पीसीओएस तब होता है जब हार्मोन में असंतुलन पैदा हो जाती है। हार्मोन में ज़रा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है।
इस कंडीशन की वजह से ओवरी में छोटा अल्‍सर(सिस्‍ट) बन जाता है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो न केवल ओवरी और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है बल्कि यह आगे चल कर कैंसर का रुप भी ले लेती है।
दरअसल महिलाओं और पुरुषों दोनों के शरीरों में ही प्रजनन संबंधी हार्मोन बनते हैं। एंड्रोजेंस हार्मोन पुरुषों के शरीर में भी बनते हैं, लेकिन पीसीओएस की समस्या से ग्रस्त महिलाओं के अंडाशय में हार्मोन सामान्य मात्रा से अधिक बनते हैं। यह स्थिति सचमुच में घातक साबित होती है। ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होते हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। अंडाशय में ये सिस्ट एकत्र होते रहते हैं और इनका आकार भी धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है।
यह स्थिति पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम कहलाती है। और यही समस्या ऐसी बन जाती है, जिसकी वजह से महिलाएं गर्भ धारण नहीं कर पाती हैं।
ये हैं लक्षण - चेहरे पर बाल उग आना, मुंहासे होना, पिगमेंटेशन, अनियमित रूप से माहवारी आना, यौन इच्छा में अचानक कमी आ जाना, गर्भधारण में मुश्किल होना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिन की ओर महिलाएं ध्यान नहीं देती हैं।
क्‍यों होता है छोटी उम्र में पीसीओएस?
1. खराब डाइट :
जंक फूड, जैसे पीजा और बर्गर शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। अत्यधिक तैलीय, मीठा व वसा युक्त भोजन न खाएं। मीठा भी सेहत के लिये खराब माना जाता है। इस बीमारी के पीछे डयबिटीज भी एक कारण हो सकता है। अपने खाने पीने में हरी-पत्‍तेदार सब्‍जियों को शामिल करें और जितना हो सके उतना फल खाएं।
2. मोटापा:
मोटापा हर मर्ज में परेशानी का कारण बनता है। ज्यादा वसा युक्त भोजन, व्यायाम की कमी और जंक फूड का सेवन तेजी से वजन बढ़ाता है। अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में बढ़ोतरी होती है, जो ओवरी में सिस्ट बनाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसलिए वजन घटाने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। जो महिलाएं बीमारी होने के बावजूद अपना वजन घटा लेती हैं, उनकी ओवरीज में वापस अंडे बनना शुरू हो जाते हैं।
3. लाइफस्‍टाइल :
इन दिनों ज्‍यादा काम के चक्‍कर में तनाव और चिंता अधिक रहती है। इस चक्‍कर में लड़कियां अपने खाने-पीने का बिल्‍कुल भी ध्‍यान नहीं देती। साथ ही लेट नाइट पार्टी में ड्रिंक और स्‍मोकिंग उनकी लाइफस्‍टाइल बन जाती है, जो बाद में बड़ा ही नुक्‍सान पहुंचाती है। इसलिये अपनी दिनचर्या को सही कीजिये और स्‍वस्‍थ्‍य रहिये।
पीसीओएस को सही किया जा सकता है।
अगर हार्मोन को संतुलित कर लिया जाए तो यह अपने आप ही ठीक हो जाएगा।
आजकल की लड़कियों को खेल में भाग लेना चाहिये और खूब सारा व्‍यायाम करना चाहिये। इसके अलावा अपने खाने-पीने का भी अच्‍छे से ख्‍याल रखना चाहिय तभी यह ठीक हो सकेगा।
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सलाद पत्ता हरी पत्तेदार सब्जियां पौष्टिक होती हैं। इंसुलिन प्रतिरोध पीसीओएस का एक आम कारण होता है इसलिये अपने आहार में सलाद पत्ते को शामिल करें।
जौ यह साबुत अनाज ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कम होता है और लो जीआई इंसुलिन को बढने से रोकते हैं और पीसीओएस से लड़ते हैं।
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ब्रॉक्ली इस हरी सब्जी में विटामिन्स होते हैं, कम कैलोरी और कम जी आई भी होता है। इसे हर महिला को खानी चाहिये।
मशरूम लो कैलोरी और लो जीआई मशरूम जरुर ट्राई करें अगर आपको ओवरी सिस्ट है तो।
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टमाटर इसमें लाइकोपाइन होता है जो वेट कम करना है और इस बीमारी से भी बचाता है।
शकरकंद अगर आपको मीठा खाने का मन करे तो आप इस कम जीआई वाले खाघ पदार्थ को खा सकती हैं।
अंडा यह पौष्टिक होता है इसलिये इसे जब भी उबाल कर खाएं तो इसके पीले भाग को निकाल दें क्योंकि यह हार्ट के लिये खराब होता है। इसमें हाई कोलेस्ट्रॉल होता है।
दूध जो महिलाएं पीसीओएस से लड़ रही हैं उन्हें कैल्शियम की आवश्यकता होती है। यह अंडे को परिपक्वत करने में, अंडाशय को विकसित और हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। रोजाना दो गिलास बिना फैट का दूध पियें।
दही यह न केवल कैल्शियम से भरा होता है बल्कि यह महिलाओं में मूत्राशय पथ संक्रमण से लड़ने में भी मददगार होता है।
पालक इसमें बहुत कम कैलोरी होती है और यह एक सूपर फूड के नाम से जाना जाता है। इसे खाइये और पीसीओएस को दूर भगाइये।
मेवा बादाम में अच्छा फैट पाया जाता है जो कि दिल के लिये अच्छा होता है।
मुलहठी यह एक हर्बल उपचार है जिसे खाने से महिला के शरीर में पुरुष हार्मोन कम होने लगता है और पीसीओएस से सुरक्षा मिलती है।

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