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ध्यान का अभ्यास मन मस्तिष्क को सुकून पहुंचाता है. शारीरिक स्वास्थ्य के लिए टानिक का कार्य करता है और हमें चिरायु बनाता है. यह सिद्धांत हमारे समाज और संस्कृति में सैकड़ों वर्षो से रचा बसा हुआ है.

 अब यह सत्य आधुनिक चिकित्सा ने भी स्वीकार कर लिया है. हाल के वर्षों में जब से होलिस्टिक मेडिसिन का सिद्धांत उभरा है, कि चिकित्सा का अर्थ सिर्फ लक्षण को दूर कर देना ही नहीं है, बल्कि पूरी तौर पर तन-मन के स्वास्थ्य की देखरेख करना है. तब से बहुत से चिकित्सक ध्यान को भी चिकित्सा का अंग मानने लगे हैं.

इसके द्वारा व्यक्ति अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है, और बहुत से रोगों को दूर रख सकता है. लंबे समय तक चलने वाली या ताउम्र लगी रहने वाली अधिकांश बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, दमा, पेट का अल्सर, प्रदर रोग और यहां तक कि कैंसर के उपजने में भी मन का हाथ होता है. यह तथ्य आज आधुनिक चिकित्सक भी स्वीकार करने लगे हैं.

लेकिन ध्यान लगाना, योग में लीन होना, रोगों में अपना प्रभाव कैसे दिखाता है यह आज भी शोध का विषय बना हुआ है. इस दिशा में एक अनूठा प्रयोग किया गया है. जसलोक हॉस्पिटल मुंबई के भारतीय न्यूक्लियर मेडिसिन के विशेषज्ञों के अनुसार रेडियो सक्रिय ट्रेसर तत्व और स्पेक्ट तकनीक के जरिए यह आसानी से जाना जा सकता है कि ध्यान का मन मस्तिष्क की मेटाबोलिज्म पर क्या प्रभाव पड़ता है. एक प्रयोग में उन्होंने 8 महिलाओं में ध्यान लगाने से पहले और ध्यान लगाने के बाद मस्तिष्क की मेटाबोलिज्म का मेजरमेंट किया, तो पाया कि ध्यान लगाने के बाद यह दर कम हो गई है. यानी मस्तिष्क की स्पंदन क्रिया पहले से शांत हो गई.

इस प्रकार स्पष्ट हो गया कि ध्यान कई तरह से स्वास्थ्यवर्धक है. हमारे शरीर में यह जादू सा असर करता है. आज के आपाधापी भरे जीवन में ध्यान लगाकर अपने जीवन को स्वस्थ बनाया जा सकता है.


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