बार-बार या ज्यादा प्यास लगने से रोकने के लिए शरीर से अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ समाप्त हो जाना जल्ह्रास या निर्जलीकरण (अंग्रेज़ी:डी-हाइड्रेशन) कहलाता है। मानव शरीर को कार्य करने के लिए निर्धारित मात्रा में कम से कम ८ गिलास के बराबर (एक लीटर या सवा लीटर) तरल पदार्थ शरीर के लिए आवश्यक होता है जो व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता और आयु पर निर्भर करता है। परंतु अधिक कार्यशील व्यक्ति को इससे दो या तीन गुना अधिक तरल पदार्थ की आवश्यकता होती है। साधारण मानव जो तरल पदार्थ लेते हैं, वह उस तरल पदार्थ का स्थान ले लेती है जो शारीरिक कार्य को करने के लिए आवश्यक होता है। यदि कोई शरीर की आवश्यकता से कम तरल पदार्थ लेते हैं, तब निर्जलीकरण (डी-हाइड्रेशन) हो जाता है।

1 बार-बार या ज्यादा प्यास लगने से रोकने के लिए कच्चे चावल के दाने चबाने (१-२ ग्राम) लेकर चबा लीजिए, बार बार प्यास लगना बंद हो जाएगी। मधुमेह के रोगियों को बार बार प्यास लगने की समस्या का निवारण इसी फ़ार्मुले से किया जा सकता है। वैसे जब भी आप पहाडों या लंबी पगडंडियों पर सैर सपाटों के लिए जाएं, तो इस फ़ार्मुले को जरूर अपनाएं, प्यास कम लगेगी और थकान भी कम होगी। हर्बल फ़ार्मुला है, नुकसान कुछ नहीं, स्वस्थ रहिए- मस्त रहिए

2.दो चम्मच दही लें और उसमे छोटी इलायची पीस कर मिला लें और इसे चाटने से भी आपकी प्यास (thirsty) कम हो जाती है |

3.शहद को पानी में मिलकर कुल्ले करने से भी प्यास (thirsty) में कमी होती है

4.लॉन्ग को मुंह में रखकर आप अपनी प्यास (thirsty) की समस्या से निजात पा सकते है |

5.भुने हुए जौ के आटे को पानी में मिलाकर उसमे घी मिलाकर पीने से भी प्यास (thirsty) में कमी आती है साथ ही आपके शरीर की जलन भी ठीक हो जाती है |

6 पुदीने के पत्तो को पीसकर ठन्डे पानी में मिलाकर पीने से भी आपकी प्यास (thirsty) सही हो जाती है और साथ में शरीर को भी ठंडक मिलती है .


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