आप चाहे कितनी भी समझदार मां क्यों ना हो, लेकिन बच्चों को गोद में उठाने के मामले में आप अकसर कुछ ना कुछ गलतियों तो जरूर करती होंगी। इसका सबसे ज्यादा असर आपकी रीढ की हड्डी पर पडता है और कमर दर्द हो जाता है। लेकिन आपको यह भी पता होना चाहिए कि बच्चे को कमर पर लेकर चलना आपकी कमर को कितना नुकसान पहुंचा सकता है। शोधकर्ताओं के द्वारा पता चला है कि कमर दर्द के मरीजों में हर साल लगभग एक करोड मदर्स शामिल होती है। पहले गर्भावस्था, फिर बच्चें को गोद में लेकर चलना और साथ में घर का काम करने से आपको कमर दर्द की समस्या होने की आशंका बढ जाती है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपने प्यार-दुलार और जिम्मेदारियों से मुंह मोड लें, लेकिन कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।
ज्यादा झुकें नहीं 
हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे को गोद में उठाने के लिए ज्यादा झुकने की वजह से भी आपकी कमर में तकलीफ हो सकती है, इसलिए बेहतर होगा कि आप बच्चे को झुककर उठाने की बजाय खडा होना जानता है, तो उसे खडे होकर उठाएं।
हील्स पहनें से बचें
एक या डेढ इंच की ऊंची एडी वाली सैंडल ठीक है, लेकिन इससे जयादा ऊंची एडी की कई मांसपेशियों को छोटा कर सकती हैं। इससे कमर के निचले हिस्से पर खिचांव पडता है।

बच्चों को हिप्स पर उठाना काफी आरामदायक लगता है, लेकिन लम्बे समय तक ऐसा करने से आप की बॉडी का आकार बिगड सकता है। इतना ही नहीं, इससे आपकी रीढ को सहारा देने वाली मांसपेशियों पर भी जोर पडता है और वे कमजोर हो जाती हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप बच्चे को छाती से चिपकाकर उठाएं और उसकी दोनों टांगें शरीर की दोनों साइड में कर लें।
ज्यादा वजन से बचें
कभी एक साथ ज्यादा वजन उठाने की कोशिश ना करें। बेहतर होगो कि बाजार में खरीदारी करते समय ट्रॉली की बजाय टोकरी में सामान इससे आपको अंदाजा रहेगा कि आपने कितने वजन का सामान खरीदा है। साथ ही, एक हाथ में सामान उठाने की बजाय दोनों हाथों में आधा-आधा सामान लें।
ना डालें कमर पर दबाव
ज्यादातर नई माताएं अपने बच्चे को दिन में कम से कम 40 मिनट तो उठाती ही हैं, जबकि दो साल पूरे करते-करते उसी बच्चे का वजन 13- से 18 किलो तक हो जाता है। इसलिए जब आप बच्चे को उठाएं, तो इसके लिए कमर पर दबाव ना डालें। यदि आप सम्भलकर बच्चे को उठाएंगी, तो आप कमर दर्द से बच सकती हैं।

ऐक्सेसाइज करें फिट रहें    
अकसर यह देखा गया है कि गर्भावस्था के बाद महिलाओं का पेट वाला हिस्सा लटक जाता है और इसका असर रीढ को सहारा देने वाली मांसपेशियों पर भी पडता है। इसके 2-3 साल में दूसरा बच्चा होने के बाद तो मामला और भी बिगड जाता है। इसलिए यदि आप स्वस्थ रहना चाहती हैं, तो हैल्थ को लेकर सजग रहें और नियमित पैदल भ्रमण करें और कसरत भी करें।




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