क्या आपको सुबह उठने पर गर्दन के पीछे की ओर तथा सिर में दर्द सा महसूस होता है? क्या आप बेवजह घबराहट, सिर चकराना, कमजोरी महसूस होना, चलते हुए दम फूलना, काम में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, टेंशन, थोड़ा सा काम करते ही थकान होने लगना, साँस चढना, कान में सांय-सांय का आवाज सुनाई देना, नर्वसनेस, पेशाब कम लगना, याददाश्त में कमी, भूख कम लगना, नजर कमजोर होना आदि कोई लक्षण भी अनुभव करते हैं?
यदि आपका जवाब "हाँ" है तो आपको सतर्क होने की आवश्यकता है.
ये लक्षण उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure or Hypertension) नामक रोग के हैं. यह रोग साईलेन्ट किलर कहलाता है, क्योंकि प्रारम्भ में इस रोग का पता नहीं चलता और धीरे धीरे समस्त अवयव तंत्र को प्रभावित करने लगता है.
क्या है रक्तचाप:-
हृदय निरंतर संकुचन व शिथिलन गति द्वारा रक्त का परिसंचरण शरीर के सभी भागों तक करता है. उच्च रक्तचाप रक्त का वह दबाव है जो हृदय के सिकुड़ने व फैलने से रक्त वाहिनी धमनियों द्वारा डाले गये दबाव से उत्पन्न होता है. हृदय के सिकुड़ने पर एक धक्के के साथ रक्त धमनियों में धकेला जाता है, इस दबाव को सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं. इसी प्रकार हृदय के फैलने से डायस्टोलिक प्रेशर होता है. रक्तचाप को स्फिग्मोमेनोमीटर नामक यंत्र से मापा जाता है.
सामान्य रक्तचाप :-
सामान्य स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप 120/80 mm Hg माना जाता है.
बीपी का प्रायिक नियम:-
सिस्टोलिक रक्तचाप= आयु+90
डायस्टोलिक रक्तचाप= सिस्टोलिक का दो तिहाई
अर्थात् एक 30 वर्ष के सामान्य व्यक्ति का सिस्टोलिक प्रेशर 30+90= 120 होगा तथा डायस्टोलिक प्रेशर 120×2/3=80 होगा. अतः उसका बीपी 120/80 होना चाहिए.
कारण:-
रक्तचाप के कई कारण हो सकते हैं.
१. मोटापे से धमनियों में रक्त प्रवाह में रूकावट आती है जिससे बीपी बढता है.
२. आलस्यपूर्ण जीवन व गरिष्ठ भोजन करने वालों की धमनियों में फैट का जमाव होने लगता है जिससे धमनियां सिकुड़ने लगती है और रक्तचाप बढता है.
३. मानसिक तनाव से केटेकोलेमीन सीक्रेशन बढ कर रक्तचाप में वृद्धि होती है.
४. धूम्रपान, तम्बाकू, आदि मादक द्रव्य निकोटीन के कारण धमनियों में रक्तचाप का कारक बनते हैं.
५. शराब आदि का सेवन
६. वृक्क विकार, एण्डोक्राइन ग्लैण्ड्स के विकार, यूरिक एसिड के बढने आदि से भी रक्तदाब बढता है.
७. नमक के अधिक सेवन से रक्तदाब बढने की सम्भावना बढ जाती है.
७. आयु के साथ धमनियों का लचीलापन कम होकर बीपी बढ जाता है.
८. डायबिटीज, हृदय रोग, मूत्रसंस्थान के रोग, किडनी रोग, गर्भावस्था आदि भी रक्तचाप का कारण होते हैं.
९. आनुवांशिकता को भी कुछ लोग हाई बीपी की एक वजह मानते हैं.
१०. तनावयुक्त, अवसादपूर्ण जीवनशैली.
११. व्यायाम, परिश्रम न करना.
आदि आदि.
उच्च रक्तदाब के दुष्परिणाम:-
१. बीपी से किडनी पर असर पड़ता है तथा उनकी क्रियाशीलता घट जाती है व रक्त में विषैले तत्व बढने लगते हैं.
२. धमनियों के कठोर होने से रक्तप्रवाह में बाधा आने लगती है व हृदय को पर्याप्त रक्त नहीं पहुँच पाता जिससे सीने में दर्द की शिकायत होने लगती है. आगे चलकर हृदयाघात की सम्भावना भी बढ जाती है.
३. मस्तिष्कगत रक्तप्रवाह में रूकावट होने से ब्रेन हैमरेज तक हो सकता है.
४. इससे आँखों की रक्तवाहिनियों पर जोर पड़ता है.
५. शारीरिक दुर्बलता, थकान, सिरदर्द आदि होने लगते हैं.
क्या करें:-
१. वजन कम करें.
२. नमक का सेवन कम करें.
३. कॉलेस्ट्रॉल बढाने वाले पदार्थ न खायें.
४. धूम्रपान, तम्बाकू सेवन न करें.
५. एल्कोहॉल न लें.
६. कोल्ड ड्रिंक, कॉफी, आईसक्रीम, चॉकलेट आदि न लें.
७. चोकर युक्त आटे का प्रयोग करें. फास्ट फूड, जंक फूड, नमकीन, आचार, तलाभुना खाने से परहेज रखें.
८. तनाव न लें. पर्याप्त नींद लें.
९. आधा कप पानी में नींबू की रस डालकर पीयें.
१०. पालक, मेथी, लौकी, अदरक, धनिया, पोदीना, टिण्डा, सन्तरा, जामुन, आँवला, केला, दूध, लहसुन आदि सेवन करें.
११. सलाद, फल, जूस, दूध यथायुक्ति प्रयोग करें.
१२. योग, प्राणायाम, व्यायाम, ध्यान, प्रातः भ्रमण, नियमित दिनचर्या में शामिल करें.
१३. मनोरंजन, हास्य, मित्रसमूह, परिजनों से चर्चा आदि को स्थान दें.
उपयोगी आयुर्वेदिक औषधियां:-
सर्पगंधाघन वटी, मुक्ता पिष्टी, जवाहरमोहरा, नागार्जुनाभ्र रस, योगेन्द्र रस, स्वर्ण सिन्दूर, चन्द्रकला रस, शिवा गुटिका, अर्जुनारिष्ट, स्मृतिसागर रस, आदि.
घरेलू चिकित्सा उपचार:-
१. तरबूज के बीज की गिरी व खसखस दाना बराबर पीसकर एक चम्मच सुबह शाम खाली पेट लें.
२. पानी में नींबू निचोड़कर बिना नमक की शिकंजी बना कर पीयें.
३. बेलपत्र का काढा पीयें.
४. लहसुन की कली चबाकर खायें या लहसुन का रस निकाल कर एक चम्मच खाली पेट लें.
५. रूद्राक्ष की माला धारण करना उपयोगी है. रूद्राक्ष पानी में घिसकर चटाना भी उपयोगी है.
६. संहेजना का स्वरस दस मिली दोनो समय पीना लाभप्रद है.
७. तुलसी के पत्ते चबाकर खायें या रस निकाल कर पी लें.
८. अर्जुन छाल का क्षीरपाक अत्यन्त फलप्रद है.
९. लौंग चबाना भी प्रभावकारी है.
१०. जटामांसी का काढा बनाकर पीना उपयोगी है.
**उपयोगी स्वानुभूत चिकित्सा:-
रस सिन्दूर 5 ग्राम
मुक्ता पिष्टी 5 ग्राम
जहरमोहरा पिष्टी 5 ग्राम
अकीक पिष्टी 5 ग्राम
गिलोय सत्व 5 ग्राम
शुद्ध शिलाजित 5 ग्राम
आमलकी रसायन 20 ग्राम
सर्पगंधाघन वटी 50 ग्राम
सबको गुलाबजल में घोटपीस कर एक-एक ग्राम की गोली बना लें. एक-एक गोली सुबह शाम अर्क गुलाब, अर्क सौंफ या ताजा पानी से लें. कुछ ही दिन में रक्तचाप सामान्य हो जाता है.
**एक अन्य भाँग युक्त योग है जो केवल चिकित्सकों की जानकारी हेतु प्रस्तुत है, प्रयोग हेतु स्वयं के विवेक से निर्णय करें-
ब्राह्मी घनसत्व 10 ग्राम
वच 20 ग्राम
शुद्ध भाँग 30 ग्राम
जटामांसी घनसत्व 40 ग्राम
खुरासानी यवानी 80 ग्राम
सर्पगंधा घनसत्व 160 ग्राम
सबको शंखपुष्पी के रस या काढे में घोटकर 500 मिग्रा की गोली बना लें.
1-1 गोली सुबह शाम ताजा पानी से या अर्क गुलाब या अर्क चंदन से लें.
आवश्यक परहेज, दिनचर्या व्यवस्थित करना व योग आदि करें तो उचित लाभ अवश्य मिलता है.
**विशेष:-
योगशास्त्र में दांयी नाक को सूर्य स्वर तथा बांयी नाक को चन्द्र स्वर माना जाता है. यदि उच्च रक्तचाप हो तो चन्द्र स्वर का अभ्यास करें, अर्थात् बांयी नाक से श्वास लें. यदि दांयी करवट लेकर लेटें तो स्वतः बांयी नाक खुल जाएगी और बांया स्वर चलने लगेगा. बांयी नाक से साँस लेने पर उष्णता दूर होकर शीतलता आती है और रक्तचाप सामान्य होने लगता है.

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