क्या बुखार में ठंडे पानी की पट्टियां रखने से वैज्ञानिक तौर पर भी फायदा होता है? अगर हां तो कितना, क्‍या बुख़ार होने पर ठंडे पानी की पट्टियां रखनी चाहिए? चलिये विस्तार से जानें।

1 बुख़ार में ठंडे पानी की पट्टियां रखना हम बचपन से देखते आ रहे हैं कि जब कभी भी बुखार आता है तो मां सिर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखती है। लोग सलाह भी देते हैं कि बुख़ार उतारने के लिए ठंडे पानी की पट्टियां रखें। लेकिन क्या बुखार में ठंडे पानी की पट्टियां रखने से वैज्ञानिक तौर पर भी फायदा होता है? अगर हां तो कितना, क्‍या बुखार होने पर ठंडे पानी की पट्टियां रखना सही है, चलिये आज इस बारे में विस्तार से जानते हैं -

2 बुखार में पट्टियों का काम जब बुखार 101 डिग्री फैरेनहाइट से ऊपर जाता है तो स्थिति गंभीर हो जाती है। और फिर इसके 103 डिग्री फैरेनहाइट तक पहुंचने पर बहुत ज्यादा घबराहट होती है। ऐसे में डॉक्टर बुखार के लिए दवाएं तो देते हैं लेकिन कई बार दवाएं खाने के बावजूद शरीर का तापमान सामान्य नहीं होता है। ऐसे में ठंडे पानी की पट्टियों या स्पंज को माथे पर रखने से बुखार को कम करने की कोशिश की जाती है।

 3 क्या सुरक्षित है ये तरीका जब बुखार 102 डिग्री फैरेनहाइट से उपर जाए तो उसे नियंत्रित करना ज़रूरी हो जाता है नहीं तो इससे दौरा भी पड़ सकता है। ठंडे पानी की पट्टियां या स्पंज करने से तापमान कम करके मरीज़ को राहत पहुंचाई जा सकती है। छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ ये तरीका अपनाया जा सकता है क्योंकि उन्हें बुखार बहुत तेज होने पर दौरा पड़ने का आशंका अधिक रहता है।

 4 बर्फ या बर्फ के पानी का इस्तेमाल न करें पट्टी करने के लिये बर्फ के पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये। इसके लिये हमेशा ताज़ा पानी ही लें। डॉक्टर रमन कुमार के अनुसार सिर्फ सिर, माथा और हथेली पर पानी की पट्टियां रखने से फायदा अधिक नहीं होगा, इसके लिए पूरे शरीर में स्पंज या पट्टियां करनी चाहिए। बल्कि अगर मरीज़ बहुत ज्यादा कमज़ोरी महसूस न कर रहा हो तो उसे नहाना भी चाहिए। इससे उसका तापमान सामान्य होता है।

 5 बर्फ के पानी का इस्तेमाल कब करें बर्फ के पानी का इस्तेमाल केवल तभी करना चाहिए जब बुखार 104 से105 डिग्री फैरेनहाइट तक हो गया हो। ध्यान रहे कि स्पंजिंग बुखार के लिए स्थायी उपचार नहीं है बल्कि तापमान को सामान्य करने का तरीका है। बैक्टीरिया आ वायरस से लड़ने के लिए शरीर को उचित दवाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिये।

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