● मानसिक तनाव का असर सीधे तौर पर शरीर पर नजर आता है। अगर मस्तिष्क स्वस्थ न हो तो शरीर भी सही ढ़ंग से काम नहीं कर सकता। दोनों एक-दूजे के पूरक जो हैं। तनाव दूर करने के लिए हम कितने तरह के प्रयोग करते हैं। बंद कमरे में बैठते हैं, कभी शॉपिंग करने बाजार चले जाते हैं। लेकिन, अगर हम घर के छोटे-मोटे काम करने लग जाएं तो तनाव दूर किया जा सकता है।
1) तनाव का असर-
मानसिक समस्याएं धीरे-धीरे हमारे शरीर पर बुरा असर डालती हैं। भावनात्मक अपरिपक्वता हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करती है। ऐसे में बीमारियां जल्द हमें घेर लेती हैं। दरअसल, होता यह है कि जब हम तनाव में होते हैं या परेशान होते हैं उस समय अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो जाते हैं।
》 तनाव कम करना है तो करें घर के काम-
1) जानकारों की राय है कि जब कभी भी तनाव हो तो हमें घर के काम करने चाहिए। घरेलू कामकाज तनाव को दूर कर आपको मानसिक शांति देता है। तो अगर आपको तनाव हो रहा है, तो घरेलू काम कीजिए।
2) जानकार इसके पीछे का तर्क भी देते हैं। उनका कहना है कि घरेलू काम करते समय दो मुख्य चीजें होती हैं- एक तो परेशानी की ओर से आपका ध्यान हट जाता है, दूसरे काम करने के दौरान आपका शरीर लय में आ जाता है और दिमाग तरोताजा हो जाता है। फिर काम होने के बाद साफ-सुथरे घर या अलमारी का होना आपको खुश कर देता है। काम खत्म होने तक न केवल आपकी मानसिक स्थिति पुनः नियंत्रण में आ जाती है, बल्कि तनाव के बादल भी हट जाते हैं।
3) महज 20 मिनट का घरेलू काम आपको राहत देता है।
4) घरेलू कामकाज जैसे- साफ-सफाई, बाग-बगीचे की देखभाल, मकान का रखरखाव आदि शारीरिक गतिविधियों के जरिए आप अपने तनाव को कम कर सकते है।
5) घर के कई सारे काम, जैसे- पोछा, झाड़ा-पोंझ, इस्त्री, अलमारी जमाना, फैलावा समेटना, करते समय आपको इन कामों के पॉजीटिव इफेक्ट न दिखाई देते हों। कई बार इन्हें करते हुए आप झल्ला भी जाते होगें, लेकिन सच तो यह है कि तनाव की स्थिति में ये काम एक तरह से आपके मन का गुबार छाँटने का काम कर जाते हैं।
6) घर के छिटपुट काम करके आप अपने तनाव या मन में चल रही उथल-पुथल से छुटकारा पा सकते हैं। बिखरा और फैला हुआ गंदा घर आपके तनाव को बढ़ा सकता है, जबकि साफ-सफाई करते रहने से आपको मानसिक शांति मिलती है।
7) घरेलू काम स्ट्रेसबस्टर थैरेपी के रूप में काम करते हैं। कोई वॉशिंग पावडर की महक के साथ वॉशिंग मशीन में घूमते कपड़ों का शोर एन्जॉय करता है। तो किसी को इस्त्री करते समय कपड़ों के साथ-साथ दिमागी उलझनों की सलवटें मिटाना पसंद आ जाता है। किसी को मन की शांति के लिए खाने की कोई नई डिश पकाना अच्छा लगता है, किसी को अपनी कार या स्कूटर धोना सुकून दे जाता है। कोई अलमारी में कपड़े जमाते-जमाते अपनी जिंदगी की उलझनों से पार पा जाता है, तो कोई डस्टिंग करते हुए अपना सारा गुस्सा और खीज धूल पर उतारकर मन के जाले झाड़ डालता है।
8) यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। ऐसी महिलाएं व पुरुष जिनके जिम्मे घरेलू काम बहुत कम आते हैं, वे भी अपने स्ट्रेस को कम करने के लिए झाड़ू-फटका करना पंसद करते हैं।
9) घरेलू काम आपके लिए डबल फायदे का सौदा। घर के छुटपुट काम करके आप अपने तनाव या मन में चल रही उथल-पुथल से छुटकारा पा सकते हैं, तो अब जब भी कभी कोई चिंता आपको सताए या कोई उलझन आपके मन को मथने लगे, उठाइए झाड़ू और झटकार दीजिए सारा तनाव। और हां, यह थैरेपी सिर्फ स्त्रियों के लिए नहीं बल्कि पुरुष के लिए भी कारगर है।

Categories

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी https://desinushkhe.blogspot.in/ की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।
Powered by Blogger.

Follow by Email