* यह फल सभी के लिए निरापद है । मधुमेह का रोग हो या किडनी की परेशानी ; सभी बीमारियों में इसका सेवन बेझिझक किया जा सकता है ।
* यह त्रिदोष नाशक है । अर्थात वात पित्त और कफ का नाश करता है । विभिन्न प्रकार के रोग मात्र अमरुद से ही ठीक किए जा सकते हैं । यह हृदय को शक्ति प्रदान करता है और घबराहट और बेचैनी को दूर करता है ।
* यह फल मस्तिष्क को तुरन्त ताकत देता है । एक दो फल खाने के बाद पुन: शरीर और मस्तिष्क में स्फूर्ति वापिस आ जाती है । यह दाह नाशक है । हाथ , पैरों की जलन को समाप्त करता है । यह फल , कमजोरी और मूर्छा को ठीक कर देता है ।
* खाँसी होने पर , इसके कम पके फल के टुकड़े करके उनमे नमक लगाएँ और आग पर भूनें । फिर उस अमरुद‬ को चबा चबाकर खाएँ । इस प्रकार करने से पुरानी से पुरानी खाँसी भी दूर हो जाती है ।
* लीवर damage हो गया हो या भूख कम लगती हो ; तब भी #अमरुद को इसी प्रकार खाना चाहिए । खाना खाने से कुछ देर पहले इस फल को खाया जाए तो यह आँतों और liver के लिए बहुत अच्छा रहता है । खाने के बाद इस फल को खाया जाए तो विरेचन काफी अच्छा होता है परन्तु इसके लिए भोजन कम मात्रा में खाना होगा ।
* मसूढ़ों के दर्द के लिए इसके पत्तों का प्रयोग किया जा सकता है ।इसके पत्तों को कूटकर उसमें नमक और लौंग मिलाकर उबाल लें । इस पानी से गरारे और कुल्ले करें । इससे मुख की दुर्गन्ध भी दूर होगी और मुँह के छाले भी ठीक हो जायेंगे ।

* मुंह में छाले हो गए हों तो इसकी कोमल पत्तियाँ चबाएँ । इन्हें निगल भी सकते हैं । तब भी यह लाभ ही करेंगी ।
* खाँसी या कफ होने पर इसके पत्तों का काढ़ा पीएँ । सूखे पत्तों का काढ़ा भी खांसी को ठीक करता है । यह काढ़ा बुखार को भी ठीक करता है ।
* अपचन होने पर इसकी छाल , पत्तियां और सौंठ मिलाकर काढ़ा बनाएँ और सवेरे शाम पीएँ ।
* संग्रहणी या अतिसार की समस्या से भी यह काढ़ा मुक्ति दिलाता है ।
* इसके ताज़े या सूखे पत्तों में तुलसी मिलाकर चाय भी बनाई जा सकती है । यह बहुत लाभप्रद होती है ।
* छोटे बच्चों को colitis की समस्या हो तो इसकी जड़ का छिलका 2 ग्राम लेकर उसका काढ़ा बनाकर दे सकते हैं ।
* अमरुद के सेवन से पुराने से पुरानी अतिसार की समस्या ठीक हो जाती है ।
* पेट में कीड़े हों तो नमक के साथ #अमरुद का सेवन करें ।
* भांग का नशा चढ़ गया हो तो इसके पत्तों का रस पिला दें या फिर अमरुद खिलाने से भी भाँग का नशा उतर जाता है ।

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