वजन कम करने के बारे में आप अपने बच्चों से बहुत कुछ सीख सकते हो। आप यह सोच रहे होंगे कि यह हम आपको क्या ज्ञान दे रहे है। लेकिन आपको बता दें यह बात बिल्कुल सही कि बच्चों का खाना खाने का तरीका आपमें हेल्दी फूड हैबिट्स विकसित कर सकता है। ध्यान दें, हम आपको बच्चों की तरह छोटे चम्मच या फिर छोटे जार में खाना खाने के लिए नहीं कह रहे हैं, बल्कि उनकी फूड हैबिट्स पर गौर करने के लिए कह रहे हैं, क्योंकि बच्चों की आदतें,जो आपको अजीब लगती हैं, असल में वो आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

बच्चों की तरह धीरे-धीरे और छोटे-छोटे बाइक खाएं
छोटे-छोटे बाइट खाना और उसे खूब देर तक चबाना सेहत के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। खाने को धीरे-धीरे खाना अधिक खाने से निजात दिलाता है। ईस्टर्न इलेनियस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया, जिसके तहत उन्होंने दो समूह बनाए। एक समूह को छिले हुए पिस्ता दिए और एक समूह को बिना छिले पिस्ता दिए। अध्ययन में सामने आया कि जिस समूह को छिले हुए पिस्ता दिए गए थे, उन्होंने औसतन 211 कैलोरी के पिस्ता खाए और जिस समूह को छिलके वाले पिस्ता दिए गए, उन्होंने 125 कैलोरी के पिस्ता खाए लेकिन दोनों ही समूहों में संतुष्टि स्तर एक समान सामने आया। ऐसे धीरे-धीरे खाने में कम कैलोरी गेन की।

बच्चों की तरह नई चीजें खानेमें खाएं
बच्चे नई-नई चीजें खाने की कोशिश करते हैं। एक्सपट्र्स मानते हैं कि नए-नए खाने से शरीर को सभी तरह के न्यूट्रिशंस, एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन मिल जाते हैं। खाने से बोरियत भी नहीं होती। एक शोध के अनुसार विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थ खाने से डायबिटीज का खतरा कम रहता है। ऐसे में बड़ों को भी बच्चों की तरह विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। विभिन्न तरह की रेसिपीस के साथ प्रयोग करने चाहिए।

बच्चों की तरह जिस खाने को न देखा है और न चखा है, उसे भी एंजॉय करना सीख सकते हैं
अक्सर हम नए खाने के लिए एक बार में तैयार नहीं होते लेकिन बच्चे नई चीज की ओर आकर्षित होते हैं, साथ ही उसके टेस्ट को एंजॉय भी करते हैं। खासकर ऑर्गेनिक फूड, जिसे आप भी पसंद कर सकते हैं। जिस तरह वे नट्स और फ्रूट्स खाते हैं, उसी तरह आप भी इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह भी आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होगा।

खाने को लेकर बहुत उत्साहित सीख सकते हैं
बच्चे खाने को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित होते हैं, वे मजे लेकर खाते हैं। खाने को ही नहीं, वे तो खाने से भरी टेबल देखकर ही आनन्दित हो जाते हैं लेकिन बड़ों के साथ ऐसा नहीं होता। वे खाने को लेकर बहुत कम उत्साहित होते हैं। वे खाने को दिनचर्या मानते हैं। बहुत कम लोग ही स्वाद का आनन्द लेते हैं। एक्सपट्र्स मानते हैं कि बिना मन से खाया गया खाना ज्यादा फायदा नहीं करता।

पेट भरने के बाद बिल्कुल भी नहीं खाना सीख सकते हैं
बच्चों की सबसे अच्छी आदत होती है, जब उनका पेट भर जाता है तो एक बाइट भी नहीं खा सकते। फिर भले ही आप कितनी कोशिश कर लें, बच्चा खाने को फेंक भी देता है। लेकिन बड़े पेट भरने के बाद मन नहीं भरा तो भी खाते रहते हैं। इस तरह की ओवर ईटिंग उन्हें भारी पड़ती है। ऐसे में जब भूख हो तो ही खाइए, बिना भूख के नहीं खाइए। बच्चों के खाने का समय तय होता है लेकिन आपके खाने का समय आगे-पीछे होता रहता है, यह भी सेहत के लिए सही नहीं है।

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