बवासीर एक बहुत ही दुखदायी और तकलीफ देने वाला रोग होता है जिसमें मरीज को कहीं पर भी बैठने में काफी परेशानी होती है।
इसमें मरीज के गुदा द्वार में मस्से हो जाते हैं जिनमे निरंतर खून बहने और अत्यधिक दर्द होने कारन मरीज काफी कमजोर और दुखी हो जाता है। बवासीर के 2 प्रकार होते हैं – पहला बाहर की बवासीर (external hemorrhoid) और अन्दर की बवासीर (internal hemorrhoid).
बाहर की बवासीर में patient के गुदा द्वार के आसपास मस्से होते हैं जिनमे दर्द तो नहीं होता लेकिन खुजली होती है। उन मस्सों को अधिक खुजलाने की वजह से उनमें से खून भी आने लगता है।
अन्दर की बवासीर में गुदा के अन्दर मस्से होते हैं और मल करते समय जोर लगाने पर रोगी को बेहद तेज दर्द होता है और खून भी बाहर आने लगता है।
बवासीर से बचने के लिए पहले इसके होने के कारणों को भी जानने की जरुरत है, आइये जानते हैं इसके कारन

बवासीर के कारण

  • बवासीर के कारन (Causes of Piles in Hindi)
  • मिर्च-मसाले वाले भोजन का अधिक सेवन करना।
  • एक ही जगह पर अधिक समय तक बैठे रहना।
  • कई घंटो तक कार या गाडी में बैठे रहना।
  • शराब का अधिक करना।
  • शरीर में मोटापा होने पर भी बवासीर होने की सम्भावना होती है।
  • गर्भावस्था के समय महिला को कब्ज होने कारन बवासीर की परेशानी हो सकती है।
  • मल करते समय अधिक प्रेशर लगाने से भी यह परेशानी हो सकती है।
  • रात को अधिक देर तक जागना।
  • पानी का सेवन कम करने से भी बवासीर होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • मानसिक रोग या डिप्रेशन के कारन भी यह रोग हो सकता है।

बवासीर के लक्षण (Symptoms of Piles in Hindi)

  • उठने, बैठने, चलने पर गुदा के स्थान में अत्यधिक दर्द होना।
  • गुदा में बार-बार खुजली होना।
  • रोगी को मल त्यागते समय गुदा वाली जगह पर काफी दर्द होता है और खून भी निकलता है। अधिक खून के बह जाने के कारन रोगी को खून की कमी (anemia) भी हो सकता है।
  • गुदा द्वार में सूजन आ जाती है। अन्दर की बवासीर में मस्से बाहर की तरफ लटकने लगते हैं और मल करने में परेशानी होती है। इस कारन रोगी जोर लगता है जिससे उन मस्सों में से खून की धार बहने लगती है।
यह बवासीर के सामान्य लक्षण हैं जो ज्यादातर मरीजों में देखे जाते हैं।

बवासीर का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार (Ayurvedic Home Treatment of Piles in Hindi)


  • 2 लीटर छाछ में थोड़ी सी अजवाइन और जीरा मिलकर पी जाएँ, इसके नियमित सेवन से बवासीर धीरे धीरे ख़त्म हो जाती है।
  • गुड को जिमीकंद के साथ मिलकर नियमित सेवन करें। इसके सेवन से भी बवासीर पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
  • मल, मूत्र और gas आने पर उसको ज्यादा समय तक पेट में रोककर न रखें। इससे भी बवासीर होता है।
  • आयुर्वेदिक के अनुसार तिल (sesame) के लड्डू को खाने से भी बवासीर ख़त्म होता है।
  • तरल खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करें जैसे सूप, नारियल पानी (coconut water), पानी, लस्सी, छाछ आदि। इनके अधिक सेवन से मल तरल हो जाता है और मल त्यागते समय तकलीफ नहीं होती।
  • दूध को उबालकर उसमे पके केले को मसलकर डाल दें और घोल तैयार कर लें। इसको दिन में 2 से 3 बार सेवन करें।
  • चुकंदर का रस (beetroot juice), पालक का रस (spinach juice) और गाजर का रस (carrot juice) को रोज पियें।
  • रोजाना बवासीर वाली जगह पर नीम का तेल लगायें, कभी फायदा होगा।
  • शलजम, मेथी, करेला, गाजर, प्याज और अदरक का नियमित सेवन करें।
  • लगातार 3 महीने तक रोज सुबह जामुन का सेवन करें, लाभ मिलेगा।
  • मूली के नियमित से भी बवासीर रोग ख़त्म होता है।
  • पुदीना, अदरक, निम्बू का रस और शहद को पानी में मिलकर रोज सेवन करें।

बवासीर से बचे रहने के उपाय (How to Get Away From Piles in Hindi)

  • आम, पपीता और अंगूर का नियमित सेवन करने से बवासीर नहीं होता।
  • तनाव (stress) से दूर रहें और हमेशा खुश रहें।
  • आलू और बैंगन का कम सेवन करें।
  • Burger, समोसा, pizza, चाट-पकौड़े आदि fast foods का सेवन न करें।
  • तले भुने मसालेदार खाद्य पदार्थों से भी दूर रहें।
  • धुम्रपान, शराब आदि नशीले पदार्थों से दूर रहें।
  • जो लोग अधिक समय तक लगातार एक ही जगह पर बैठे रहते हैं उनको बवासीर होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए बीच-बीच में टहलें और हल्का व्यायाम करें।
  • कब्ज (constipation) को पैदा करने वाले किसी भी खाद्य पदार्थ से दूर रहें।
  • Doctors के मुताबित अत्यधिक उपवास करने से भी बवासीर हो सकता है। उपवास के दौरान आलू की खिचड़ी का अधिक बवासीर का कारन बन सकता है। इसलिए उपवास कम करें और इसके दौरान बीच-बीच में juice, छाछ, सूप आदि का सेवन करते रहें।
  • रात को जल्दी सोयें और सुबह जल्दी उठें।

बवासीर का सबसे बड़ा कारन अनियमित खानपान और अनियंत्रित lifestyle होती है, इसलिए अपने जीवन को सुधारें और अनुशासित करें।
इसके आलावा बवासीर से बचे रहने के लिए उचित परहेज भी करना जरुरी होता है, इसलिए सादा भोजन का ही सेवन करें।




Categories

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी https://desinushkhe.blogspot.in/ की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।
Powered by Blogger.

Follow by Email