अनाज को शमिल करें।
4) डायबिटीज पर नियंत्रण
डायबिटीज को किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है। या आप यह कह सकते है कि डायबिटीज किडनी का सबसे बड़ा शत्रु है। इसलिए ब्‍लड में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहना आवश्यक होता है।
5) पानी का अधिक सेवन
कम मात्रा में पानी पीने से किडनी को नुक़सान होता है। पानी की कमी के कारण किडनी और मूत्रनली में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। जिससे पोषक तत्वों के कण मूत्रनली में पहुंचकर मूत्र की निकासी को बाधित करने लगते हैं। इसलिए किडनी के रोगों से बचने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहना चाहिए।
6) धूम्रपान का सेवन न करें
धूम्रपान का सेवन कई गंभीर समस्याओं का कारण हो सकता है, विशेषकर फेफड़े संबंधी रोगों के लिए। इसके सेवन से रक्त नलिकाओं में रक्त का बहाव धीमा पड़ जाता है और किडनी में रक्त कम जाने से उसकी कार्यक्षमता घट जाती है। इसलिए धूम्रपान के सेवन से बचें।
7) वजन को नियंत्रित रखें
अधिक वजन से भी किडनी को नुकसान हो सकता है। इसलिए संतुलित आहार एवं नियमित व्यायाम से अपने वजन को नियंत्रित रखें। ऐसा करने से आपको डायबिटीज, हृदय रोग एवं अन्य बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी जो क्रोनिक किडनी फेल्योर उत्पन्न कर सकती है।
8) दर्द निवारक दवाओं का सेवन
दर्द निवारक दवाओं के बहुत ज्‍यादा सेवन से बचना चाहिए। इसके अलावा डॉक्‍टर के सलाह के बिना दवाओं को सेवन आपकी किडनी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
9) ) परिवारिक इतिहास
अगर क्रोनिक किडनी डिसीज, मधुमेह या हृदय बीमारी का परिवारिक इतिहास रहा हो तो इस बारे में जानें। अगर ऐसा है तो आपको खतरा हो सकता है। इससे बचने के लिए नियमित रूप से अपनी किडनी की जांच करवाते रहें।
किडनी मूत्र के माध्यम से टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालने में मदद करती हैं। यदि किडनी ठीक नहीं होगी तो रक्त शुद्ध नहीं होगा और सेहत खराब हो सकती है। यहां दी बातों को ध्‍यान में रखकर आप किडनी को स्‍वस्‍थ रख सकते हैं। समस्‍या अधिक गंभीर होने पर किडनी को खतरे में डाले बिना डाक्‍टर की सलाह से इसका उपचार करायें।

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